तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ दुर्ग ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति समय कटौती/वसूली की समस्या के समाधान को लेकर शासन से की मांग
मांगो में - पारदर्शी वसूली नीति लागू, सेवानिवृत्ति से पूर्व अनिवार्य वेतन ऑडिट और वेतन निर्धारण में लापरवाही पर जवाबदेही तय करना
दर्द - वर्षों पुरानी प्रशासनिक त्रुटियों का खामियाजा सेवानिवृत्ति के समय भुगत रहे कर्मचारी
दुर्ग 17 अक्टूबर 2026 - छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ जिला शाखा दुर्ग द्वारा शासकीय कर्मचारियों से गलत या अधिक वेतन भुगतान (Wrongful/Excess Payment) के मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया लागू करने तथा सेवानिवृत्ति से पूर्व अनिवार्य वेतन ऑडिट कराने के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन का ध्यान आकर्षित किया गया है।
सेवानिवृत्ति के करीब पुराने वेतन निर्धारण का हवाला देकर वसूली की नोटिस के कारण अकारण विलंब
संघ के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने बताया कि विभिन्न शासकीय विभागों में वेतन निर्धारण, पदोन्नति, समयमान व क्रमोन्नत वेतनमान, पुनरीक्षित वेतनमान तथा अन्य भत्तों की गणना के दौरान प्रशासनिक या लिपिकीय त्रुटियों के कारण कर्मचारियों को वर्षों तक गलत अथवा अधिक वेतन का भुगतान होता रहता है।
दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तब बनती है, जब कोई कर्मचारी अपनी 30 से 35 वर्षों की निष्ठावान सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचता है। उस समय पुराने वेतन निर्धारण का हवाला देकर एकमुश्त भारी-भरकम राशि की वसूली का नोटिस थमा दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण (Leave Encashment) तथा अन्य स्वत्वों के भुगतान में अकारण विलंब होता है। जीवन के संध्याकाल में आर्थिक सुरक्षा मिलने के बजाय कर्मचारी और उसका परिवार गहरे मानसिक तनाव व आर्थिक संकट में डूब जाता है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय एवं केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का हवाला
जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा State of Punjab & Others vs. Rafiq Masih (White Washer), (2015) 4 SCC 334 प्रकरण में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय ने कतिपय परिस्थितियों में कर्मचारियों से अधिक भुगतान की वसूली पर रोक के स्पष्ट सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं।
इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के कार्यालय ज्ञापन (दिनांक 2 मार्च 2016 व 3 अक्टूबर 2022) एवं वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) के हालिया कार्यालय ज्ञापन (क्र. 09(01)/2026-E.II(A)(5270509), दिनांक 29 सितंबर 2026) का संदर्भ देते हुए संघ ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ शासन भी इन न्यायिक सिद्धांतों एवं केंद्रीय निर्देशों का परीक्षण कर राज्य के कर्मचारियों के हित में एक स्पष्ट, एकीकृत और पारदर्शी नीति जारी करे।
छत्तीसगढ़ शासन के समक्ष संघ की 4 प्रमुख माँगे
संघ ने छत्तीसगढ़ शासन से निम्नलिखित चार बिंदुओं पर तत्काल प्रभावी कार्यवाही की मांग की है, जो कि निम्न हैं :
1. सेवा पुस्तिका का वार्षिक सत्यापन एवं डिजिटल निगरानी - प्रत्येक शासकीय कर्मचारी की सेवा पुस्तिका का प्रतिवर्ष भौतिक (Physical) एवं डिजिटल सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। वार्षिक वेतन वृद्धि, पदोन्नति, समयमान/क्रमोन्नत वेतनमान की प्रविष्टियां निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों। ई-कोष (e-Kosh) एवं HRMS प्रणाली में स्वचालित (Automated) जांच व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे गलत वेतन निर्धारण का समय रहते पता चल सके और भविष्य में अवांछित वसूली की नौबत न आए।
2. सेवानिवृत्ति से दो वर्ष (24 माह) पूर्व अनिवार्य वेतन ऑडिट - कर्मचारी की सम्भावित सेवानिवृत्ति तिथि से 24 माह पूर्व उसके सेवा अभिलेखों, वेतन निर्धारण, पदोन्नति आदेशों व अन्य मामलों का विशेष आंतरिक ऑडिट कराया जाए। सेवानिवृत्ति से कम से कम 6 माह पूर्व वेतन संबंधी सभी आपत्तियों का निराकरण कर सत्यापित वेतन विवरण तथा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी किया जाए, ताकि अंतिम समय में पेंशन व सेवानिवृत्ति लाभों में कोई बाधा न आए।
3. नियमानुसार अनुचित वसूली से संरक्षण - सुप्रीम कोर्ट के 'रफीक मसीह' फैसले के अनुरूप तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्ति के निकट पहुंचे कर्मचारियों को राहत दी जाए। 5 वर्ष से अधिक पुरानी अवधि के भुगतान, प्रशासनिक त्रुटि से हुए अधिक भुगतान (जिसमें कर्मचारी का कोई छल या गलत बयानी न हो) का नियमानुसार पृथक-पृथक परीक्षण किया जाए। जहाँ वसूली विधिसम्मत एवं न्यायसंगत पाई जाए, वहाँ कर्मचारी की आर्थिक स्थिति को देखते हुए आसान किश्तों में वसूली की व्यवस्था की जाए।
4. लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध जवाबदेही तय हो - यदि जाँच में यह सिद्ध होता है कि गलत वेतन निर्धारण नियमों की अनदेखी के कारण हुआ है, तो उनके विरुद्ध सेवा नियमावली के तहत जवाबदेही तय की जाए। जहाँ कर्मचारी से वसूली विधिक रूप से प्रतिबंधित हो, वहाँ वित्तीय हानि के लिए जिम्मेदारो के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। प्रशासनिक गलती का खामियाजा निर्दोष कर्मचारी को आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना के रूप में न भुगतना पड़े।
मुख्य सचिव एवं उच्च अधिकारियों को प्रेषित किया गया ज्ञापन
संघ ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग (कर्मचारी कल्याण शाखा), वित्त विभाग तथा संचालक (कोष, लेखा एवं पेंशन) को प्रेषित विस्तृत ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि समस्त विभागों, विभागाध्यक्षों एवं कोषालय अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट व एकीकृत परिपत्र (Circular) जारी किये जाने अनुरोध किया है।
"समयबद्ध वेतन ऑडिट, डिजिटल मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय होने से राज्य के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी तथा सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को अनावश्यक मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलेगी। शासन इस कर्मचारी हितैषी विषय पर अतिशीघ्र सकारात्मक निर्णय ले।"
Bemetara Halachal (बेमेतरा हलचल), प्रमोद गुप्ता - 8959681096
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