प्रदेश संघ ने संस्कृत विषय को हटाने के लिए साजिश का लगाया आरोप
छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ ने चलाया संस्कृत विषय बचाओ अभियान
संस्कृत विषय को लागू करने के लिए संघ ने सरकार, मंत्री, विधायक, सचिव, कलेक्टर, डीईओ सभी स्तर पर कर चुके हैं मांग
बेमेतरा 26 जुलाई 2026 - संस्कृत विषय बचाओ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ ने छत्तीसगढ़ में संस्कृत विषय की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल के पाठ्यक्रम से कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं तक सचिवालय स्तर पर हटाने षडयंत्र चल रहा है। जिसे संघ ने भारतीय ज्ञान नीति की भावना के विपरीत बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
विधानसभा अध्यक्ष से निवास पर मुलाकात कर चर्चा
संघ के पदाधिकारी ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह से शंकर नगर आवास में मुलाकात कर बताया और सूचना का अधिकार पत्रों को दिखाते हुए चर्चा कर मांग की गई। डॉ रमन सिंह ने कहा संस्कृत संकल्प का भाषा है विकल्प का नहीं, इस भाषा के साथ कदापि अन्याय नहीं होगा।
शिक्षा मंत्री ने की हैं संवैधानिक घोषणा
शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक बिन्दु क्रमांक 13 में कक्षा 6 वीं से 10 वीं तक अनिवार्य करने स्पष्ट लिखित आदेश निर्देश है। छत्तीसगढ़ विधानसभा से 30 अप्रैल को संस्कृत भाषा अनिवार्य करने की संवैधानिक घोषणा की गई है। विविध पत्र क्रमांक दिनांक 23/03/2026, 10/04/2026 लोक शिक्षण संचालनालय के प्रशासनिक समिति बैठक का अभिमत को संबंधित विभाग से अनिवार्य आदेश तीन माह पश्चात् भी प्रसारित क्यों नहीं कर रहे हैं।
किया जा रहा साजिश
प्रदेश संघ अध्यक्ष दौलत राम साहू सहित अन्य सभी शिक्षकों ने बताया कि भारतीय संविधान में सर्वोच्च स्थान प्राप्त आठवीं अनुसूची की प्रथम भाषा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना और दो भारतीय भाषाओं के सम्मान में आज पर्यन्त संस्कृत भाषा को पाठ्यक्रम अनिवार्य करने आदेश जारी कर दिया जाना चाहिए था, परंतु नही हुआ है। संस्कृत/नवीन व्यवसायिक शिक्षा संचालन करने वाले उन सात आठ कंपनियों का शिक्षा विभाग के शासन प्रशासन पर दबाव है, जिससे इनके कद इतना कमजोर हो गया है।
सरकार व जन प्रतिनिधियों सहित सभी स्तर पर ज्ञापन द्वारा मांग
संघ के पदाधिकारी ने बताया कि अपने मांग को लेकर अब तक प्रधानमंत्री भारत सरकार, छत्तीसगढ़ महामहिम राज्यपाल, अध्यक्ष विधानसभा, सांसद लोकसभा रायपुर, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, शिक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधायक बेमेतरा, खल्लारी, कुरूद, कसडोल, भिलाई नगर, राजिम, बिलाईगढ़, सरायपाली, डोंगरगढ़, राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, अध्यक्ष कांग्रेस, मुख्य सचिव, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, अध्यक्ष सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मंडलम, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन, कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी बेमेतरा, दुर्ग, रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद, प्रांत संघ चालक आरएसएस, अध्यक्ष राज्य शिक्षा आयोग सहित अन्य सभी संबंधितों के पास मांग किया जा चुका हैं।
लिखित आदेश के बिना किया जा रहा लागू
सचिवालय स्तर पर बिना किसी लिखित आदेश के संस्कृत विषय के स्थान पर नवीन व्यावसायिक शिक्षा को अधिकारियों के केवल मौखिक निर्देश से ही लागू किया गया है।
संघ के पदाधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा विद्यालयों में केवल ट्रेड चालू करने कहा गया है ना कि किसी स्थापित विषय को नुकसान पहुंचाकर। संस्कृत बांग्ला हिंदी आठवीं अनुसूची की भाषा है, इस भाषा का अपमान और उल्लंघन संवैधानिक है तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है। यह भारतीय ज्ञान परंपरा संस्कृति सभ्यता और संस्कार पर एक राष्ट्रभाषा है, जिसे राष्ट्र के बौद्धिक आधार से जोड़ा गया है।
संस्कृत भाषा के लिए किया जा रहा साजिश
एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रही है और अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं और हमारे अपने ही भारत देश में प्रदेश में संस्कृत भाषा को पाठ्यक्रम से हटाने के लिए इस प्रकार महा षड्यंत्र चल रहा है, जो गंभीर चिंतन का विषय है। प्रदेश में संस्कृत भाषा के संवर्धन और संरक्षण के लिए सरकार संज्ञान लेवे।
संघ के पदाधिकारीगण रहें उपस्थित
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू, ज्ञानेंद्र कुमार मंडावी, सुनील कुमार महार, मनोज कुमार वर्मा, कामिनी पिल्लई, रेणुका लदेर, गंगा राम साहू, पुरन लाल साहू, डॉ नारायण साहू, सनत कुमार वर्मा, नोयन कुमार बुडेक, शिरिष श्रीवास्तव, दुर्गेश कुमार साहू, नरेश कुमार विश्वकर्मा, रामकुमार भट्ट, ईश्वरी यदु, शारदा साहू, अंजना श्रीवास, सुनीता मरकाम, सुकुराम नेताम, दिनेश कुमार मंडावी, हुसैन लाल पुजारी, दिनेश ध्रुव सहित रायपुर, बिलासपुर, बस्तर और दुर्ग शिक्षा संभाग के शिक्षक उपस्थित थे।
0 टिप्पणियाँ