"नजर हटी, दुर्घटना घटी" यहां पर हैं सटीक
आमजन, राहगीर, क्षेत्रवासी कर रहे दिक्कत व परेशानी का सामना, अधिकारी अपने में मस्त
मरम्मत व देखरेख के अभाव में 40 लाख की लागत से हुए कार्य वाली सड़क हुई बदहाल
मामला बेरला के गुधेली से कण्डरका सड़क का, PMGSY विभाग से हुआ था निर्माण कार्य
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 26 जनवरी 2026 - प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बेरला ब्लॉक में निर्मित गुधेली से कण्डरका तक की सड़क इन दिनों विभागीय लापरवाही और उदासीनता की भेंट चढ़ गई है। दरअसल वर्ष 2018-19 में छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लगभग 40 लाख रुपये की लागत से बनी यह 3.55 किलोमीटर लंबी सड़क, अपनी 05 वर्ष की गारंटी अवधि समाप्त होने के पहले ही, अब राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
सड़क के मध्य पुल पर 10 फीट चौड़ा जानलेवा गड्ढा
ग्रामीण अंचल की सड़कों की बदहाली का आलम यह है कि इसके बीच में आने वाले नाले के पुल का स्लैब धँस व टूट गया है, जिससे सड़क के बीचो-बीच लगभग 10 फीट लंबा चौड़ा गड्ढा बन गया है, जो कि पुल पर होने से गहरा भी हैं। यह गड्ढा दिन को तो नजर भी आ जाए मगर रात के समय बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
"नजर हटी दुर्घटना घटी" वाक्य यहां पर बैठता है सटीक
विभागीय अधिकारियों की मेहरबानी के चलते बेरला क्षेत्र के गुधेली से कण्डरका का यह सड़क मार्ग क्षेत्रवासियों एवं राहगीरों के लिए समस्या व परेशानी का कारण बन चुका हैं। सड़क की जर्जर स्थिति के अलावा सड़क के मध्य पुल पर जानलेवा गड्ढा बड़ी दुर्घटना व हादसे को निमंत्रण दे रहा हैं। इस स्थिति को देखकर मशहूर वाक्य "नजर हटी, दुर्घटना घटी" बिल्कुल सटीक बैठता है।
सरकार की मंशा को चुना
जिलें के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा सरकार व शासन की मंशा व योजनाओं को चुना लगाया जा रहा हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के विकास एवं लोगों की सुविधा के लिए लाखों करोड़ों रुपए स्वीकृत करती हैं ताकि उसका लाभ क्षेत्रवासियों व आमजनो को मिल सके। मगर जिलें के विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों के द्वारा सरकार व शासन की इस मंशा को चकनाचूर कर चुना लगाया जा रहा हैं। स्वीकृत योजनाओं का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के लिए हैं मुख्य मार्ग
बेरला ब्लाक के गुधेली से कण्डरका का यह सड़क मार्ग आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों के लिए मुख्य मार्ग है। जिसमे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों द्वारा आवागमन किया जाता हैं। अब इस सड़क की खस्ता, जर्जर हालत के चलते क्षेत्र के लोगों को भारी समस्या व परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। जिससे इस जानलेवा गड्ढे ने आवागमन को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
निर्माण की गारंटी अवधि खत्म, मरम्मत के अभाव से सड़क की बिगड़ी दुदर्शा
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण एजेंसी की पाँच साल की गारंटी अवधि पूरी होने के बावजूद, विभागीय अफसरों ने सड़क के मरम्मत और पुनर्निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया। गारंटी अवधि समाप्त होने के बाद यह सड़क पूर्ण रूप से विभाग की जिम्मेदारी बन गई थी, लेकिन समय -समय पर निरीक्षण और मेंटेनेंस न होने के कारण 40 लाख की लागत वाली यह सड़क पूरी तरह से जीर्ण-शीर्ण हो गई है।
स्थानीय ग्रामीणों व राहगीरों द्वारा तत्काल मरम्मत की मांग
इस मामले में जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता व लापरवाही की पराकाष्ठा तो तब देखने को मिली, जब पुल के खतरनाक गड्ढे को स्थानीय राहगीरों के सुरक्षित आवागमन के लिए मरम्मत कराने के बजाय, विभाग द्वारा उस पर मात्र मिट्टी का घेरानुमा बनाकर कांटेदार झाड़ी और लकड़ियां रखकर संकेतक का रूप देकर अस्थायी समाधान करने का प्रयास किया गया। यह जोखिम भरा और गैर-जिम्मेदाराना उपाय स्पष्ट रूप से विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता और बड़ी लापरवाही को उजागर करता है, जिनका काम सड़क की स्थायी मरम्मत कराना था। फिलहाल स्थानीय लोगों ने सड़क की बदहाली और अधिकारियों की अनदेखी से आक्रोश में एकजुट होकर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर मरम्मत की मांग की है।
ग्रामीणों की चेतावनी - लोगों ने गुधेली-कण्डरका मार्ग के पुल का स्थायी पुनर्निर्माण कराने और सड़क की मरम्मत शीघ्र शुरू करने की अपील की है, ताकि किसी बड़े सड़क हादसे को समय रहते टाला जा सके। नहीं होने की स्थिति में ग्रामीणों द्वारा उग्र आंदोलन व प्रदर्शन करने की साफ एवं सीधी बात कही गई हैं। अगर इस प्रकार की स्थिति निर्मित होती हैं तो उसकी पूरी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।
"सड़क की स्थिति का पता कराता हूं। आवागमन के लिए उचित व हर संभव कार्य जल्द किया जाएगा। ----- मुकेश सागरकर, ईई पीएमजीएसवाय बेमेतरा"