अल्बर्ट आइंस्टीन के पुराने रिकॉर्ड को चुनौती देने वाले 'छत्तीसगढ़ युवा रत्न' और 'बाल श्रेष्ठ पुरस्कार' विजेता की अद्भुत लीडरशिप के दीवाने हुए दिल्ली के छात्र
बेमेतरा 20 सितंबर 2026 - देश के सबसे प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह सांध्य कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों ने बेमेतरा जिले को राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा गौरवमयी क्षण दिया है, जिससे पूरा छत्तीसगढ़ प्रदेश गदगद हो उठा है। बेमेतरा के प्रतिष्ठित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल के प्राचार्य पीएल जायसवाल के सुपुत्र देश के सबसे कम उम्र के प्रख्यात खगोल वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता डॉ. पीयूष जायसवाल ने छात्रसंघ चुनाव में संयुक्त सचिव (जॉइंट सेक्रेटरी) पद पर एकतरफा ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
स्वतंत्र प्रत्याशी ने मारी बाजी
आधिकारिक चुनाव परिणामों के अनुसार डॉ. पीयूष जायसवाल ने किसी भी बड़े राजनैतिक दल (जैसे एबीवीपी या एनएसयूआई) का दामन थामे बिना पूरी तरह स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 674 वोटों के विशाल अंतर से करारी शिकस्त दी।
चुनाव जीत रचा इतिहास
दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहली बार है, जब छत्तीसगढ़ के किसी छात्र ने बिना किसी पार्टी बैनर और बड़े राजनैतिक फंड के केवल अपनी असाधारण योग्यता, छात्र-हितैषी विजन और ओजस्वी भाषण शैली के बल पर इतनी बड़ी राष्ट्रीय जीत हासिल की हो।
सांस्कृतिक और कलात्मक क्षेत्र में मनवाया लोहा
दिल्ली पहुँचते ही डॉ. पीयूष जायसवाल की यह सफलता केवल राजनीति और विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक बहुआयामी असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेते ही उनके कड़े संघर्ष, अद्भुत कलात्मक गुणों और बहुमुखी प्रतिभा के कारण कॉलेज की अत्यंत प्रतिष्ठित सांस्कृतिक और कलात्मक समितियों (कल्चर सोसायटी) में उनका चयन हो गया था। उनके भीतर छिपे लेखक, कवि और एक शानदार वक्ता के असाधारण गुणों ने दिल्ली के प्रबुद्ध प्रोफेसरों और छात्रों को पहले ही दिन से प्रभावित कर लिया था, जिसने इस ऐतिहासिक चुनावी जीत की सबसे मजबूत नींव रखी।
पीएचडी उपाधि और 'बाल श्रेष्ठ पुरस्कार' विजेता वैज्ञानिक ने बढ़ाई जिले की शान
डॉ. पीयूष जायसवाल का ज्ञान और विज्ञान के शिखर पर आसीन होने का सफर अद्भुत रहा है।
कम उम्र में पीएचडी : पीयूष ने अपनी असाधारण बौद्धिक क्षमता के बल पर खगोल भौतिकी और विज्ञान के क्षेत्र में अपनी उच्च शैक्षणिक योग्यता पीएचडी पूर्ण कर ली है।
अंतरराष्ट्रीय बाल श्रेष्ठ पुरस्कार' से भी उन्हें नवाजा जा चुका है।
अल्बर्ट आइंस्टीन को चुनौती : मात्र 12-13 वर्ष की बचपन की उम्र में जब पीयूष छत्तीसगढ़ के डीएवी स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे, तभी उन्होंने ब्रह्मांड के रहस्यों पर अपनी विख्यात पुस्तक 'फूल फील ऑफ कॉसमॉस' और गति के नियमों पर अभूतपूर्व शोध पत्र 'वेलो सिटी मिस्ट्ररी' लिखकर पूरी दुनिया के दिग्गज वैज्ञानिकों को चौंका दिया था। उन्होंने भौतिकी के जटिल सूत्रों को हल कर महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के पुराने कीर्तिमानों तक को चुनौती दे डाली।
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स : सबसे कम उम्र में खगोल भौतिकी पर उत्कृष्ट शोध के लिए इनका नाम सुनहरे अक्षरों में वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। वे अब तक राष्ट्रीय और प्रांतीय मंचों से 75 से अधिक बड़े पुरस्कार अपने नाम कर चुके हैं।
छत्तीसगढ़ युवा रत्न व मुख्यमंत्री विशेष सम्मान से हो चुके हैं सुसज्जित
पीयूष की इसी असाधारण वैज्ञानिक प्रतिभा और देश भर में प्रदेश का मान बढ़ाने के लिए इसी वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी 2026) के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा उन्हें मंच पर 'छत्तीसगढ़ युवा रत्न' के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया और 250000 (ढाई लाख रुपये) की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके पूर्व उन्हें चेन्नई में राज्यपाल पुरस्कार और समाज की ओर से कलचुरी गौरव रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है।
अनुसंधान के बाद अब छात्र नेतृत्व
अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाने के बाद अब डॉ. पीयूष ने छात्र नेतृत्व के क्षेत्र में भी इतिहास रच दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान जब भी डॉ. पीयूष मंच से अपनी 'प्रेरक स्पीच' देते थे, तो दिल्ली के स्थानीय छात्रों से लेकर विभिन्न राज्यों के छात्र उनकी वैज्ञानिक सोच और बेबाक अंदाज के मुरीद हो जाते थे। अब पूरे कॉलेज छात्र संघ की कमान पीयूष और उनकी युवा व कर्मठ टीम के हाथों में है।
बहन साक्षी जायसवाल भी सम्मानित
पीयूष जायसवाल की छोटी बहन साक्षी जायसवाल भी कम नहीं हैं अब तक उन्होंने भी अनेक अवॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। साक्षी जायसवाल भी बॉल वैज्ञानिक हैं, जोकि पीएमओ व राज्यपाल से सम्मानित हो चुकी हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य और कलचुरी समाज में हर्ष
डीएवी बेमेतरा के प्राचार्य पीएल जायसवाल के सुपुत्र डॉ. पीयूष जायसवाल की इस धमाकेदार और ऐतिहासिक राष्ट्रीय जीत की खबर जैसे ही छत्तीसगढ़ पहुँची, पूरे छत्तीसगढ़ व बेमेतरा जिले सहित सर्ववर्गीय कलचुरी/जायसवाल समाज में जश्न और हर्ष का माहौल छा गया है। छत्तीसगढ़ से जन प्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों और शिक्षाविदों ने इसे राज्य व जिले की माटी का सबसे बड़ा गौरव बताया है। डॉ. पीयूष की यह अभूतपूर्व सफलता यह संदेश देती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और प्रतिभा सच्ची हो तो छोटे जगहों से निकले युवा भी देश की राजधानी में अपनी कला, विज्ञान और नेतृत्व का परचम लहरा सकते हैं।
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