भाजपा महिला आरक्षण नहीं परिसीमन बिल पास करना चाह रही थी - पूर्व मंत्री रवींद्र चौबे

भाजपा की मनसा महिला आरक्षण की नहीं, अपने मन मुताबिक सीटों के परिसीमन की थी, जो विपक्षी दलों की एकजुटता से पूरा नहीं हो सका - जिलाध्यक्ष व पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा 

महिला आरक्षण बिल पर भाजपा द्वारा फैलाया जा रहे भ्रम को लेकर कांग्रेस ने किया बेमेतरा जिला मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस 
बेमेतरा 20 अप्रैल 2026 - छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा द्वारा फैलाया जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए बेमेतरा जिला मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस रखा गया। जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे, जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा अध्यक्ष आशीष छाबड़ा एवं पूर्व संसदीय सचिव गुरुदयाल सिंह बंजारे ने संयुक्त रूप से जिला मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। 
  इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के समर्थन में थी और है। भाजपा द्वारा महिला आरक्षण को लेकर लगातार भ्रम फैलाया जा रहा है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, इसलिए संसद में बिल पास नहीं हो सका, भारतीय जनता पार्टी झूठ बोल रही है। महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023/106 व संविधान संशोधन वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस पर हस्ताक्षर कर चुकी है तथा यह कानून भी बन चुकी है। भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक सांसद में प्रस्तुत किया 131 वां संविधान संशोधन अधिनियम, इसमें महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती थी। सरकार ने 131 वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया। संसद में जो विधेयक गिरा, उसमें इस विधेयक में लोकसभा परिसीमन की सिम 850 करने का प्रस्ताव था। राज्यों में 815 सीटें तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें परिसीमन विधेयक जिसमें परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात की गई थी। विधेयक में पांडिचेरी, दिल्ली, जम्मू कश्मीर के कानूनों में संशोधन की बात की गई थी, ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक लागू किया जा सके, यह विधायक इसलिए गिरा। भाजपा सरकार का परिसीमन बिल पर देश के अन्य राज्यों को आपत्ति थी, भाजपा आरक्षण सामने रखकर परिसीमन बिल पास करना चाहती थी। 
     भाजपा 2011 के जन गणना को आधार मानकर परिसीमन करना चाहती है जब 2026-27 की जनगणना शुरू है तथा सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है, तो जनगणना के बाद आए नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं कराया जा रहा है। 
     पूर्व कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि महिला आरक्षण की बात करने वाले भाजपा आज भी नकाब हो चुकी है भाजपा के केंद्रीय कैबिनेट में हरदीप पुरी पेट्रोलियम मंत्री का नाम एब्सटीन फाइल में आया है, उन्हें तो आज तक भाजपा केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा नहीं सकी और भी ऐसे अनेकों नेता है जो महिलाओं के अपमान से जुड़े अनेक मामलों में फंसे हुए हैं, जिन्हें भाजपा आज तक अपने मंत्रिमंडल और संगठन में जगह देकर रखी हुई है। ऐसी पार्टी के मुंह से महिला आरक्षण की बात शोभा नहीं देती। 
   प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा अध्यक्ष आशीष छाबड़ा ने भी अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार को महिला आरक्षण बिल को यदि तुरंत लागू करना है तो परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33% का आरक्षण क्यों नहीं देना चाहती। सरकार कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार है, सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी, उसने ऐसा क्यों नहीं किया। जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो कानून बन चुका है 2036 से मुक्त रूप लेगा, संशोधन से तुरंत लागू हो जाता है। भाजपा की मनसा महिला आरक्षण की नहीं, अपने मन मुताबिक सीटों के परिसीमन की थी, जो विपक्षी दलों की एकजुटता से पूरा नहीं हो सका। कांग्रेस महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा है तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संभव हो पाया। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था, लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया, दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों के विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि है। सीटों के परिसीमन का भाजपा का षडयंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है। 
      प्रेस कॉन्फ्रेंस को पूर्व संसदीय सचिव गुरु दयाल सिंह बंजारे ने भी संबोधित किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मंगत साहू, जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष प्रांजल तिवारी, ललित विश्वकर्मा, जिला पंचायत सदस्य हरीश साहू, शशि प्रभा गायकवाड, सुशीला जोशी, जनपद पंचायत बेरला की अध्यक्ष माधुरी परगनिया, बेमेतरा नगर पालिका पार्षद रीता पांडे, रश्मि मिश्रा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शकुंतला साहू, योगिता साहू, सीमा टिकरीहा, जनता साहू, रूबी सलूजा, हेमिन यादव, नीलम टंडन, झम्मन बघेल, मनोज शर्मा, रवि रजक, देवेंद्र साहू, मोहित वर्मा, बहल वर्मा, ऋषि वर्मा, महानंद यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।