बेरला क्षेत्र में सिंचाई विभाग के कार्यालय का अभाव, तांदुला जल संसाधन विभाग दुर्ग के भरोसे अन्नदाता

लाचारी - एक जिला से दूसरे जिला का चक्कर काटने को मजबूर किसान 

सिंचाई व्यवस्था - बेमेतरा जिलें के बेरला ब्लाक दो जिलों में हैं बंटा, बेरला के 120 ग्रामों के किसान व ग्रामीण हैं प्रभावित एवं समस्याग्रस्त 

ब्लाक व जिलें में उपलब्ध नहीं हैं तांदुला का विभागीय कार्यालय व अधिकारी 
बेमेतरा 01 जुलाई 2026 - छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और किसान देश के अन्नदाता हैं, लेकिन बेमेतरा जिले के बेरला क्षेत्र के किसानों को एक अदद पानी की समस्या के समाधान के लिए एक जिले से दूसरे जिले का सफर तय करना पड़ रहा है। बेरला विकासखंड के लगभग 115-120 गांवों का ग्रामीण क्षेत्र सिंचाई विभाग के तांदुला जल संसाधन विभाग दुर्ग के अंतर्गत आते हैं। विडंबना यह है कि इस विभाग का मुख्य कार्यालय बेरला ब्लॉक या बेमेतरा जिले में न होकर पड़ोसी जिले दुर्ग में स्थित है। स्थानीय स्तर पर कार्यालय न होने के कारण क्षेत्रवासी और किसान सालों से परेशान हैं। 

बेरला के 100 में 90 पंचायतों का क्षेत्र तांदुला में 
ज्ञात हो कि बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक में कुल 100 ग्राम पंचायत आते हैं, जिनमें से लगभग 85-90 ग्राम पंचायतों के 120 गांवों का क्षेत्र तांदुला जल संसाधन विभाग दुर्ग के अंतर्गत आता हैं। कुल 100 ग्राम पंचायतों में से मात्र 10-15 ग्राम पंचायतों के क्षेत्र ही बेमेतरा जिले में आते हैं। 

नदियां हैं विभाजन रेखा 
बेमेतरा जिलें के बेरला ब्लाक के ग्राम पंचायतों का विभाजन नदियों के द्वारा किया गया है। जिसके तहत बेमेतरा से बेरला मार्ग पर ग्राम अमोरा में स्थित शिवनाथ नदी के इस ओर बेमेतरा व उस ओर दुर्ग जिला में विभाजित किया गया है। वैसे ही कोदवा से बेरला मार्ग पर ग्राम परपोड़ा में स्थित शिवनाथ नदी के इस ओर बेमेतरा व उस ओर दुर्ग जिला में विभाजित किया गया है। बेमेतरा जिला क्षेत्र के ग्रामों में सिंचाई के लिए जल संसाधन विभाग बेमेतरा द्वारा कार्य किया जाता हैं, वहीं दुर्ग जिला क्षेत्र के ग्रामों में सिंचाई के लिए तांदुला जल संसाधन विभाग दुर्ग के द्वारा कार्य किया जाता हैं। 

दफ्तरों के चक्कर में कट रहा किसानों का समय 
बेरला क्षेत्र के लगभग 120 गांवों की कृषि भूमि और सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह से तांदुला विभाग दुर्ग के अधीन है। क्षेत्र में सिंचाई की नई सुविधाएं, नहरों व बांधों का निर्माण, संधारण (रखरखाव) और किसी भी कार्य की प्रशासनिक या तकनीकी स्वीकृति का पूरा जिम्मा दुर्ग कार्यालय के पास है। 
   हालत यह है कि यदि किसी किसान को पानी की समस्या, नहर टूटने या सिंचाई से जुड़ी कोई छोटी सी भी शिकायत या आवेदन देना हो, तो उसे अपना काम-काज छोड़कर दुर्ग जाना पड़ता है। 

किसानों का दर्द: "फसल के समय जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब अधिकारी स्थानीय स्तर पर मिलते नहीं। एक छोटे से आवेदन पर दस्तखत कराने के लिए हमें पूरा दिन और पैसा खर्च करके दुर्ग जाना पड़ता है। वहां भी साहब मिलेंगे या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।" 

प्रमुख समस्याएं जो झेल रहे हैं क्षेत्रवासी 
समय और पैसे की बर्बादी : बेमेतरा जिले के सुदूर गांवों से दुर्ग की दूरी तय करने में किसानों का भारी समय और पैसा बर्बाद होता है। 
अधिकारियों से संपर्क का अभाव : स्थानीय स्तर पर कोई जिम्मेदार अधिकारी या कंट्रोल रूम न होने से आपात स्थिति (जैसे नहरों में पानी छोड़ना या रोकना) में किसानों की सुनवाई नहीं हो पाती। 
विकास कार्यों में लेत-लतीफी : बेरला क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, नहरों की मरम्मत और नए निर्माण कार्यों की फाइलें दुर्ग कार्यालय में ही दबी रह जाती हैं। 
क्षेत्रवासियों की मांग : बेरला में खुले उप-संभाग कार्यालय 
स्थानीय ग्रामीणों, प्रगतिशील किसानों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए तांदुला विभाग का एक उप-संभाग (Sub-division) कार्यालय या कम से कम एक नोडल डेस्क बेरला ब्लॉक मुख्यालय में अनिवार्य रूप से खोला जाए। 

बेरला खुद हैं एक बड़ा विकासखंड 
जब बेरला खुद में एक बड़ा विकासखंड है, जहां कुल 100 ग्राम पंचायतें आती हैं, जिनमें से लगभग 85-90 ग्राम पंचायतों का क्षेत्र तांदुला जल संसाधन विभाग दुर्ग के अंतर्गत आता हैं, तो यहाँ के किसानों को अपने हक के पानी और सुविधाओं के लिए दूसरे जिले पर निर्भर क्यों रखा जा रहा है? 
     अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक संज्ञान लेता है और बेरला के अन्नदाताओं को इस मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से कब मुक्ति मिलती है। 

इस संबंध में विभाग से जानकारी लेकर पता करती हूं। 
---- सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई, कलेक्टर बेमेतरा 

यह व्यवस्था शुरु से ही ऐसी बनी हुई हैं, उस क्षेत्र के परेशानी, समस्या, सुविधा संबंधी आवेदन आने पर दुर्ग कार्यालय को भेज देते हैं। 
------ सीएस शिवहरे, ईई, जल संसाधन विभाग बेमेतरा 

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