प्री मेट्रिक आदर्श बालक छात्रावास दाढ़ी में नहीं हैं पहुंच मार्ग

नाम में जुड़ा आदर्श, लेकिन सुविधाएं सामान्य से भी बदहाल 
 
मुख्य सड़क के लेबल से नीचे में हैं पहुंच मार्ग, धँसी कच्ची सड़क से आवागमन को मजबूर छात्र 

आदिवासी विकास विभाग की निष्क्रियता चरम पर, असुविधाओं व समस्याओं के बीच संचालन 
बेमेतरा 27 अक्टूबर 2026 - जिले में इन दिनों आदिवासी विकास विभाग की घोर अनदेखी और निष्क्रियता का आलम साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि बेमेतरा जिले में अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी कम है, जबकि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की बहुलता है। इसके बावजूद आदिवासी विकास विभाग को मिलने वाले भारी-भरकम फंड का सही ढंग से उपयोग नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि विभाग के देखरेख में संचालित सरकारी हॉस्टलों में कई स्थानों पर मार्ग मुख्य सड़क से काफी फीट नीचे धंस चुके हैं, जिससे पक्की सड़क के आभाव में राहगीरों और ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

आदर्श छात्रावास दाढ़ी बेहाल 
नगर पंचायत दाढ़ी में संचालित आदर्श प्री मेट्रिक बालक छात्रावास का है, जहां पर मुख्य सड़क से हॉस्टल को जोड़ने के लिए आजतक एक पक्की सड़क नही बन पाया है, जो काफी चिंताजनक है। 
फंड की की उपलब्धता के बाद भी हॉस्टलो में अव्यवस्था का अंबार 
आश्चर्य का विषय है कि आदिवासी विकास विभाग के पास हर साल मूलभूत मद के अलावा विभिन्न विकास योजनाओं के तहत बजट आता है। इसके साथ ही जिला प्रशासन के पास डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड और स्थानीय पंचायत प्रशासन के पास भी हर वर्ष पर्याप्त विकास राशि आती है। इतने वित्तीय संसाधनों के बावजूद धरातल पर जिला के छात्रावासों (हॉस्टलों) का बुरा हाल है। कहीं छात्रों के लिए भवन का अभाव है, तो कहीं सीसी रोड तक नहीं बन पाया है। कई जगहों पर हॉस्टल की इमारतें जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। हर छात्रावास में किसी न किसी प्रकार की बुनियादी समस्या बनी हुई है, जो विभाग की कार्यशैली और सक्रियता पर बड़े सवालिया निशान खड़े करती है। 

कागजों में विकास, धरातल पर सुविधाओं का अकाल 
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष फंड का आवंटन तो कागजों पर पूरा दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। जब बजट और संसाधन उपलब्ध हैं, तो फिर छात्रावासों के जीर्णोद्धार और संपर्क मार्गों के समतलीकरण में देरी क्यों की जा रही है? अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र होने के बाद भी छात्रों और आम जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना प्रशासनिक लापरवाही और लचर प्रबंधन को दर्शाता है। 
जिम्मेदार ने बनाया बहाना 
इस पूरे मामले और विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवालों को लेकर जब आदिवासी विकास विभाग बेमेतरा के सहायक आयुक्त अभिषेक जायसवाल से चर्चा की गई और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनकी ओर से नेटवर्क समस्या होने के कारण स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। विभाग प्रमुख द्वारा स्पष्ट प्रतिक्रिया न दिए जाने के कारण उनका आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं हो पाया है, जिससे विभागीय अनदेखी पर संशय और गहरा गया है। 

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