पुराने समय से पक्षकारों के मन में चली आ रही वैमनस्यता को दूर करने के लिए एक प्रभावी माध्यम है लोक अदालत - प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष श्रीमती सरोज नंद दास

जिला न्यायालय बेमेतरा के तृतीय नेशनल लोक अदालत में 14626 प्रकरणों का सफल निराकरण 

28219127 रु का अवार्ड पारित कर 30210140 रु की समझौता राशि की वसूली 

कुटुम्ब न्यायालय में 19 प्रकरणों का निपटारा, 6 दंपतियों में सुलह कराकर किया गया एक 
बेमेतरा 12 सितंबर 2026 - जिला न्यायालय बेमेतरा में शनिवार को वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का शुभारंभ श्रीमती सरोज नंद दास प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बेमेतरा द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण एवं पक्षकारगण को अधिक से अधिक प्रकरणों का आपसी सहमति एवं सुलह-समझौते के माध्यम से निराकरण करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए शुभकामनाएं दीं। 

पुराने समय से पक्षकारों के मन में चली आ रही वैमनस्यता को दूर करने के लिए एक प्रभावी माध्यम है लोक अदालत 
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती सरोज नंद दास ने लोक अदालत की विशेषता बताते हुए कहा कि पुराने समय से पक्षकारों के मन में चली आ रही वैमनस्यता को दूर करने के लिए लोक अदालत एक प्रभावी माध्यम है। लोक अदालत के माध्यम से पक्षकार आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर समय और धन की बचत कर सकते हैं। यह राष्ट्र के प्रति सेवा का कार्य है, जिसमें सभी को बढ़-चढ़कर सहभागिता करनी चाहिए। न्यायालय में लंबित मामलों का अधिक से अधिक निराकरण कर सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण करना और राष्ट्र के विकास में सहयोग देना हम सभी की जिम्मेदारी है। 

विधिक सहायता/स्वास्थ्य डेस्क, चिकित्सकीय वैन सहित विभागों के स्टाल 
नेशनल लोक अदालत में जिले के कोने-कोने से बड़ी संख्या में पक्षकार अपने प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला न्यायालय परिसर पहुंचे। पक्षकारों की सुविधा के लिए विधिक सहायता डेस्क, स्वचलित चिकित्सकीय वैन, स्वास्थ्य डेस्क सहित बैंक, विद्युत विभाग, नगर पालिका एवं बीएसएनएल विभाग द्वारा प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के निराकरण के लिए स्टॉल लगाए गए। संबंधित विभागों द्वारा नेशनल लोक अदालत के अवसर पर संचालित योजनाओं की जानकारी पक्षकारों को दी गई तथा समझौते के माध्यम से प्री-लिटिगेशन एवं न्यायालय में लंबित प्रकरणों का निराकरण कराने के लिए प्रेरित किया गया। इसके परिणामस्वरूप बैंक के 23 प्रकरण तथा विद्युत विभाग के 51 प्रकरणों का निराकरण हुआ। 

जिला न्यायालय में 9 तथा तहसील साजा न्यायालय में 1, जिले में कुल 10 न्यायालयीन खण्डपीठों का गठन 
नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए जिला न्यायालय में 9 खण्डपीठ तथा तहसील साजा न्यायालय में 1 खण्डपीठ, इस प्रकार जिले में कुल 10 न्यायालयीन खण्डपीठों का गठन किया गया था। प्रत्येक खण्डपीठ में दो-दो सुलहकर्ता सदस्यों की नियुक्ति की गई। लोक अदालत के सफल आयोजन में समस्त न्यायालयीन कर्मचारी, पैरालीगल वालेंटियर्स, जिला प्रशासन, जिला एवं जनपद पंचायत, नगर पालिका, विद्युत विभाग, जिले की समस्त बैंकों सहित अन्य विभागों का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। 

