बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

भगवान से जुड़ना सिखाती है श्रीमद भागवत - श्रद्धा दीदी

श्रीकृष्ण-रूखमणी विवाह कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु 

श्रीमद् भागवत कथा बारगांव (बेरला) में उमड़ी श्रोताओं की भीड़, आज होगी सुदामा चरित्र की कथा 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 03 फरवरी 2026 - बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक के ग्राम बारगांव में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के सातवें दिन मंगलवार को कथावाचक वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने श्रीकृष्ण विवाह प्रसंग का रसपान कराते हुए कहा कि विदर्भ के राजा भीष्मक के घर रुक्मणी का जन्म हुआ। बाल अवस्था से भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे हृदय से पति के रूप में चाहती थीं। लेकिन भाई रुक्मणी का विवाह शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। रुक्मणी ने अपने भाई की इच्छा जानी तो उसे बड़ा दुख हुआ। 
   अत: शुद्धमति के अंतपुर में एक सुदेव नामक ब्राह्मण आता-जाता था। रुक्मणी ने उस ब्राह्मण से कहा कि वे श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती हैं। सात श्लोकों में लिखा हुआ मेरा पत्र तुम श्रीकृष्ण तक पहुंचा देना। 
उन्होंने बताया कि रुक्मणी ने स्वयं को प्राप्त करने के लिए उपाय भी बताया। पत्र में रुक्मणी ने बताया कि वह प्रतिदिन पार्वती की पूजा करने के लिए मंदिर जाती हैं, श्रीकृष्ण आकर उन्हें यहां से ले जाओ। पत्र के माध्यम से रुक्मणी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप इस दासी को स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं हजारों जन्म लेती रहूंगी। मैं किसी और पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती हूं। उन्होंने बताया कि पार्वती के पूजन के लिए जब रुक्मणी आई, उसी समय प्रभु श्रीकृष्ण रुक्मणी का हरण कर ले गए। 
        अत: रुक्मणी के पिता ने रीति रिवाज के साथ दोनों का विवाह कर दिया। कथावाचक वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने बताया कि रुक्मणी स्वयं साक्षात लक्ष्मी हैं और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती। 
       इस अवसर पर श्रीकृष्ण और रूक्मणि के विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इंद्र लोक से सभी देवताओं द्वारा पुष्पों की वर्षा की तथा खुशियां लुटाई।  
  भागवत कथा श्रवण करने मटिया, कोसपातर, बारगांव, बलौदी व मुड़पार के श्रद्धालु व पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में पहुचे। वहीं 4 फरवरी को सुदामा चरित्र, 5 फरवरी को परीक्षित मोक्ष व चढोत्री होगी। 
भगवान से जुड़ना सिखाती है श्रीमद भागवत - श्रद्धा दीदी 
वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा का मुख्य उद्देश्य है परमपिता परमात्मा की प्राप्ति। यह कथा हमें संसार से भागना नहीं सिखाती, बल्कि संसार में रहते हुए भगवान से जुड़ना सिखाती है। कथा के श्रवण से मन निर्मल होता है, विवेक जागृत होता है और हृदय में भक्ति का उदय होता है। जब भक्ति दृढ़ होती है, तो जीव धीरे-धीरे परमात्मा की ओर आकर्षित हो जाता है। श्रीमद्भागवत हमें जीने की कला सिखाती है। 
   उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने का मौका उसको ही मिलता है, जिस पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा होती है। 

भगवान से जुड़ना सिखाती है श्रीमद भागवत - श्रद्धा दीदी

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