प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 19 नवंबर 2025 - महिला एवं बाल विकास विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा जारी निर्देशों के तहत बेमेतरा जिले में बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों की घोषणा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन के निर्देशानुसार, ऐसे ग्राम पंचायत एवं नगरीय क्षेत्र जहां पिछले दो वर्षों में एक भी बाल विवाह प्रकरण दर्ज नहीं हुआ, उन्हें “बाल विवाह मुक्त” घोषित किया जाना अनिवार्य है।
जिला बेमेतरा में कुल 425 ग्राम पंचायतों में से 417 ग्राम पंचायतों के द्वारा यह प्रमाणित किया गया है कि उनके क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में कोई बाल विवाह प्रकरण नहीं हुआ है। इसी प्रकार जिले के 11 नगरीय निकायों में से 8 नगरीय निकाय/नगर पंचायतों ने भी नियमानुसार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए बाल विवाह प्रकरणों के न होने की पुष्टि की है। इन सभी ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करते हुए प्रमाण पत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। यह प्रमाण पत्र बाल विवाह रोकथाम के क्षेत्र में समुदाय, पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला समूहों और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा।
आपत्तियाँ दर्ज करने हेतु 7 दिनों की समय-सीमा
यदि जिले के किसी भी नागरिक, संस्था या हितधारक को इस सूची के संबंध में कोई आपत्ति हो या किसी ग्राम पंचायत/नगर निकाय में बाल विवाह का कोई प्रकरण संज्ञान में हो, तो वे पत्र जारी होने की तिथि से 7 दिवस के भीतर संबंधित प्रमाणित दस्तावेजों के साथ अपनी आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग जिला बेमेतरा (छ.ग.) मे कार्यालयीन समय प्रातः 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक आवेदन जमा की जा सकेंगी।
बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत/नगर निकाय की ये घोषणा न केवल औपचारिक प्रक्रिया है, बल्कि यह जिले में जागरूकता, सामाजिक सहयोग और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सकारात्मक परिणाम भी है। सामाजिक संस्थाओं, महिला समूहों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ने बेमेतरा जिले को बाल विवाह रोकथाम में मजबूत स्थिति में स्थापित किया है। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या छिपाए गए तथ्य हों, तो उन्हें समय पर साझा करें, ताकि सूची को पूरी तरह सत्यापित एवं पारदर्शी बनाया जा सके।
जिला प्रशासन का यह प्रयास बाल संरक्षण और बाल अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में सराहनीय कदम है।