3 करोड़ 2 लाख 10 हजार 140 रुपये की समझौता राशि वसूली 
जिले में नेशनल लोक अदालत के दौरान कुल 14246 प्री-लिटिगेशन एवं लंबित प्रकरणों को निराकरण के लिए रखा गया था। इनमें राजस्व प्रकरण, विद्युत विवाद, बैंक प्रकरण एवं बीएसएनएल प्रकरणों का निराकरण करते हुए कुल 1991283 रुपये की वसूली की गई। वहीं न्यायालय में लंबित 41 आपराधिक प्रकरण, 12 सिविल प्रकरण, 19 पारिवारिक प्रकरण, एनआई एक्ट की धारा 138 से संबंधित 06 प्रकरण, 12 मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण एवं 2788 अन्य प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन प्रकरणों में कुल 28219127 रुपये का अवार्ड पारित किया गया। जिले में रिकॉर्ड अनुसार कुल 30210140 रुपये की समझौता राशि वसूली गई। 
न्याय वृक्ष एवं द्वार तोरण से विधिक जागरूकता का प्रसार 
नेशनल लोक अदालत में नालसा एवं सालसा की योजनाओं एवं अभियानों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बेमेतरा द्वारा न्याय वृक्ष एवं द्वार तोरण तैयार किए गए। प्रदर्शनी के माध्यम से लोक अदालत में पहुंचे पक्षकारों को नालसा एवं सालसा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही ‘न्याय सबके लिए’ का संदेश देते हुए बाल विवाह एवं बलात्कार पीड़िता के गर्भ का चिकित्सीय समापन, मोटर यान अधिनियम, हिट एंड रन, साइबर क्राइम, निःशुल्क विधिक सहायता एवं सलाह सहित अन्य कानूनी विषयों से संबंधित पाम्पलेट वितरित किए गए। 
     पक्षकारों को आपसी रंजिश, नफरत एवं वैमनस्यता दूर कर समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त करने, बाल विवाह रोकने में सहयोग करने तथा सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया। न्यायालय परिसर में प्रेरणादायक सुविचारों को छोटी-छोटी तख्तियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिससे पक्षकारों को सकारात्मक संदेश दिया गया। 

लघु फिल्मों से महिला अपराध एवं साइबर क्राइम के प्रति जागरूकता 
जिला न्यायालय परिसर में आमजन एवं पक्षकारों को विधिक रूप से जागरूक करने के उद्देश्य से प्रोजेक्टर के माध्यम से घरेलू हिंसा, लैंगिक अपराध, महिलाओं से छेड़छाड़, साइबर क्राइम, मोटर दुर्घटना सहित विभिन्न विधिक विषयों पर लघु फिल्मों का प्रसारण किया गया। इस दौरान पक्षकारों के लिए बैठक एवं पेयजल की व्यवस्था भी की गई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न गतिविधियों की झलकियां भी दिखाई गईं। 

पक्षकारों को प्रोत्साहन स्वरूप वितरित किए गए पौधे 
नेशनल लोक अदालत में पहुंचे पक्षकारों के लिए निःशुल्क पौधा वितरण डेस्क लगाया गया, जहां फूलदार, फलदार एवं छायादार पौधों का वितरण किया गया। लोक अदालत में समझौता करने वाले पक्षकारों को न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा पौधे भेंट कर प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा पक्षकारों के लिए सेल्फी जोन भी बनाया गया, जहां उन्होंने लोक अदालत की स्मृतियां संजोईं। 

