जिला पंचायत सदस्य और जनपद अध्यक्ष कि आरक्षण प्रक्रिया संपन्न
जिला पंचायत सदस्य और जनपद अध्यक्ष की आरक्षण प्रक्रिया संपन्न
त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन 2024-25
प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और नागरिकों के सामने सम्पन्न हुई आरक्षण प्रक्रिया
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा - त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन 2024-25 हेतु छग शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के परिपालन में आज गुरुवार 09 जनवरी को जिला पंचायत सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रणबीर शर्मा की उपस्थिति में जिला पंचायत के सदस्य पदों के प्रवर्गवार एवं महिलाओं के प्रवर्गवार स्थानों के आबंटन/आरक्षण तथा जनपद पंचायत के अध्यक्ष पदों के प्रवर्गवार एवं महिलाओं के प्रवर्गवार स्थानों के आबंटन/आरक्षण कि कार्यवाई कि गई। इस दौरान उप जिला निर्वाचन अधिकारी अंकिता गर्ग, जिला पंचायत सीईओ टेकचंद अग्रवाल, एडीएम प्रकाश भारद्वाज, अपर कलेक्टर अनिल वाजपेयी, सभी जिला एवं जनपद पंचायत के आरक्षण जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, पत्रकार, अधिकारी कर्मचारी की उपस्थिति में संपन्न की गई।
जिला पंचायत सदस्य के आरक्षण की जानकारी - जिला पंचायत बेमेतरा अंतर्गत निर्वाचन क्षेत्र कठौतिया में अनारक्षित महिला, बालसमुंद में अनारक्षित मुक्त, चंदनु में अनुसूचित जनजाति महिला, बसनी में अनुसूचित जाति महिला, मल्दा में अनारक्षित मुक्त, संबलपुर में अनुसूचित जाति मुक्त, प्रतापपुर में अनुसूचित जाति महिला, उमरावनगर में अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, खैरझिटीकला में अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, मोहतरा में अनारक्षित मुक्त, सुरुजपुरा में अनारक्षित मुक्त, भाठासोरही में अनारक्षित महिला, सुरहोली में अन्य पिछड़ा वर्ग मुक्त, बेरलाकला में अनारक्षित मुक्त कि कार्यवाई कि गई।
जनपद पंचायत अध्यक्ष के आरक्षण की जानकारी - जनपद पंचायत बेमेतरा में अनुसूचित जाति महिला, जनपद पंचायत नवागढ़ में सामान्य मुक्त, जनपद पंचायत साजा में सामान्य मुक्त, जनपद पंचायत बेरला में अन्य पिछड़ा वर्ग महिला की कार्यवाई की गई हैं।
कलेक्टर ने कहा - कलेक्टर रणबीर शर्मा ने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी और जनहित में सुनिश्चित की गई हैं, इससे नागरिकों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा और सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त होंगे। इस आयोजन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखी गई। उन्होंने कहा कि आरक्षण की यह प्रक्रिया कानून और संविधान के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई हैं, ताकि समतामूलक और न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकें।