मौत के कुएं में बदल रहें साजा क्षेत्र के गांव, माफियाओं के आगे तंत्र नतमस्तक

दर्जनों हैं हॉट स्पॉट ग्राम, आधे से अधिक में लगातार होता हैं खनन, खुदाई ऐसी कि देखने वालों का भी दिल दहल जाए 

तीन दशकों से अवैध खनन का दर्द झेल रहा साजा नगर 

नगर का ऐतिहासिक अर्जुन भाठा का अस्तित्व गायब, चढ़ा अवैध खनन व अतिक्रमण की भेंट 
बेमेतरा 10 अप्रैल 2026 - जिले के साजा अंचल में अवैध खनन जिस गति से चल रहा है वह वह आने वाले समय के बहुत खतरनाक दिशा की ओर जा रहा है। जिस गांव में भी अवैध खनन होता है उसका गांव कभी नहीं भर पाता। बीते माह नगर से लगे ग्राम डोंगीतराई में माफिया ने राजनीति संरक्षण में ऐसी खुदाई की देखने वाला भी दहल जाए। 
    यह स्थान सुंदर व भयावह दोनों का संगम है, इसका दर्शन जरूर कीजिए। यह डोंगीतराई का बांध है जिनकी नई रूपरेखा मुरम खनन माफियाओं ने नया रूप दिया। वैसे तो इस मामले को लेकर ग्रामीण हर दरवाजे तक पहुंचे लेकिन नतीजा सिफर रहा। इस भयावह दृष्य को स्वयं जिलाधीश को देखना चाहिए कि इस तरह पर्यावरण की हत्या करने वाले माफियाओं पर क्या कार्रवाई होगी, जो आज एक मौत का कुआं बन चुका है। 

बिरनपुर बना अवैध खनन का हब 
ऐसे ही साजा क्षेत्र का एक ग्राम हैं बिरनपुर, जो वर्तमान विधायक का गृहग्राम भी हैं। ग्राम बिरनपुर अवैध खनन का हब बन गया हैं। जहां पहले कांग्रेसियों ने और अब भगवाधारियों ने खनन का जिम्मा उठाया हैं। यहां की अवैध खुदाई की चर्चा पूरे प्रदेश में होती है। माफियाओं का आतंक इतना होता है कि वहां अधिकारी भी जाने से कतराते हैं। 

गाड़ाडीह में खनन पर कई बार विवाद पर कार्यवाही नहीं 
साजा क्षेत्र के ही ग्राम गाड़ाडीह में खनन को लेकर कई बार विवाद की स्थिति हुई, लेकिन कार्यवाही कभी नहीं हुई। अवैध खनन के चलते पूरे गांव का नक्शा बदल गया। माफिया धनवान बनते गए और गांव नरक बन गया। 

कुछ माह का कारोबार, भागीदारी में पूरी ईमानदारी 
साजा ब्लॉक में दर्जनों ग्राम मुरम के हाट स्पॉट हैं। जिनमें से आधा दर्जन से ज्यादा गांव में लगातार जमकर खुदाई चलती है। कुछ माह का रहता हैं यह कारोबार, जिसमें भागीदारी भी पूरी ईमानदारी से निभाई जाती हैं। दो माह के इस कार्य में कई करोड़ का अवैध कारोबार हो जाता है, अधिकारियों तक उनके हिस्से भी पहुंच जाते हैं। दर्द यदि होता है, तो उसे गांव को जिस गांव में खनन होता है। उसकी सूरत ऐसे बदलता है जो कभी सवर नहीं सकती। 
तीन दशकों से दर्द साजा झेल रहा 
आखिर इसी मुद्दे पर क्यों चर्चा होती है, तो कुछ अतीत की यादें ताजा कर दें। साजा शहर तीन दशक पूर्व अवैध खनन का शिकार हुआ था, जिसकी भरपाई आज तक नहीं हुई। मुख्य मार्ग पर कभी विशाल मैदान अर्जुन भाठा हुआ करता था, बड़े-बड़े खेल का आयोजन होता था, हेलीकॉप्टर भी उतरा, कई बार राष्ट्रीय नेताओ ने सभा ली, लेकिन आज यह जगह देखकर नहीं लगता कि दो दशक पहले इतनी सुंदर रही होगी। अवैध खनन ने ऐसा नक्शा बदला कि आज वह जगह इतनी भयावह हो चुकी है कि शहर की सुंदरता पर सबसे बड़ा ग्रहण है। चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण तो एक बार आता है लेकिन यह ग्रहण हमेशा के लिए गांव में घांव दे जाता है,  जिसका कोई इलाज नहीं होता। 
  दूसरा दौर अवैध कब्जे का होता है, जो उसके आसपास किया जाता है। दो दशक पहले विशाल मैदान आज सबसे ज्यादा दुषित स्थान बन चुका है। शहर में आज निर्माण कार्यों के लिए जगह भी नहीं बची है। चंद लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए गांव को ऐसा दर्द दिया जो कभी खत्म नहीं हो सकता। 

अधिकारीयों की खामोशी 
अवैध खनन पर जिन सरकारी नुमाइंदों को पर्यावरण निगरानी का जिम्मा दिया गया है, वह कार्रवाई करने की बजाय माफियाओं को बचाने में लग जाते हैं। अवैध खनन पर अधिकारीयों की यह खामोशी निःसंदेह किसी दूसरी ओर इशारा करती हैं। उनकी यह कार्यप्रणाली प्रशासन व प्रजा तंत्र सभी के लिए नुकसानदेह हैं। 

माइनिंग विभाग में जयचंद 
जिलें के माइनिंग विभाग की टीम जब कार्यवाही के लिए निकलती है, तो विभाग के जयचंद (मुखबीर) माफियाओं को पूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं, जिसके चलते अधिकारियों के पहुंचने तक मैदान साफ हो जाता है और रिपोर्ट आती है वहां कुछ नहीं मिला। यदि यही रवैया रहा तो आने वाला समय पर्यावरण के लिए बहुत ही घातक होगा। 

   साजा के अर्जुन भाठा का मामला आपके माध्यम से सज्ञान में लाया गया, इसके बारे में जानकारी ली जायेगी। ---- बसंत लोन्हारे, सीएमओ नगर पंचायत साजा 

       साजा में इतना विशाल व ऐतिहासिक मैदान था आपके माध्यम से जानकारी मिली, आज की स्थिति में कैसी हैं इसकी जांच कराई जाएगी। ---- पिंकी मनहर, एसडीएम साजा 

      अवैध खनन के हर मामले की जांच की जायेगी। --- रोहित साहू, जिला खनिज अधिकारी बेमेतरा