पारदर्शिता को ठेंगा : करोड़ों की बेमेतरा-मुंगेली सड़क निर्माण में कार्य प्रारंभ के महीनो बाद भी गायब है सूचना बोर्ड

जिला मुख्यालय से निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बावजूद कार्य में प्रशासनिक उदासीनता का यह आलम 

सरकार की गुणवत्ता, पारदर्शिता, जीरो टायलेंस का पालन सिर्फ कागजों व भाषणों में हो रही खानापूर्ति 

बेमेतरा 13 जून 2026 - लोक निर्माण विभाग (PWD) बेमेतरा के तहत चल रहे बेमेतरा से मुंगेली सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण कार्य में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। सरकार और विभाग पारदर्शिता (जीरो टायलेंस) का कितना भी ढोल पीट लें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लगभग 116 करोड़ 87 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रही इस सड़क का काम शुरू हुए 6 से 8 महीने बीत चुके हैं, लेकिन निर्माण स्थल पर अब तक कोई सूचना बोर्ड (Signboard) नहीं लगाया गया है। 
    विभाग की इस रहस्यमयी चुप्पी से अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि सड़क निर्माण कार्य की महत्वपूर्ण जानकारियों को छिपाकर लोक निर्माण विभाग आखिरकार क्या और किसे बचाना या छुपाना चाहता है? 

करोड़ों का प्रोजेक्ट, नियम ताक पर 
बता दें कि बेमेतरा से मुंगेली के बीच 43 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण किया जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट का टेंडर 24 जून 2025 को जारी किया गया था। यह सड़क मार्ग दो जिलों बेमेतरा व मुंगेली को जोड़ेंगी। साथ ही यह क्षेत्र खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल के स्वयं का विधानसभा क्षेत्र भी है। 

वर्तमान में सड़क पर :
बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, सफाई व्यवस्था
पुल-पुलिया का निर्माण और चौड़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। 
     नियमों के मुताबिक, किसी भी सरकारी निर्माण कार्य के शुरू होते ही जनता की जानकारी के लिए मौके पर एक बड़ा सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है। इस बोर्ड पर प्रोजेक्ट की कुल लागत, ठेकेदार का नाम, काम शुरू और खत्म होने की तारीख, और सड़क की गारंटी (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) जैसी जानकारियां साफ-साफ लिखी होनी चाहिए। लेकिन शुक्रवार 12 जून को इस 43 किमी लंबे मार्ग पर ऐसा कोई बोर्ड दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। 

जनता से जानकारी छिपाने के पीछे की मंशा क्या? 
सड़क निर्माण के दौरान उड़ती धूल, कटते पेड़ों और पुल-पुलिया के अधूरे निर्माण से राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों और राहगीरों को यह जानने का पूरा हक है कि यह काम कब तक पूरा होगा और इसकी गुणवत्ता के क्या मानक हैं। 
बड़ा सवाल : आखिर पीडब्ल्यूडी विभाग और संबंधित ठेकेदार इस जानकारी को सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रहे हैं? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कोई समझौता किया जा रहा है, या फिर अधिकारियों की शह पर ठेकेदार को खुली छूट दी गई है? 

संरक्षण की बू, जांच की मांग 
बिना सूचना बोर्ड के इतने बड़े पैमाने पर काम करना सीधे तौर पर शासकीय नियमों का उल्लंघन है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सूचना बोर्ड न होने से ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है और पूछने पर कोई सही जवाब नहीं मिलता। विभाग की इस कार्यप्रणाली से अब संरक्षण व भ्रष्टाचार की बू आने लगी है। 
     अब देखना यह होगा कि मामले के उजागर होने के बाद क्या लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं और निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगवाकर पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं, या फिर यह 'अंधेर नगरी चौपट राजा' का खेल ऐसे ही चलता रहेगा। 

"सूचना बोर्ड स्थल के प्रारंभ व आखिर में अभी लगवा दिया गया हैं। 
 ---- डीके चंदेल, ईई, पीडब्ल्यूडी बेमेतरा"