कृषि विभाग किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती की जानकारी दें, ताकि किसान कम लागत में प्राप्त कर सकें बेहतर उत्पादन - कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई

कलेक्टर ने खाद-बीज उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की समीक्षा, किसानों से शीघ्र उठाव करने की अपील 

खरीफ सीजन 2026 की तैयारियां तेज, जिले को लक्ष्य के विरुद्ध 137 प्रतिशत सुपर फॉस्फेट खाद प्राप्त 
बेमेतरा 01 जून 2026 - खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों के बीच बेमेतरा जिले में किसानों के लिए खाद एवं बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। कलेक्टर द्वारा जिले में खाद-बीज के भंडारण, उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि किसानों को समय पर आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो सके। जिले में ऋणी कृषकों की संख्या अधिक होने के कारण शासन द्वारा खाद वितरण के लिए 60:40 के स्थान पर 70:30 का अनुपात निर्धारित किया गया है। इसके तहत जिले को प्राप्त होने वाली खाद की 70 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति सहकारी समितियों के माध्यम से की जा रही है। मार्कफेड द्वारा रैक प्वाइंट से खाद का परिवहन कर किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। 

खाद भंडारण और वितरण की स्थिति 
शासन द्वारा जिले के लिए कुल 68300 मीट्रिक टन खाद भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 46,470 मीट्रिक टन खाद जिले को प्राप्त हो चुकी है, जो लक्ष्य का लगभग 68 प्रतिशत तथा गत वर्ष के कुल वितरण का 71.92 प्रतिशत है। वहीं 26370 मीट्रिक टन खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 38.61 प्रतिशत है। डीएपी खाद के लिए जिले को 16200 मीट्रिक टन का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके विरुद्ध अब तक 5089 मीट्रिक टन डीएपी खाद का भंडारण किया जा चुका है। यह गत वर्ष के डीएपी वितरण का लगभग 46 प्रतिशत है। 

डीएपी के विकल्प के रूप में SSP और NPK के उपयोग पर जोर 
समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने कहा कि डीएपी खाद की मांग अधिक होने के बावजूद इसकी उपलब्धता सीमित है। ऐसे में किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) एवं एनपीके (NPK) खाद के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने मैदानी अमले के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती की जानकारी दें, ताकि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। 

सुपर फॉस्फेट और एनपीके की पर्याप्त उपलब्धता 
कृषि विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान में 7584 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) तथा 6264 मीट्रिक टन एनपीके खाद उपलब्ध है। जिले को सुपर फॉस्फेट खाद लक्ष्य के विरुद्ध लगभग 137 प्रतिशत प्राप्त हुई है, जिससे किसानों को फॉस्फेटयुक्त उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सिंगल सुपर फॉस्फेट में 16 प्रतिशत फॉस्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है, जो फसलों की वृद्धि और उत्पादन के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसलिए किसान डीएपी के विकल्प के रूप में एसएसपी अथवा एनपीके का उपयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। 

हरी खाद, नैनो उर्वरक और जैविक विकल्प भी उपलब्ध 
मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से जिले की सहकारी समितियों में 228 क्विंटल हरी खाद (मूंग एवं ढैंचा) का भंडारण किया गया है, जिसे किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त समितियों में 2814 बोतल नैनो डीएपी तथा 3592 बोतल नैनो यूरिया भी वितरण के लिए उपलब्ध हैं। जिले के 1357 किसान नील हरित शैवाल (ब्लू-ग्रीन एल्गी) जैसे जैव उर्वरकों का उत्पादन कर रहे हैं, जिसके उपयोग से यूरिया की खपत में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। 

किसानों से खाद-बीज का शीघ्र उठाव करने की अपील 
कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि वे सहकारी समितियों एवं अधिकृत विक्रेताओं के पास उपलब्ध खाद-बीज का समय पर उठाव करें तथा कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाएं। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।