हाफ नदी की 52 वर्षीय जर्जर पुल को निर्माण की दरकार, pwd विभाग की अनदेखी आई सामने

व्यस्त मार्ग, यातायात का भारी दबाव, जर्जर पुल से बड़े हादसा या अनहोनी की शत प्रतिशत संभावना, दे रहा खुला आमंत्रण 

बेमेतरा से मुंगेली मार्ग - सड़क निर्माण को मिली करोड़ों की स्वीकृति, मगर 5 दशक पूर्ण कर चुके पुराने पुल की अनदेखी 

दुविधा - समस्या या सुविधा (बिना पुल निर्माण के नई सड़क का क्या औचित्य) 

कैबिनेट मंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र में यह हाल, अधिकारी क्या सिद्ध करना चाहते हैं, अपनी या मंत्री की औ.... 

बेमेतरा का विकास - सड़क को 'करोड़' तो पुल को 'ठेंगा' 
बेमेतरा 09 जुलाई 2026 - विकास की रफ्तार जब कागजी दांव-पेंचों में फंसती है, तो जनता की जान दांव पर लग जाती है। ऐसा ही एक जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण बेमेतरा से मुंगेली मार्ग पर देखने को मिल रहा है। इस मार्ग के चौड़ीकरण और निर्माण के लिए शासन से करोड़ों रुपये (116 करोड़) की स्वीकृति तो मिल गई है, लेकिन इसी मार्ग की 'लाइफलाइन' कहे जाने वाले हाफ नदी के 52 साल पुराने जर्जर पुल को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। 
  हालत यह है कि इस जर्जर पुल पर कभी भी कोई बड़ी अनहोनी या जानलेवा हादसा हो सकता है, जिसकी शत-प्रतिशत आशंका बनी हुई है। 

मध्य प्रदेश के जमाने का पुल, लागत तब 5.40 लाख थी, अब लगेंगे करोड़ों 
इतिहास के पन्नों को पलटें तो हाफ नदी पर बने इस पुल का निर्माण अविभाजित मध्य प्रदेश के शासनकाल में वर्ष 1974 में हुआ था। उस वक्त इस पूरे पुल का निर्माण महज 5.40 लाख रुपये की लागत से किया गया था। आज इस पुल ने अपने जीवनकाल के 5 दशक (52 वर्ष) पूरे कर लिए हैं। समय के साथ यह पूरी तरह जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुका है। आज अगर इसका पुनर्निर्माण कराया जाए, तो इसमें करोड़ों रुपये की लागत आएगी, लेकिन जिम्मेदार विभाग आँखें मूंदे बैठा है। 
दुविधा : बिना पुल के नई चमचमाती सड़क का क्या औचित्य? 
क्षेत्र की जनता इस समय एक अजीब दुविधा और आक्रोश में है। समझ से परे है कि जब करोड़ों की लागत से नई सड़क बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन बीच में हाफ नदी का यह खस्ताहाल पुल वैसा ही रहेगा, तो उस आधुनिक सड़क का क्या औचित्य? क्या एक जर्जर पुल पूरी सड़क की उपयोगिता को शून्य नहीं कर देगा? यह विकास है या विनाश को आमंत्रण? 
PWD के दो विंग (सड़क और सेतु) का आपसी तालमेल शून्य 
इस पूरी लापरवाही के पीछे लोक निर्माण विभाग (PWD) के दो विंगों (सड़क विंग और सेतु (ब्रिज) विंग) के बीच आपसी तालमेल की भारी कमी उजागर हुई है। सड़क विंग ने अपनी फाइल दौड़ाई और सड़क निर्माण की स्वीकृति (116 करोड़) तो ले ली, लेकिन सेतु विंग गहरी नींद में सोता रहा। नतीजतन, सड़क को तो हरी झंडी मिल गई, मगर पुल की अनदेखी कर दी गई। विभाग की इस आपसी खींचतान का खामियाजा आम जनता भुगतने को मजबूर है। 

व्यस्त मार्ग, यातायात का भारी दबाव 
यहां पर ध्यान देने वाली बात यह हैं कि जिला मुख्यालय बेमेतरा से नवागढ़, मुंगेली सड़क मार्ग एक व्यस्त एवं भारी यातायात वाला सड़क मार्ग हैं। बेमेतरा से इस सड़क मार्ग से नवागढ़, मुंगेली, तखतपुर, बिलासपुर, पंडरिया, जबलपुर, मंडला, सतना, रीवा आदि स्थानों का आवागमन होता हैं, जिसमें छोटी से लेकर बड़ी गाड़ियों का आना जाना पूरे समय लगा रहता हैं। जिसको ही देखते हुए नई व आधुनिक सड़क मार्ग निर्माण के लिए 116 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृति प्रदान की गई। मगर इस सड़क मार्ग पर हाफ नदी पर स्थित पुल 52 वर्ष पुरानी हैं, जो आज की स्थिति में जर्जर हो चुकी हैं, जो भारी यातायात का दबाव झेलने में सक्षम नहीं हैं। जिसका नया निर्माण नितांत आवश्यक हैं। 
कैबिनेट मंत्री के गृह क्षेत्र का यह हाल : अधिकारी क्या सिद्ध करना चाहते हैं? 
सबसे हैरान और आक्रोशित करने वाली बात यह है कि यह पूरा मामला प्रदेश के कैबिनेट मंत्री दयाल दास बघेल के गृह विधानसभा क्षेत्र का है। हाई-प्रोफाइल वीआईपी क्षेत्र होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही कई गंभीर सवाल खड़े करती है : 
बड़ा सवाल : मंत्री के खुद के क्षेत्र में अगर अधिकारी इतने संवेदनशील मुद्दे पर लापरवाह हैं, तो वे क्या सिद्ध करना चाहते हैं? क्या वे अपनी मनमानी दिखाकर खुद को मंत्री से ऊपर साबित करना चाहते हैं या फिर मंत्री की राजनीतिक साख (औकात) को चुनौती दे रहे हैं? 

बड़ा हादसा हुआ, तो जिम्मेदार कौन? 
हाफ नदी का यह पुल आज एक 'टाइम बम' की तरह टिक-टिक कर रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच यह कब जमींदोज हो जाए, कहा नहीं जा सकता। क्षेत्र की जनता अब आर-पार के मूड में है और मांग कर रही है कि सड़क निर्माण के साथ ही इस पुल के लिए तत्काल बजट स्वीकृत कर नए सिरे से निर्माण शुरू कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके। 
   अब देखना यह है कि इस गंभीर खबर के बाद लोक निर्माण विभाग के अफसर जागते हैं या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करते हैं। 

         हाफ नदी पुल के जर्जर होने की जानकारी हैं। नए पुल के निर्माण के लिए पिछले बार प्रस्ताव भेजा गया था, मगर वह स्वीकृत नहीं हुआ, फिर से प्रस्ताव भेजा गया हैं। यह पुल प्राथमिकता में हैं, स्वीकृति पश्चात जल्द निर्माण कार्य कराया जाएगा। 
----- सीके पांडेय, ईई, पीडब्ल्यूडी सेतु विभाग दुर्ग 

     सड़क निर्माण की मिली स्वीकृति में पुल निर्माण नहीं हैं। पुल निर्माण के संबंध में सेतु निर्माण शाखा जानकारी देगा। 
---- डीके चंदेल, ईई, पीडब्ल्यूडी बेमेतरा 

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