मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

श्रीमद् भागवत के अनुसरण से भक्तों का होता है कल्याण - पं जय श्रवण

कलश यात्रा के साथ बलौदी (बेरला) में श्रीमद् भागवत कथा का हुआ शुभारंभ 

19 फरवरी को कृष्ण जन्मोत्सव व 21 को श्रीकृष्ण-रूखमणी विवाह 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 16 फरवरी 2026 - बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक के ग्राम बलौदी में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पहले दिन रविवार की शाम 4 बजे मंगल कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा स्थल से भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली गई जिसमें शामिल पीतांबर धारी महिलाएं व कन्याएं मंगल कलश सिर पर धारण कर प्रभु का गुणगान करते हुए चल रही थी। शोभा यात्रा का शुभारंभ कथा स्थल से प्रारंभ होकर शीतला मंदिर व विभिन्न मार्गो से होते हुए कथा स्थल पर आकर संपन्न हुई। 
   कथावाचक पंडित जय श्रवण सिमगा वाले ने श्रीमद् भागवत महापुराण की विधिवत पूजन कर मंत्रोच्चारण के साथ शोभायात्रा में शामिल होकर मंगल कलश यात्रा में सम्मिलित हुए। रविवार को बैंड बाजा के साथ निकाली गई कलश यात्रा में भक्तजन भजन कीर्तन नाचते गाते चल रहे थे। इस मंगल कलश यात्रा में चौक-चौक में फूलों की भी वर्षा हुई। सभी ने कलश को कथा स्थल के मंच पर रख कर विधिवत पूजन पाठ कर अपने इष्ट देवता की आराधना में समर्पित रह कर प्रसाद को ग्रहण किया। 
9 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन कथावाचक पंडित जय श्रवण सिमगा वाले के सानिध्य में विधि विधान के साथ विधिवत पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत के अनुसरण से भक्तों का कल्याण होता है और जीवन में सुख व शांति का अनुभव होता है। श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने का अवसर बड़े ही सौभाग्य से प्राप्त होता है। जिस स्थान पर इस कथा का आयोजन होता है वह तीर्थस्थल कहलाता है। प्रतिदिन दोपहर 2 से 6 बजे तक कथा का समय है। 

कथा में आगे - श्रीमद् भागवत कथा में आगे 17 फरवरी को ध्रुव चरित्र, 18 फरवरी को प्रहलाद चरित्र की कथा होगा। 19 फरवरी को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 20 फरवरी को बाललीला, रास महोत्सव, 21 फरवरी को श्रीकृष्ण-रूखमणी विवाह होगी। वहीं 22 फरवरी को भागवत कथा निवेदन चढोत्री, 23 फरवरी को गीता सहसधारा, तुलसी वर्षा व हवन पूर्णाहुति होगी।  

आयोजन में सहभागिता - आयोजन को सफल बनाने में अनिल शर्मा, संजय शर्मा, माहेश्वरी शर्मा, डॉ रमाकांत शर्मा, दीपनारायण, ईश्वर, सतीश, अरविंद, प्रभात, अखिलेश, अवधेश, अंशुमान सहित गांव के पदाधिकारी जुटे हुए हैं। 
झांकी हैं मुख्य आकर्षण का केंद्र 
श्रीमद्भागवत कथा में झांकी मुख्य आकर्षण का केंद्र है, क्योंकि यह भगवान कृष्ण की लीलास्थली है और कथा के दौरान राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती व अन्य देवी-देवताओं की सजीव और मनमोहक झांकियां सजाई जाएगी, जो भक्तों को भक्ति रस में डुबो देती हैं और वातावरण को दिव्य बना देती हैं। अपनी कथा में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं, रासलीला, सुदामा-कृष्ण मिलन आदि के प्रसंगों को झांकियों के माध्यम से जीवंत कर देते हैं। 

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