तेलगा बेरला के बिरेन्द्र सेन ने रक्तदान में रिकॉर्ड बनाकर पेश की मिसाल

आज विश्व रक्तदाता दिवस पर विशेष - बिरेन्द्र सेन, उम्र 30 साल, अब तक 22 बार डोनेट कर चुके हैं ब्लड 
बेमेतरा 13 जून 2026 - 14 जून को प्रति साल विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से साल 2004 में इसकी शुरूआत की गई। रक्तदान कर न जाने कितनी जिंदगियों की मदद की जा सकती है, इसलिए रक्तदान को महादान भी कहा गया है।
     हम अक्सर देखते हैं कि बेमेतरा जिला में आए दिन रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है और लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जाता है, लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रक्तदान करने के लिए विश्व रक्तदान दिवस का इंतजार नहीं करते। उन्होंने रक्तदान को अपने जीवन का हिस्सा ही बना लिया है। वह खुद तो नियमित रूप से रक्तदान करते ही हैं बल्कि दूसरों को भी रक्तदान करने के लिए साल के 365 दिन प्रेरित करते रहते हैं। 
     खुद भी रक्तदान करके रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने वाले एक शख्सियत बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के तेलगा निवासी बिरेन्द्र सेन से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने 18 साल की उम्र में पहली बार रक्तदान किया और उसके बाद रक्तदान से वो इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। महज 30 साल की उम्र में वो अब तक कुल 22 बार रक्तदान कर चुके हैं। 
    बिरेंद्र सेन ने बताया कि जब वह 18 वर्ष के थे तो उनके पड़ोस में रहने वाले एक अंकल की हार्ट की सर्जरी होनी थी और उन्हें ब्लड की जरूरत थी। उनकी पत्नी मेरी मां के पास आईं और उन्होंने कहा कि मेरे पति की हार्ट की सर्जरी होनी है, उन्हें ब्लड की जरूरत है, कोई ब्लड देने वाला नहीं मिल रहा है। मेरी मां ने उनसे कहा कि आप मेरे बेटे को ले जाओ, यह ब्लड दे देगा। 
    बिरेंद्र सेन ने बताया कि मेरी उम्र 18 साल थी, लेकिन, ब्लड देने की बात मैंने पहली बार सुनी थी तो पहले डर लगा, लेकिन मैं आंटी के साथ चला गया। मैंने वहां ब्लड दिया और उसके बाद घर आ गया। फिर जब ऑपरेशन के बाद अंकल ठीक हो गए तो वह जब भी कहीं गली में टहलते हुए दिखते थे और किसी से बात करते थे तो यही कहते थे कि मैं तो बिरेंद्र सेन के खून से जिंदा हूं, यह ब्लड ना देता तो शायद में जिंदा नहीं होता। उनकी यह बात सुनकर काफी प्रेरणा मिली और इसके बाद मुझे लगा कि वाकई रक्तदान करना बहुत जरूरी है और फिर रक्तदान मेरे जीवन का हिस्सा बन गया। मैं नियमित रूप से रक्तदान करने लगा और साल 2026 तक आते-आते मैं 22 ब्लड डोनर बन गया। मुझे संगठन द्वारा सम्मानित भी किया। इस तरह की छोटे-छोटे सम्मानों से उत्साह बढ़ता गया और मैं इस मुहिम को और जोश से शुरू किया। 

जिला अस्पताल में 12 व मेकाहारा में 10 बार रक्तदान 
तेलगा ब्लाक बेरला निवासी बिरेंद्र सेन ने बताया कि वे जिला अस्पताल बेमेतरा में 12 व मेकाहारा में 10 बार रक्तदान दे चुका है। रक्तदान से न केवल किसी जरूरतमंद मरीज की जान बचती है बल्कि इससे मानसिक संतुष्टि, आत्म-सम्मान और खुशी का गहरा एहसास भी मिलता है। वैज्ञानिक रूप से भी, रक्तदान करने से शरीर में एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे 'खुशी देने वाले हार्मोन' का स्राव होता है, जो तनाव और चिंता को दूर करते हैं। 
रक्तदान से होता है शारीरिक और मानसिक लाभ 
1. मानसिक शांतिः किसी का जीवन बचाने का अहसास मन को अद्वितीय सुकून, खुशी और गर्व देता है। 
2. हृदय स्वास्थ्यः नियमित दान से खून का थक्का (thickness) कम होता है और अतिरिक्त आयरन संतुलित रहता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है। 
3. कैलोरी बर्न : एक बार रक्तदान करने से शरीर की लगभग 650 कैलोरी तक बर्न हो जाती हैं। 

ऐसे जाने कौन किसको दे सकता है ब्लड 
1. O+ सबसे ज्यादा पाया जाने वाला ब्लड ग्रुप है। यह O+, A+, B+ और AB+ ब्लड ग्रुप वाले लोगों को खून दे सकते हैं। 
2. A+ ब्लड ग्रुप वाले लोग A+ व AB+ को खून दे सकते हैं। वह खुद A+, A-, O+ और O- ब्लड ग्रुप से खून ले सकते हैं। ब्लड लेने के लिए इनके पास कई विकल्प होते हैं। 
3. O- ब्लड ग्रुप वाले लोग सभी को खून दे सकते हैं। O- ब्लड ग्रुप को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है। लेकिन खुद इसे सिर्फ o- ब्लड ग्रुप से ही खून मिल सकता है। जब मरीज का ब्लड ग्रुप पता नहीं होता, तब अक्सर इसी ब्लड का इस्तेमाल किया जाता है। 
4. B+ ब्लड ग्रुप वाले लोग B+ और AB+ ब्लड ग्रुप के लोगों को खून दे सकते हैं। वहीं, जरूरत पड़ने पर वे B+, B-, O+ और O- ब्लड ग्रुप वाले लोगों से खून ले सकते हैं। 
5. A-सिर्फ दो ही ब्लड ग्रुप्स से ब्लड ले सकते हैं। इस ब्लड ग्रुप वाले लोग A+, A-, AB+ और AB- ब्लड ग्रुप के लोगों को खून दे सकते हैं। लेकिन अगर खून लेने की बात करें तो वे सिर्फ A- और o- ब्लड ग्रुप से ही खून ले सकते हैं। 
6. B- अपने अलावा सिर्फ O-ब्लड ग्रुप से खून ले सकते हैं। इस ग्रुप वाले लोग B+, B-, AB+ और AB- ब्लड ग्रुप वाले लोगों को खून दे सकते हैं। लेकिन जरूरत पड़ने पर वह खुद सिर्फ B- और O- ब्लड ग्रुप से ही खून ले सकते हैं। 
7. AB+ ब्लड ग्रुप वाले लोग किसी से भी खून ले सकते हैं, इसलिए इन्हें यूनिवर्सल रिसीवर कहते है। हालांकि वह सिर्फ AB+ लोगों को ही ब्लड डोनेट कर सकते हैं। 
8. AB- ब्लड ग्रुप भारत में सबसे कम लोगों में पाया जाता है। यह AB+ और AB- को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि AB-, A-, B- और O- ब्लड ग्रुप से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।