शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

साजा में लावारिस मुड़ी बाई का नपं अध्यक्ष हिमांशु वर्मा ने ससम्मान

अंतिम संस्कार में भाजपा पार्षद सहित जनप्रतनिधि और नगरवासी बड़ी संख्या में हुए शामिल 

मां के बाद अब बेटी के भविष्य पर सवाल 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 19 फरवरी 2026 - कहते हैं कि दुनिया में खून के रिश्तों से बड़ा होता हैं मानवता का रिश्ता। इस कहावत को साजा नगर ने सच कर दिखाया है। वर्षों से नगर की गलियों में अपनी बेटी के साथ भटकने वाली एक विक्षिप्त महिला, जिसे लोग प्यार से मुड़ी बाई कहते थे, बुधवार को दुनिया से विदा हो गई। लेकिन उसकी विदाई लावारिसों की तरह नहीं, बल्कि एक भरे-पूरे परिवार के सदस्य की तरह हुई। 

अस्पताल प्रबंधन ने पेश की सेवा की मिसाल 
लगभग एक माह पूर्व महिला मुड़ी बाई लकवा का शिकार हो गई थी। कोई अपना न होने के बावजूद साजा अस्पताल के स्वास्थ्य विभाग ने उसे भर्ती किया। अक्सर आलोचनाओं के घेरे में रहने वाले सरकारी अस्पताल के स्टाफ ने यहां ममता और सेवा की अनूठी मिसाल पेश की। स्टाफ ने न केवल महिला मुड़ी बाई का पूरा इलाज किया, बल्कि उसके साथ रहने वाली उसकी विक्षिप्त बेटी को भी अस्पताल में पनाह दी। बुधवार सुबह इलाज के दौरान महिला मुड़ी बाई ने अंतिम सांस ली। 

खून के रिश्ते रहे मौन, साजा नगर बना परिवार 
जांच में पता चला कि मृतिका पास के ही ग्राम लालपुर के यादव परिवार से ताल्लुक रखती थी। अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने उसके परिजनों को सूचना भी दी, लेकिन अफसोस कि जिंदा रहते उसकी सुध न लेने वाले परिजन मौत के बाद लाश लेने तक नहीं पहुंचे। जब रिश्तों ने मुंह मोड़ लिया, तब साजा नगर के युवा अध्यक्ष हिमांशु वर्मा और अन्य जनप्रतिनिधि आगे आए। 

नगर पंचायत अध्यक्ष ने निभाया बेटे का धर्म 
नगर पंचायत साजा अध्यक्ष हिंमाशू वर्मा ने सूचना मिलते ही अपनी पूरी टीम के साथ जिम्मेदारी संभाली। पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मुड़ी बाई की अंतिम यात्रा निकाली गई। मुक्तिधाम में भाजपा पार्षदों और शहर के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया। शमशान घाट पर मौजूद हर शख्स की आंखें इस भावुक पल को देखकर नम थी। 

अब बेटी के भविष्य पर सवाल 
महिला मुड़ी बाई तो चली गई, लेकिन पीछे अपनी उस बेटी को छोड़ गई, जो हर पल उसके साथ साये की तरह रहती थी। मां के अंतिम संस्कार के बाद सबसे बड़ा सवाल उस मासूम बच्ची के भविष्य का है। फिलहाल प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने उसे सुरक्षित अस्पताल में ही रुकवाया है। शहर के लोग अब उसकी सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर चिंतित हैं। 

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