यंत्रीकरण से कृषि कार्य समय पर पूर्ण होते हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि तथा अगली फसल के लिए समय पर उपलब्ध होता है खेत - प्राध्यापक एवं पी आई डॉ. वीरेन विक्टर
कृषि महाविद्यालय बेमेतरा में पशुपालन के मशीनीकरण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 17 दिसम्बर 2025 - रेवेंद्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र ढोलिया बेमेतरा में पशुपालन के मशीनीकरण विषय पर एक दिवसीय कृषि अभियांत्रिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप योजना (SCSP) के तहत प्रक्षेत्र यंत्र एवं शक्ति अभियांत्रिकी विभाग स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय तथा इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें जिले के 35 कृषकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. संदीप भंडारकर ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वीरेन विक्टर प्राध्यापक एवं परियोजना प्रधान अन्वेषक (पी.आई.), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर उपस्थित रहे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. भंडारकर ने कृषि यंत्रों के उपयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अमेरिका में कृषि यंत्रीकरण लगभग 90 प्रतिशत, ब्राजील में 75 प्रतिशत, चीन में 60 प्रतिशत तथा भारत में लगभग 47 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि भारत में गेहूं फसल में 69 प्रतिशत तथा धान में 53 प्रतिशत यंत्रीकरण अपनाया जा रहा है, वहीं देश में ट्रैक्टर का उपयोग सर्वाधिक हो रहा है।
मुख्य अतिथि डॉ. वीरेन विक्टर ने “कृषि यंत्र अपनाओ, ऊपज बढ़ाओ” की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि यंत्रीकरण से कृषि कार्य समय पर पूर्ण होते हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है तथा खेत अगली फसल के लिए समय पर उपलब्ध हो पाता है। उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी देते हुए उनके सही उपयोग के महत्व को समझाया।
प्रशिक्षण सत्र में डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने पशुचालित कृषि यंत्रों जैसे खुरपी, पड़लर, पलाऊ एवं सीड ड्रिल के उपयोग की जानकारी दी। वहीं डॉ. अखिलेश चंद्राकर ने पशुचालित यंत्रों से होने वाले लाभों पर प्रकाश डाला। डॉ. आशुतोष दुबे ने पशुपालन के मशीनीकरण के साथ-साथ पशुओं की समुचित देखभाल, उन्नत नस्ल प्रबंधन, पौष्टिक आहार, आवास व्यवस्था तथा स्वास्थ्य प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी देते हुए समय-समय पर टीकाकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. उमेश कुमार ध्रुव द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को सेरेट सिकल, हैंड हो, खुरपी सहित विभिन्न कृषि यंत्र तथा त्रिफाल ब्यासी, जुड़ा, बीम/दाड़ी जैसे पशुचालित कृषि यंत्र निःशुल्क वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए पशुपालन एवं कृषि यंत्रीकरण अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।