पति के दीर्घायु के लिए तीज पर मटिया बारगांव की सुहागिनों ने रखा उपवास

रामेश्वर व सोमनाथ मंदिर में पूजा अर्चना में सुहागिनों की रहीं भीड़ 

पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी पकवानों से तोड़ा अपना व्रत 
बेमेतरा 15 सितंबर 2026 - हरितालिका तीज पर्व पर जिलें के बेरला ब्लाक के ग्राम मटिया बारगांव में सोमवार को सुहागिनों ने उपवास रखकर अपने पति के दीर्घायु की कामना की। त्यौहार मनाने ससुराल से मायके पहुंची सुहागिनों में विशेष उत्साह देखा गया। 

रामेश्वर व सोमनाथ मंदिर में हुई पूजा अर्चना 
बारगांव स्थित रामेश्वर मंदिर में सोमवार की सुबह महिलाओं ने सफल दांपत्य के लिए शिव-पार्वती की पूजा अर्चना कर तीज व्रत कथा का श्रवण किया। वहीं गांव की अधिकांश महिलाएं सोमनाथ मंदिर जाकर शिवजी की पूजा अर्चना कर पति के दीर्घायु की कामना की। 

छत्तीसगढ़ में तीज पर्व का हैं विशेष महत्व 
तीज पर्व का छत्तीसगढ़ में विशेष महत्व होता है। इस पर्व को धूमधाम से मनाने के लिए महिलाएं अपने मायके में ही रहकर उपवास रखा। व्रतियों ने नई साड़ी व विविध आभूषणों से सजने के साथ-साथ हाथों में विविध आकृति के मेहंदी लगवाते नजर आए। साथ ही विविध प्रकार के व्यंजन पकवान भी बनाए गए। शाम होते-होते सुहागिनों ने गणेश व शिव-पार्वती की पूजा आराधना के साथ-साथ अपने पति की आरती उतारकर उनसे आशीर्वाद लिया। 
पति के दीर्घायु व सुखद दाम्पत्य की कामना 
तीज पर्व मनाने कवर्धा से बारगांव अपने मायके पहुँची सुनयना वर्मा का मानना है कि इस त्यौहार में उपवास का विशेष महत्व होता है। उपवास के माध्यम से एक ओर जहां ईश्वर से सुहाग के दीर्घायु होने की कामना की गई, वहीं सुखद दाम्पत्य जीवन के लिए भगवान से विनती की गई। उपवास व पूजा अर्चना के बाद महिलाओं ने फ़लाहार व छत्तीसगढ़ी पकवानों से अपना व्रत तोड़ा। देर रात तक महिलाओं द्वारा जागरण कर भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया।

बचपन की सहेलियों से मिलने का उल्लास 
तीज पर्व में मायके पहुंची रोशनी यादव ने कहा कि अपने बचपन की सहेलियों से मिलने का उल्लास रहा। पूजा-अर्चना के बाद एक दूसरे से सुख-दुख की बाते की जाती रही। खासकर शादी के बाद पहली बार मायके पहुंची बेटिया में पर्व को लेकर अधिक उत्साह रहा। पर्व में सुहागिनों के अलावा कुंवारियों ने भी सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए उपवास रखकर व्रत किया। 

छत्तीसगढ़ी पकवानों ठेठरी, खुर्मी का चखा स्वाद 
पर्व में विशेषकर ठेठरी, खुर्मी, कुसली, चौसेला, गुजहा, सोहारी, अइरसा रोटी बनाई गई। बेटियां जब अपने मायके से वापस ससुराल जाएंगी तब विभिन्न शगुन के साथ तीजा रोटी ठेठरी खुर्मी देकर विदा किया जाता है। 

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