व्यवहार वाद का समझौते से निराकरण 
खण्डपीठ क्रमांक 01 में न्यायालय श्रीमती सरोज नंद दास प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बेमेतरा के न्यायालय में वादी विरुद्ध प्रतिवादी के प्रकरण में वादी द्वारा प्रतिवादी के विरुद्ध संविदा के विशिष्ट अनुपालन का वाद प्रस्तुत किया गया था। पीठासीन अधिकारी एवं सदस्यगण द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश दिए जाने के बाद वादी एवं प्रतिवादी राजीनामा की शर्तों के अधीन समझौते के लिए तैयार हो गए। इस समाधान से दोनों पक्षों के समय एवं धन की बचत हुई। दोनों पक्षों ने लोक अदालत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे त्वरित एवं सुलभ न्याय का उत्कृष्ट माध्यम बताया। 
       इसी प्रकार खण्डपीठ क्रमांक 08 में न्यायालय कु. सार्विका चतुर्वेदी द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी बेमेतरा के न्यायालय में वादी विरुद्ध प्रतिवादीगण के प्रकरण में स्वामित्व की घोषणा एवं स्थायी निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत किया गया था। पीठासीन अधिकारी एवं सदस्यगण द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद दोनों पक्ष राजीनामा की शर्तों पर सहमत हुए और प्रकरण का निराकरण किया गया। इससे दोनों पक्षों के समय एवं धन की बचत हुई तथा उन्होंने लोक अदालत के प्रति आभार व्यक्त किया। 

धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के प्रकरण में 1.20 लाख में समझौता 
नेशनल लोक अदालत की खण्डपीठ क्रमांक 03 में न्यायालय देवेन्द्र कुमार प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश बेमेतरा के न्यायालय में धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के अपील प्रकरण में अपीलार्थी/अभियुक्त विरुद्ध उत्तरवादी/परिवादी का मामला रखा गया। अपीलार्थी/अभियुक्त को विचारण न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किया गया था। लोक अदालत में दोनों पक्षों को आपसी संबंध मधुर बनाए रखने तथा आपसी सहमति एवं राजीनामा के माध्यम से प्रकरण समाप्त करने के लिए समझाइश दी गई। इसके बाद प्रकरण को मीडिएशन के लिए भेजा गया, जो सफल रहा। 
    मीडिएशन के पश्चात अपीलार्थी/अभियुक्त द्वारा उत्तरवादी/परिवादी को 120000 रुपये की राशि छह किश्तों में देने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों की आपसी सहमति एवं राजीनामा के आधार पर प्रकरण का निराकरण किया गया। इसके अलावा नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों में भी आज्ञाप्तिधारियों ने राजीनामा कर अपने प्रकरण समाप्त कराए। एमजेसी एवं विभिन्न निष्पादन प्रकरणों का भी पक्षकारों की सहमति के आधार पर निराकरण किया गया। 

आपराधिक प्रकरण में राजीनामा से निराकरण 
खण्डपीठ क्रमांक 06 में न्यायालय कु. आरती ठाकुर तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी बेमेतरा के न्यायालय में आपराधिक प्रकरण में प्रार्थी एवं अभियुक्तगण को पीठासीन अधिकारी एवं सदस्यगण द्वारा समझाइश दी गई। समझाइश के बाद दोनों पक्ष राजीनामा के लिए तैयार हो गए और प्रकरण का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इस समाधान से दोनों पक्षों के समय एवं धन की बचत हुई। पक्षकारों ने लोक अदालत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे त्वरित एवं सुलभ न्याय का प्रभावी माध्यम बताया। 

परिवार न्यायालय में न्यायाधीश की समझाइश से 6 परिवार फिर हुए एक 
12 सितंबर 2026 को आयोजित नेशनल लोक अदालत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में बेमेतरा कुटुम्ब न्यायालय में कुल 19 प्रकरणों का निपटारा किया गया। इनमें न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय मधुसूदन चन्द्राकर द्वारा विशेष प्रयास करते हुए 6 दंपत्तियों के बीच सुलह-समझौता कराया गया और उन्हें एक साथ घर भेजा गया। 

