खम्हरिया डी में 7 करोड़ का उच्च स्तरीय पुलमय पहुंच मार्ग निर्माण अपूर्ण, बनीं ग्रामीणों की मुसीबत

अनदेखी : 10 माह का काम 15 माह में भी अधूरा 

मामला - साजा के तेंदुआ नयापारा मार्ग पर खम्हरिया डी में डोटू नाला पर उच्च स्तरीय पुलमय पहुंच मार्ग का निर्माण 

लापरवाही - बोर्ड में निर्माण संबंधी जानकारी गलत 
 
विडंबना - जिलें में नहीं हैं pwd सेतु विभाग का कार्यालय व अधिकारी 
बेमेतरा 05 सितंबर 2026 - बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा अंतर्गत पीडब्ल्यूडी सेतु विभाग का एक और समय सीमा का मामला सामने आया है। जहां डोटू नाला पर उच्च स्तरीय पुल और पहुँच मार्ग का निर्माण किया जा रहा हैं। 10 माह में मई माह को पूर्ण हो जाना था, लेकिन अब तक 14 माह बीतने को हैं। मगर पुल निर्माण कार्य अब तक अपूर्ण हैं। पुल के अपूर्ण निर्माण कार्य से राहगीरों व क्षेत्रवासियों को आवागमन में परेशानियों व दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। 

खम्हरिया डी के डोटू नाला पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण  
बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा अंतर्गत ग्राम खम्हरिया डी में तेंदुआ नयापारा मार्ग पर डोटू नाला पर बन रहा उच्च स्तरीय पुल और पहुँच मार्ग का निर्माण किया जा रहा हैं। जिसके निर्माण के लिए शासन द्वारा 702.40 लाख की स्वीकृति दिनांक 29.09.2023 को की गई थी। जिसके निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार को कार्यादेश 09/07/2025 को जारी कर 10 माह का समय सीमा निर्धारित किया गया था। मगर अब 14 महीने बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है, जबकि इसे पूर्ण करने की समय सीमा केवल 10 माह निर्धारित की गई थी। 
योजना और वित्तीय स्थिति 
प्रशासनिक स्वीकृति : 702.40 लाख (दिनांक 29.09.2023) 
ठेके की राशि : 5,90,72,130 
कार्यादेश एवं अनुबंध समय : कार्यादेश 18/08/2025 को जारी किया गया था और अनुबंध के अनुसार कार्य पूरा करने की अवधि 10 माह तय की गई थी। 

सूचना बोर्ड में जानकारी गलत 
निर्माण स्थल पर लगे निर्माण संबंधी सूचना बोर्ड में गलत जानकारी अंकित किया गया हैं। जिसको आज तक सुधारा भी नहीं गया हैं। स्थल पर लगे सूचना बोर्ड में निर्माण कार्य की समय सीमा 12 माह (दस माह) अंकित किया गया हैं। वहीं एसडीओ का नाम नंबर (बीएल पटेल, जो कि पुराने हैं) का लिखा गया हैं, जबकि अभी कोई और (बीड़ी सेंडे) हैं। जिससे साफ तौर पर गुमराह किए जाने का प्रयास जा रहा हैं।
जिलें में कार्यालय व अधिकारी लापता 
जिले में सेतु निर्माण विभाग (PWD Bridge Division) का न तो कोई स्थाई कार्यालय है और न ही जिम्मेदार अधिकारी बेमेतरा में बैठते हैं। जानकारी के अनुसार विभाग का डिवीजन ऑफिस दुर्ग एवं सब डिविजन ऑफिस कवर्धा से संचालित होती हैं। विभागीय अनदेखी के कारण ठेकेदार द्वारा कार्य में घोर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे शासन की मंशा और जन-सुविधा के उद्देश्यों को झटका लग रहा है। 

परियोजना का तकनीकी विवरण 
पुल की लंबाई : 165 मीटर (11 नग स्पॉन @ 15 मीटर प्रत्येक) 
पहुँच मार्ग की लंबाई : तेंदुआ नयापारा की ओर 117 मीटर एवं सेमरिया की ओर 174 मीटर 
संरचना विवरण : 10 पियर, 11 स्लैब और 02 अबटमेन्ट 

समीक्षा व टीएल बैठक का क्या औचित्य 
जिला प्रशासन की समय सीमा और समीक्षा बैठकों के दावों की पोल खोलता एक और नया मामला सामने आया। पीडब्ल्यूडी सेतु विभाग के खम्हरिया डी में उच्च स्तरीय पुलमय पहुंच मार्ग अपने समय सीमा के बाद भी अब तक अपूर्ण हैं। ऐसे में प्रशासन की समीक्षा बैठक व टीएल बैठक का क्या ही औचित्य रह जाता हैं। 

कीचड़ व पानी में पड़े खराब हो रहें सामान 
इस पुल निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार द्वारा लाए गए सामान छड़ आदि ऐसे ही खुले, कीचड़ व पानी में पड़े हुए हैं जो खराब हो रहे हैं और इसी खराब समानों का उपयोग इस पुल निर्माण कार्य में किया जाएगा। जिससे निर्माण कार्य में गुणवत्ता नहीं रहेगी, जिसको देखने वाला भी कोई नहीं हैं। 
सुविधा बनीं समस्या व मुसीबत 
इस उच्च स्तरीय पुलमय पहुंच मार्ग को बारिश के पूर्व पूर्ण हो जाना था, मगर अब तक की स्थिति में अपूर्ण हैं। जिससे विभाग व ठेकेदार द्वारा सरकार की मंशा को पलीता लगाया जा रहा हैं। सुविधा के जिस उद्देश्य को लेकर सरकार द्वारा स्वीकृति दी गई वह जमीनी स्तर पर लोगों के लिए उल्टे समस्या व मुसीबत बन गई हैं। बरसात में राहगीरों व क्षेत्रवासियों को इस मुसीबत का सामना रोज करना पड़ रहा हैं।

परेशानी, आक्रोश, सवाल 
समय सीमा बीत जाने के बाद भी कार्य पूरा न होने से स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों में विभाग व ठेकेदार के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त हैं। वहीं जिले में सेतु विभाग के अधिकारियों की अनुपस्थिति से इस परियोजना की निगरानी व गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। 

     निर्माण कार्य में कई प्रकार के समस्या व स्थिति आते हैं, जिससे निर्माण कार्य लेट हो जाता हैं। सूचना बोर्ड को सुधरवा देंगे। 
----- एलके सिंहा, सब इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी सेतु विभाग 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