गातापार साजा के ग्रामवासी वर्षों से कर रहे योजना का लाभ लेने का इंतजार
निर्माण को लेकर गातापार (साजा) के ग्रामीण व जन प्रतिनिधि विभाग को कई बार बोल चुके
केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन का जिलें में जमीनी हकीकत
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 28 जनवरी 2026 - जिलें के साजा ब्लाक के गातापार गांव में पानी की कमी को दूर करने के उद्देश्य को लेकर शासन ने करोड़ों रुपए की पानी टंकी व पाइप लाइन के कार्य की स्वीकृति दी गई है। लेकिन शासन के इस उद्देश्य को ठेकेदारों द्वारा ठेंगा दिखाकर चुना लगाया जा रहा हैं।
ज्ञात हो कि साजा ब्लाक के ग्राम पंचायत गोडमर्रा के आश्रित ग्राम गातापार में पानी की भारी समस्या का सामना ग्रामवासियों को करना पड़ रहा हैं। वहीं शासन द्वारा स्वीकृत किए गए पानी टंकी निर्माण व पाइप लाइन कार्य को लेकर ठेकेदार व विभाग गम्भीर नजर नहीं आ रहे हैं।
ग्राम गातापार में स्वीकृत पानी टंकी के निर्माण कार्य को आज लगभग 4-5 वर्ष होने को हैं, जिसमें सिर्फ टंकी का ही निर्माण हुआ हैं, साथ ही गांव की गलियों में पाइप लाइन भी बिछाया गया है। वहीं पानी टंकी में पानी भरने के लिए पानी की व्यवस्था अभी तक नहीं किया गया हैं। वहीं ना तो अहाता का निर्माण हुआ हैं, ना ही क्लोरिनेशन रूम बना है, ना ही पंप हाउस का निर्माण किया गया हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि पानी की टंकी के निर्माण को लगभग दो साल होने को है। इस निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा सिर्फ टंकी बना कर छोड़ दिया है। जिससे पेयजल की समस्या ग्राम में बनी हुई हैं। पेयजल समस्या से निपटने शासन की महत्वाकांक्षी योजना व व्यवस्था जल जीवन मिशन के घटिया व मनमानी काम से ठेकेदार व विभाग सरकार की मंशा को चकनाचूर कर रहे हैं। वहीं इस पानी टंकी निर्माण कार्य स्थल ऐसा है जहां कई बड़े बड़े गड्डे हैं जिसमे कई बार मवेशी भी दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं।
पंचायत से किया गया पेयजल की व्यवस्था
ग्राम पंचायत गोडमर्रा के आश्रित ग्राम गातापार में इस पानी टंकी के निर्माण कार्य की स्थिति को लेकर सरपंच ममता सिंहा व प्रतिनिधि केवल सिंहा ने जानकारी दी कि लोगों को स्वच्छ पानी कब मिल पाएगा यह कह पाना मुश्किल है। इन दोनों के द्वारा बताया गया कि इस पानी टंकी निर्माण कार्य को लेकर विभाग को कई बार बोला जा चुका हैं, बोल बोल कर थक चुके है। जिससे हताश होकर गांव की गलियों में बिछे पाइप लाइन में ग्राम पंचायत की बोर पंप से कनेक्शन कर पानी की व्यवस्था की गई है। सरकार द्वारा लोगों की सुविधा देने के उद्देश्य से करोड़ों रुपए स्वीकृत किए गए, मगर उसका लाभ ग्रामवासियों को नहीं मिल पा रहा हैं, जो कि बड़ी विडंबना है।