बच्चे की संरक्षकता मामला में कराया गया सुलह 
एक प्रकरण में उभयपक्ष का विवाह लगभग 13 वर्ष पूर्व हुआ था तथा दाम्पत्य जीवन से तीन संतानें थीं। करीब 10 वर्ष साथ रहने के बाद पारिवारिक विवाद एवं तनाव के कारण पति-पत्नी अलग-अलग रहने लगे थे और बच्चे पिता के साथ निवास कर रहे थे। पत्नी ने अपने पति के विरुद्ध बच्चे की संरक्षकता का मामला प्रस्तुत किया था। न्यायालय द्वारा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों की कई बार काउंसलिंग कराई गई तथा पति-पत्नी के बीच सुलह-समझौते का अथक प्रयास किया गया। अंततः दोनों को साथ रहने के लिए राजी कर उन्हें साथ भेजा गया। 

भरण-पोषण का मामला समाधान 
एक अन्य प्रकरण में विवाह के पूर्व से प्रेम संबंध होने के कारण दोनों पक्षों ने जैतखाम में विवाह किया था और उनके दाम्पत्य जीवन से एक पुत्री भी हुई। विवाह के बाद आपसी मतभेद के कारण दोनों अलग-अलग रहने लगे। पत्नी ने पति के विरुद्ध भरण-पोषण का मामला प्रस्तुत किया, जबकि पति ने पत्नी को साथ ले जाने की इच्छा व्यक्त करते हुए मामला पेश किया। न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों की तीन-चार बार काउंसलिंग कराई गई, जिसके बाद उनके बीच समझौता हुआ और दोनों को साथ भेजा गया। 

तलाक मामला काउंसलिंग कर विवाद समाप्त 
एक अन्य मामले में उभयपक्ष का विवाह लगभग 7 वर्ष पूर्व हुआ था। विचारों में टकराव के कारण पारिवारिक एवं सामाजिक स्तर पर समझाइश के बावजूद दोनों का साथ रहना संभव नहीं हो पाया और उन्होंने न्यायालय में तलाक का मामला प्रस्तुत किया। उक्त प्रकरण में भी दोनों पक्षों की कई बार काउंसलिंग कराकर उनके बीच उत्पन्न विवाद को समाप्त कराया गया। 

ससुर बहु को समझाइश 
इसी प्रकार एक प्रकरण में पति की मृत्यु के बाद महिला ने अपने ससुर के विरुद्ध भरण-पोषण का मामला प्रस्तुत किया था। न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश देकर आपसी समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त कराया गया। 

एक वर्ष से अलग रह रहे दंपत्ति हुए एक 
एक अन्य प्रकरण में व्यवसायी पति द्वारा अपनी प्रधानपाठिका पत्नी को साथ ले जाने का मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। दोनों का विवाह वर्ष 2005 में हुआ था और गंभीर पारिवारिक विवाद के कारण वे पिछले एक वर्ष से अलग-अलग रह रहे थे। न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों के बीच काउंसलिंग का अथक प्रयास किया गया, जिसके परिणामस्वरूप विवाद का समाधान हुआ और दोनों को साथ भेजा गया। 

दंपत्तियों को माला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर विदा 
इन प्रकरणों के अलावा अन्य मामलों में भी दंपत्तियों के बीच सुलह-समझौता कराकर उन्हें एक साथ घर भेजा गया। सभी दंपत्तियों को आपसी सम्मान, संवाद एवं धैर्य बनाए रखने तथा अहंकार की भावना का त्याग कर विवादों को अपने स्तर पर सुलझाने की समझाइश दी गई। साथ ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति उन्हें जागरूक किया गया। समझौता करने वाले दंपत्तियों को माला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्तागण द्वारा शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद दिया गया। भावुक एवं सुखद माहौल में दंपत्तियों को न्यायालय से विदा किया गया, जिसके साक्षी अधिवक्तागण एवं न्यायालयीन स्टाफ बने। 

सुलह, समझौते से विवादों का निराकरण 
इस प्रकार वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत ने आपसी सहमति, सुलह एवं समझौते के माध्यम से विवादों के निराकरण का प्रभावी संदेश देते हुए पक्षकारों को सस्ता, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

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