परम तत्व शिव ही है - शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

सलधा के चतुर्मास अनुष्ठान महोत्सव में शंकराचार्य ने भैरव की उत्पत्ति और उनके आठ स्वरूपों का किया वर्णन 
बेमेतरा 26 अगस्त 2026 - जिलें के सलधा में आयोजित चातुर्मास अनुष्ठान महोत्सव में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महराज ने कहा कि जब अहंकार हटता है तो हमारा सच्चा स्वरूप आ जाता है। अगर हम अभिमान को त्याग दे तो हमें भगवान मिल जायेंगे। स्वामी ने कथा में बताया कि एक बार परम तत्व कौन इसको ले कर ब्रम्ह और विष्णु में मतभेद हो गए। चारों वेदों से पूछा गया वहां परम तत्व, रुद्र, शिव और त्र्यंबक को बताया ये सभी भगवान शिव ही थे। इनसे दोनों सहमत नहीं हुए तो आकाशवाणी हुई वहाँ से ज्योति प्रकट हुई इस ज्योति में भगवान शिव थे। यह देख ब्रम्हा ने भगवान शिव का अपमान कर गए। यह सुन शिव को क्रोध उत्पन्न हो गया। जहां से एक पुरुष प्रकट हुए जो भैरव थे, शिव ने भैरव को काशी का अधिपति बना दिया, भैरव ने भगवान शिव की आज्ञा से ब्रम्हा का पंचमखों में से एक मुख जिस मुख से अपमान किया था उसे अपने नाखून से काट दिया। भैरव भीषण रूप देख भगवान विष्णु और ब्रम्हाजी आराधना शुरू कर दी भगवान का क्रोध समाप्त हो गया। विष्णुजी और ब्रम्हाजी का अहंकार नष्ट हो गया अहंकार जाते ही उन्होंने परम तत्व शिव का ज्ञान हो गया। कथा में स्वामी जी ने भैरव की उत्पत्ति और उनके आठ स्वरूपों का वर्णन किया ये सभी काशी में है। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