निर्माण के चन्द महीनों में टूटे व धँसे नहर, किसानों के लिए जी का जंजाल बनी महत्वकांक्षी परियोजना

तरकोरी गाँव मे तांदुला जल संसाधन दुर्ग के निर्माण कार्यों की खुली बड़ी पोल 

शासन की खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना बनी किसानों के लिए अभिशाप, सुविधा बनीं समस्या 

विभाग द्वारा मनरेगा से हुए निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार से ग्रामीण हुए लामबंद 
 
निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं, पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल, अधिकारी दे रहे गोलमोल जवाब 
बेमेतरा 29 अक्टूबर 2026 - बेमेतरा जिला व विधानसभा क्षेत्र के बेरला ब्लाक के ग्राम तरकोरी में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तांदुला जल संसाधन संभाग दुर्ग के अंतर्गत बनाई गई काडा संरचना युक्त छोटी नहर निर्माण में बड़ा खुलासा सामने आया है। जिसमे इन दिनों निर्माण कार्य पूरा होने के महज कुछ ही महीनों और बरसात गुजरने के बाद ही यह नहर कई जगहों पर टूटने और धंसने लगी है, जिससे यह पूरी परियोजना कागजों पर ही दम तोड़ती नजर आ रही है। स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण एजेंसी और विभाग पर मनमानी, भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं इस सम्बंध में स्थानीय ग्रामीण व किसान लामबंद होने लगे है।

खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना बनी अभिशाप 
ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह परियोजना तांदुला मुख्य नहर से सोढ़ की शाखा अर्थात ब्रांच नहर के माध्यम से होकर छोटी नहर के सहारे गांव में पानी मोड़ने और तरकोरी नाले के आसपास के खेतों को सिंचाई का लाभ देने के लिए लाई गई थी। लेकिन धरातल पर इसका प्रभाव बिल्कुल उल्टा दिखाई दे रहा है। नहर के कई हिस्सों में पानी जाम पड़ा हुआ है, तो वहीं घटिया निर्माण के कारण संरचना के टूटने और धंसने से पानी खेतों में अनियंत्रित होकर घुस रहा है, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। 
मुरम फिलिंग व अफसरों की मॉनिटरिंग न होने से गुणवत्ता खराब 
इस छोटी नहर निर्माण के दौरान मिट्टी की सही ढंग से फिलिंग नहीं की गई थी, जिसके कारण नहर की संरचना बेहद कमजोर हो गई। नतीजा यह है कि कुछ ही महीनों में नहर में जगह-जगह दरारें आ गई हैं और वीआरबी भी टूटने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार, इस पूरे निर्माण कार्य की लागत करीब 35 से 40 लाख रुपए के आसपास बताई जा रही है, जिसमें लगभग 8 लाख रुपए श्रमिकों का भुगतान और बाकी राशि सामग्री (मटेरियल) पर खर्च की गई है। 

निर्माण स्थल में सूचना बोर्ड गायब, पारदर्शिता पर सवाल 
चूँकि यह पूरा काम मनरेगा (अब वीबी जीरामजी) के तहत तांदुल दुर्ग डिवीजन की देखरेख में कराया गया है। हैरानी की बात यह है कि निर्माण स्थल के आसपास कहीं भी कोई सूचना पटल या प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी नहीं लगाई गई थी, जो इस पूरे कार्य की पारदर्शिता पर बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा करता है। बिना बोर्ड के कराए गए इस कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। 
सवालो पर पल्ला झाड़ने में जुटे जिम्मेदार जिम्मेदार 
इस पूरे मामले पर जब तांदुला जल संसाधन संभाग दुर्ग के अधिकारी आशुतोष सारस्वत से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, जब एसडीओ रोहन शॉ से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि यह पूरा नहर कार्य मनरेगा के तहत किया गया है, जिसकी मॉनिटरिंग उनके विभाग द्वारा की जा रही थी। 
हालांकि वे कार्य की कुल लागत की स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए और यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि यह कार्य अभी फिलहाल अधूरा है बरसात के बाद काम शुरू किया जाएगा और इसका भुगतान रोक दिया गया है। फलस्वरूप इस पूरे गम्भीर मामले में जिम्मेदारअधिकारियों के इस तरह के गोलमोल जवाब और जमीनी हकीकत पर पर्दा डालने के प्रयास विभाग की कार्यशैली और सक्रियता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। वही मनरेगा अधिकारी भूपेंद्र देवांगन ने इस कार्य के सम्बंध में ऑफिस में जानकारी देने की बात कही। 



By - Bemetara Halachal (बेमेतरा हलचल) प्रमोद गुप्ता - 8959681096, 9424124522 

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