श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन राजा परीक्षित के प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए भक्त
बारगांव (बेरला) में श्रीमद भागवत कथा में वृंदावन की झांकी को श्रद्धालुओं ने खूब सराहा
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 29 जनवरी 2026 - बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक के ग्राम बारगांव में आयोजित श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा के दूसरे दिन गुरूवार को कथावाचक श्रीधाम वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म सहित अन्य प्रसंग सुनाया।
कथा का समापन 5 फरवरी को होगा। प्रतिदिन दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक कथा होगी। साथ ही शाम 5 से 6 बजे तक वृंदावन की झांकी को श्रद्धालुओं ने खूब सराहा।
श्रीधाम वृंदावन से दीक्षा प्राप्त कथावाचक पूज्या श्रद्धा दीदी ने शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार परीक्षित महाराज वन में चले गए। उनको प्यास लगी तो समीक ऋषि से पानी मांगा। ऋषि समाधि में थे, इसलिए पानी नहीं पिला सके। परीक्षित ने सोचा कि साधु ने अपमान किया है। उन्होंने मरा हुआ सांप उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी। ऋषि के पुत्र ने शाप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प आएगा और राजा को जलाकर भस्म कर देगा। समीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और
यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है। समीक ऋषि ने जब यह सूचना जाकर परीक्षित महाराज को दी, तो वह अपना राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंपकर गंगा नदी के तट पर पहुंचे। वहां बड़े ऋषि, मुनि देवता आ पहुंचे और अंत में व्यास नंदन शुकदेव वहां पहुंचे। शुकदेव को देखकर सभी ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा के दौरान धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु जम कर झूमें। कथा में दूसरे दिन बड़ी संख्या में महिला-पुरूष कथा सुनने पहुंचे। इस दौरान सेवा सहकारी समिति बारगांव के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा, राजेन्द्र यादव, सतीश यादव, देवेंद्र वर्मा, गणेश साहू, मुकेश यादव, डॉ केके वर्मा, यशवंत सोनी, अनिल वर्मा, फत्ते वर्मा, नरसिंह साहू, धर्मेंद्र साहू, टोपसिंह साहू सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
वहीं 30 जनवरी को कपिल अवतार, ध्रुव चरित्र की कथा होगा। 31 जनवरी को प्रहलाद चरित्र व 1 फरवरी को श्रीराम कथा, श्रीकृष्ण जन्म, 2 फरवरी को बाललीला, श्रीकृष्ण रूखमणी विवाह होगी। वहीं 3 फरवरी को द्वारिका लीला, सुदामा चरित्र, 4 फरवरी को परीक्षित मोक्ष, चढोत्री, शोभायात्रा व 5 फरवरी को गीता सहसधारा, तुलसी वर्षा व हवन पूर्णाहुति होगी।
आयोजन को सफल बनाने में मनहरण वर्मा, ओमप्रकाश वर्मा, मंगला यादव, चुम्मन वर्मा, श्याम, नागेश्वर साहू, ईश्वरी साहू, कमलनारायण सहित गांव के पदाधिकारी जुटे हुए हैं।
कथा कराने से पितरों को प्राप्त होती है ईश्वर की कृपा
हर एक व्यक्ति को रोज भागवत कथा का कम से कम एक श्लोक अर्थ के साथ पढ़ना चाहिए, जो व्यक्ति घर में भागवत कथा कराता है या भागवत पुराण रखता है उनके पितरों को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यह बात श्रीमद् भागवत कथा के दुसरे दिन गुरुवार को कथावाचक पूज्या श्रद्धा दीदी ने कही।
वृंदावन की झांकी के माध्यम से बांके बिहारी का पावन दर्शन
कथावाचक पूज्या श्रद्धा दीदी ने बताया कि वृंदावन में बांके बिहारी का विशाल मंदिर है, जहां देश-विदेश से भक्त सिर्फ उनकी एक झलक पाने के लिए यहां आते हैं। मार्गशीर्ष माह की पंचम तिथि को बांके बिहारी वृंदावन में प्रकट हुए थे। श्री बांके बिहारी मंदिर का निर्माण स्वामी हरिदास के वंशजों के सामूहिक के प्रयासों से हुआ था। मंदिर में बांके बिहारी की काले रंग की प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा में कृष्ण और राधा का मिलाजुला रूप समाया हुआ है। माना जाता है कि जब भी स्वामी हरिदास श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होते तो श्रीकृष्ण उन्हें दर्शन देते थे। मान्यता है कि बांके बिहारी की छवि को लगातार देखने से भक्त श्रीकृष्ण की भक्ति में वशीभूत हो उनके साथ ही चला जाता है। इसके लिए मंदिर में उनकी मूर्ति के आगे एक पर्दा लगा है जो हर दो मिनट में हिलता है ताकि कोई भी बांके बिहारी को एक टक न देख सके। माना जाता है कि उनकी मूर्ति में इतना आकर्षण है कि लोग उन्हें देखते ही उनकी ओर खींचे चले जाते हैं। साथ ही उनकी आंखों से अपने आप आंसू बहने लगते हैं।