झीरम का फैसला है आधा अधूरा न्याय - पूर्व विधायक व जिलाध्यक्ष बेमेतरा आशीष छाबड़ा

फैसले पर कांग्रेस पार्टी विधि विशेषज्ञों की राय लेकर लेगी आगे निर्णय 
बेमेतरा 06 सितंबर 2026 - जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने कहा कि झीरम घाटी नरसंहार को लेकर जो एनआईए अदालत का फैसला आया है, वह आधा अधूरा न्याय है। कांग्रेस न्यायालय का सम्मान करती है, किंतु इसमें एक बात यह भी देखने लायक है कि न्यायालय ने उन्हीं तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर यह फैसला दिया है जो एनआईए ने अदालत में रखे थे। एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाविहीन रही, वह राजनीतिक षड्यंत्र को उजागर नहीं कर पाई। जिन 10 लोगों को एनआईए ने गिरफ्तार किया था, उन्हें दोषी पाया गया और यह नक्सली अपने काडर के छोटे नक्सली थे, जो इतनी बड़ी घटना को बिना किसी बड़े नक्सली नेताओं के अंजाम नहीं दे सकते थे। एनआईए ने बड़े नक्सली नेताओं का नाम शुरू के एफआईआर में शामिल किया था, किंतु बाद में उसे हटा दिया। 

फैसले से पैदा होते सवाल 
इस फैसले से यहां एक और यह सवाल पैदा होता है कि क्या 
# इस फैसले से इस घटना में रची गई साजिश का पर्दाफाश हुआ?  
# कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा हटाने के निर्देश किसने दिए थे?  
# यात्रा के मार्ग को किसने बदलवाया था ? 
# हमले की योजना किसने बनाई थी? 
# जब जब बड़े नक्सली नेताओं ने सरेंडर किया, तब सरकार ने दावा किया कि यह झीरम हमले में शामिल थे, तो एनआईए ने उनसे पूछताछ क्यों नहीं किया? 
# घटना के प्रत्यक्षदर्शी जो इस नक्सली घटना में घायल थे, उनसे एनआईए ने पूछताछ क्यों नहीं की? 
# झीरम हमले के दौरान घायल और जीवित बचे पीड़ितों का बयान क्यों नहीं लिया गया? 
# एनआईए ने कांग्रेस सरकार के द्वारा गठित एसआईटी को जांच से क्यों रोका? 

भाजपा सरकार द्वारा नाकामी छुपाने और भूमिका छुपाने का प्रयास 
यह ऐसे सवाल है जिनके उत्तर अंत तक नहीं मिल पाए और बिना इन प्रश्नों के उत्तर के यह जांच और न्याय अधूरा है। वास्तविकता यह है कि भाजपा सरकार अपनी नाकामी छुपाने और तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका सामने ना आ पाए इसे ध्यान में रखकर झीरम नरसंहार में शामिल सरेंडर करने वाले नक्सली जो बड़े इनामी नक्सली थे, उन्हें सरेंडर तो कराया किंतु उनसे कभी एनआईए ने पूछताछ नहीं की। आज भी झीरम नरसंहार में मारे गए कांग्रेस नेताओं की आत्मा न्याय के लिए इंतजार कर रही है। इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी विधि विशेषज्ञों की राय लेकर आगे निर्णय लेगी। 

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