श्रीमद्भागवत कथा : बलौदी में कथावाचक ने सुनाईं श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 20 फरवरी 2026 - बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक के ग्राम बलौदी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठवें दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। सिमगा से आए कथावाचक पंडित जय श्रवण महराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथावाचक पंडित जय श्रवण ने श्रीकृष्ण की बाल लीला, पूतना उद्धार और गोवर्धन लीला के प्रसंग सुनाए। उन्होंने बताया कि भगवान की लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, सत्य और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। पूतना उद्धार प्रसंग यह संदेश देता है कि प्रभु की शरण में आने वाले का उद्धार निश्चित है, चाहे वह किसी भी भाव से आया हो।
कथा में गोवर्धन लीला के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और अहंकार त्याग का संदेश दिया गया। कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु "राधे-राधे" और "जय श्रीकृष्ण" के जयघोष के साथ कथा सुनते रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिनमें कई श्रद्धालु पूरे समय ध्यानमग्न होकर कथा का आनंद लेते दिखे।
बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए करें प्रेरित
कथावाचक पंडित जय श्रवण महराज ने कहा कि सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है, इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिवजी को गोपी का रूप धारण करना पड़ा। आज हमारे यहां भागवत रूपी रास चलता है, परंतु मनुष्य दर्शन करने को नहीं आते। वास्तव में भगवान की कथा के दर्शन हर किसी को प्राप्त नहीं होते। कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त हो जाता है।इस कथा को सुनने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं और दुर्लभ मानव प्राणी को ही इस कथा का श्रवण लाभ प्राप्त होता है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी मात्र का कल्याण संभव है।