अंततः साजा के जलाशय व टार बांध का सीमांकन कार्य हुआ पूर्ण

साजा एसडीएम के निर्देश व तहसीलदार के नेतृत्व में हुआ सीमांकन कार्य 

राजस्व निरीक्षक व पटवारी के दल ने किया सीमांकन, रिपोर्ट सौंपेंगे तहसीलदार को 

सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्यवाही, अतिक्रमणकर्ताओं से मुक्त कराया जाएगा भूमि 
बेमेतरा 31 मई 2026 - बेमेतरा जिलें के साजा शहर के विशाल जलाशय व टार बांध का पूर्ण सीमांकन शुक्रवार को हुआ। 6 घंटे चले इस सीमांकन का कार्य जिसमें छः पटवारी एवं एक राजस्व निरीक्षक की टीम ने भरी धूप व तपती गर्मी के बीच किया। सीमांकन में जलाशय के भीतर कई एकड़ जमीन अवैध कब्जे में मिली। 
   बता देना लाजिमी होगा कि इस जलाशय की बर्बादी को लेकर माह अगस्त से लगातार अभियान चलाकर लोगों में जागरूकता लाई गई। 50 साल पुराने जलाशय की पहली बार जांच के आदेश एसडीएम पिंकी मनहर में माह अगस्त में दिए थे, जांच आदेश के बाद उस समय भी इसकी जांच के लिए एक दल बनाया गया था और 7 दिनों में रिपोर्ट मांगी गई थी। सीमांकन हुआ, लेकिन बरसात का मौसम होने के कारण पूरे इलाके का नाप नहीं हो सका। वहीं ग्रामीणों ने इस सीमांकन पर आपत्ति जताई। मामला मुख्यमंत्री की टेबल तक भी पहुंचा। इस दरमियान एसडीम व कलेक्टर के तबादला के बाद मामला ठंडा पड़ गया।  
       बांध को लेकर लगातार शिकायत होती गयी। सुशासन के दौरान मामला फिर तुल पकड़ा। तहसीलदार विनोद बंजारे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए टीम का गठन 15 मई को करते हुए 15 दिनों में पूरी रिपोर्ट करने के आदेश दिए। जिसके बाद शुक्रवार को राजस्व अमला पूरी तैयारी के साथ जलाशय में उतरा और कई एकड़ में फैले जलाशय और टार बांध का सीमांकन किया। इस दौरान भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ भी लगी रही। 
      ज्ञात हो कि कभी यह शहर के कई एकड़ जमीन पर सिंचाई का एकमात्र साधन था, जो समय के साथ पूरी तरह अपना अस्तित्व खो चुका था। जलाशय के भीतर नियम के विरुद्ध करोड़ों रुपए के सरकारी भवन अधूरे बनाकर डकार दिया गया। जिस तरह जलाशय की बर्बादी की गई, उसको देखकर लोगों में भी भारी आक्रोश पनपने लगा था। 
   इस मामले को मीडिया सोशल मीडिया व नगर विकास की इच्छा रखने वालों द्वारा लगातार प्रमुखता से उठाया गया। अंततः सावन की झड़ी में शुरू हुआ अभियान जेठ की तपिश में समाप्त हुआ। राजस्व टीम द्वारा पूरी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंपने के बाद बांध पर हुए अतिक्रमण की सूची व क्षेत्रफल का विस्तृत खुलासा होगा। लोगों ने इस जनहित पहल पर खुशी जताई। 
सत्ता परिवर्तन के बाद जांच 
सत्ता बदलने के बाद उक्त शासकीय भूमि की जांच की कमान नगर पंचायत में आए नए युवाओं ने बागडोर संभाली, तब शहर के इस गंभीर मामले पर विचार किया गया। जिस तरह पूर्व में जलाशय को बर्बाद किया गया, वही सत्ता परिवर्तन से इसका मार्ग बना। इन नए युवाओं की टीम के युवा अध्यक्ष हिमांशु वर्मा, उपाध्यक्ष प्रेरणा सिंह सहित सभी पार्षदों ने इस मामले को लेकर रायपुर तक दौड़ लगाई। जिसका नतीजा अब यह जलाशय अपने पुराने रूप में आने की एक उम्मीद जग गई है। 

संयोग 
इस जलाशय के साथ एक संयोग यह भी बना जिस एसडीएम पिंकी मनहर ने अगस्त में पहली बार जांच के आदेश दिए थे, कुछ समय के बाद उनका स्थानांतरण हो गया था, पुनः उनकी वापसी हुई और उन्हीं के कार्यकाल में जलाशय का पूरा सीमांकन का कार्य संपन्न हो रहा हैं। 

सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्यवाही 
नगर के जलाशय व टार बांध की भूमि पर हुए अतिक्रमण की जांच को लेकर राजस्व विभाग की गठित टीम द्वारा किए गए सीमांकन की जांच रिपोर्ट के आधार पर अब आगे की कार्यवाही एसडीएम व तहसीलदार के द्वारा किया जाएगा। सीमांकन रिपोर्ट में पाए जाने वाले अतिक्रमणकारियों को बेदखल कर शासकीय भूमि जलाशय व टार बांध को सिंचाई हेतु मुक्त किया जाएगा।