नवरात्रि के सातवें दिन मटिया (बेरला) के शीतला मंदिर में हुई मां कालरात्रि की आराधना

मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़, दिखाई दी माता के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा 

अष्टमी पर 108 कन्याओ को कन्या भोज आज गुरुवार को, साथ ही मां को लगाया जाएगा बासी भोजन का भोग 
बेमेतरा 25 मार्च 2026 - नवरात्रि के सातवें दिन बुधवार को मां कालरात्रि की उपासना श्रद्धाभाव से की गई। बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक के मटिया गांव के प्रमुख माँ शीतला मंदिर पर पिछले सात दिनों से आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। भक्तों ने देवी को जल और पुष्प चढ़ाकर मनोकामना पूर्ति की कामना की। 
     नवरात्र के सातवें दिन बुधवार को दुर्गा माता के सप्तम स्वरूप कालरात्रि की गांव के शीतला मंदिर में आराधना की गई। 
    देवी मंदिरों में भक्तों मां काली के सिद्ध मंत्र का उच्चारण कर किया। भक्तों ने जलाभिषेक के साथ देवी को पुष्प, गुग्गल, लौंग के अर्पित कर मनौती मांगी। गांव के देवी मंदिरों में जमकर भक्तों की भीड़ रही। मटिया के माँ शीतला मंदिर पर भक्तों की खासी भीड़ रही। भक्तों को पूजा-अर्चना के लिए इंतजार में धूप में खड़ा होना पड़ा। देवी के विशेष शृृंगार के दर्शन के लिए देवी मंदिरों पर देर रात तक भक्तों का आना-जाना लगा रहा। 
   मंदिर की व्यवस्था में गांव के पंडित बोसेन्द्र पांडेय, तुकाराम साहू, होरीलाल पाटिल, तातू साहू, रामकुमार वर्मा, धनेश साहू, सनत पाटिल, तिहारु निषाद, राधे हरि पांडेय, दिलिप साहू, गवेन्द्र साहू, तेजराम विश्वकर्मा, पिंटू पाटिल, मानसिंह साहू, प्रभुलाल वर्मा सहित जय शीतला सेवा समिति मटिया के पदाधिकारी जुटे हुए हैं। 

शीतला अष्टमी पर मां को लगाया जाता है बासी भोजन का भोग 
हर माह की लगभग सभी तिथि किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। चैत्र माह में पड़ने वाली अष्टमी तिथि को अष्टमी तिथि के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां शीतला माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। शीतला अष्टमी के दिन मां को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है। इस दिन मां शीतला को मीठे चावल और बासी रोटी का भोग लगाते हैं। यह भोग एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि की शाम को ही बना लिया जाता है। जहां मीठे चावल, गुड़, चावल से बनते हैं या फिर गन्ने के रस या गुड़ से बनाए जाते हैं। 

अष्टमी पर 108 कन्या भोज गुरुवार को 
शीतला मंदिर मटिया में अष्टमी पर आज गुरुवार को 108 कन्या भोज जाएगा। कोसपातर-बारगांव में भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद माता के नौ रूपों को नौ प्रतीक स्वरूप भोग लगाने के उद्देश्य से नौ कन्या भोज का आयोजन होगा।