11 माह की समय सीमा में भी पूर्ण नहीं हो पाई 17 करोड़ की सड़क निर्माण कार्य

मामला - गडुवा-खैरझिटीकला-नवागांवकला मार्ग का, जिसमें अपूर्ण व गुणवत्ताहीन कार्य, अवैध खनन, लापवाही, भ्रष्टाचार शामिल 

फिर समय सीमा निर्धारण व समीक्षा बैठकों की औचित्य क्या 
 
17 करोड़, 14 किमी, 11 माह में सड़क बनाने में pwd विभाग व ठेकेदार ने बरती लापरवाही, कार्य में गुणवत्ताहीनता व भ्रष्टाचार भी 

29 जुलाई को हुई समय सीमा समाप्त, अधूरे निर्माण व बरसात में बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी 

जिम्मेदारी किसकी - ऐसी लापरवाही के लिए विभाग, अधिकारी, ठेकेदार कौन जिम्मेदार, क्या होंगी कार्यवाही या खानापूर्ति 
बेमेतरा 11 अगस्त 2026 - सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और विकास के बड़े-बड़े दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। जिसका बेमेतरा जिलें के थान खम्हरिया तहसील क्षेत्र के गडुवा-खैरझिटीकला-नवागांवकला मार्ग का जीता-जागता उदाहरण है। जो 14 किमी लंबी सड़क निर्माण कार्य के लिए शासन ने 17 करोड़ रुपए की राशि की स्वीकृति प्रदान किया हैं, वहीं इस सड़क मार्ग के निर्माण के लिए 11 माह का समय सीमा निर्धारित किया था। मगर इतनी बड़ी लागत से बनने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क का काम 11 माह बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है। 

विभाग व ठेकेदार की लापरवाही 
इस सड़क मार्ग के अधूरे निर्माण में लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार की लापरवाही के चलते यह सड़क तय समय सीमा में पूर्ण नहीं हो पाया। निविदा शर्तो के मुताबिक 29 जुलाई को तय समय सीमा भी निकल गई। अब बरसात में कीचड़ और गड्ढों ने ग्रामीणों को आवागमन मे बाधा पहूंचा रही है। 17 करोड़ की योजना पर आज हाल कच्चे रास्ते जैसा ही है।

मुख्य मार्ग के साथ दर्जनों ग्रामों की कनेक्टिविटी 
बेमेतरा मार्ग से दुर्ग राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे खैरझिटीकला, नवागांवकला, ठर्रकपुर, कांपा, जेवरा, मटिया, टिपनी, गोपालपुर, खाती, पतोरा, सौरी सहित दो दर्जन से भी अधिक गांवों को सीधी कनेक्टिविटी मिलनी थी। साथ ही बेमेतरा से दुर्ग की दूरी भी कम हो जाती हैं। लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क के लिए 17 करोड़ रुपए स्वीकृत किए। टेंडर प्रक्रिया के बाद दुर्ग की सुराना एंड कंपनी को 20% कम SOR दर पर कार्य सौंपा गया। 

कागज व हकीकत में जमीन आसमान का अंतर  
अनुबंध में स्पष्ट था कि काम गुणवत्तापूर्ण और समय पर पूरा होगा। लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। सूत्रों के अनुसार कंपनी ने निविदा की शर्तों को तांक पर रखकर काम किया। निर्माण सामग्री एवं गुणवत्ता को पूरी तरह दरकिनार किया गया हैं। कई जगह मिट्टी भराई अधूरी है, गिट्टी का स्तर सही नहीं है, अभी तक केवल बेस लैबल ही कार्य किया गया है। विभाग द्वारा जारी नोटिसों को भी कंपनी ने गंभीरता से नहीं लिया। 

अधूरे निर्माण से सभी को समस्या व परेशानी 
गौरतलब है कि गडुवा-खैरझिटीकला-नवागांवकला मार्ग निर्माण की समय सीमा 29 जुलाई को समाप्त हो चुकी है, लेकिन मौके पर काम ठप पड़ा है। ऊपर से मानसून ने मुसीबत दोगुनी कर दी। पूरे 14 किमी मार्ग पर मिट्टी, कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों छात्र, किसान, मजदूर और मरीज गुजरते हैं। लेकिन अब दोपहिया वाहन चलाने में दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा हैं। 

सड़क निर्माण में अवैध खनन कर डाली गयी मुरूम, मिट्टी 
आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने निर्धारित 11 माह मे 14 किमी की लम्बी सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया है। सड़क की चौड़ाई तय मापदंड से कम रखी गई। नाली और पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे बरसात का पानी सीधे सड़क पर भर रहा है। यहां ठेकेदार द्वारा ग्राम पंचायत नवागांवकला के गौचर जमीन का अवैध खनन कर कत्तल मिट्टी का निर्माण कार्यो पर उपयोग किया गया, यह सब कुछ खनिज विभाग के सह पर हुआ है। 

विकल्प - अतिरिक्त समय या निविदा निरस्त 
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भी मौके पर कई बार निरीक्षण किया, परंतु कंपनी विरूद्ध नतीजा शून्य रहा। अब विभाग के सामने दो ही विकल्प बचे हैं या तो निर्माण एजेंसी को अतिरिक्त समय दिया जाए या निविदा निरस्त कर रिटेंडर की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इधर अवैध रूप से खनन के बाद कंपनी विभाग को फर्जी रायल्टी बील भी थमा रही है और विभाग जानबूझकर स्वीकार भी कर रही है। 
सड़क नहीं बनने से जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों में आक्रोश 
इस लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि ने कहा कि सरकार ने 17 करोड़ की राशि दी, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं दिख रहा, अब बरसात खत्म होने के बाद ही कार्य प्रारंभ हो सकेगी, ऐसे में क्षेत्रवासीयो को 2027 में ही सुविधा मिल पायगी। हम टैक्स देते हैं, वोट देते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। अधिकारी और ठेकेदार मिलकर जनता के पैसे से खिलवाड़ कर रहे हैं। 

विकास पर अब बड़ा सवाल 
यह मामला केवल एक सड़क का नहीं है। यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। लोक निर्माण विभाग के उप-अभियंता किस बिना पर समय निर्धारित करते है जो कोई काम समय पर पूरी नही होती। जब 17 करोड़ जैसी बड़ी राशि स्वीकृत होने के बाद भी 14 किमी सड़क 11 महीने में नहीं बन पाती, तो विकास की गति पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। 

एक्सपर्ट व्यू 
विशेषज्ञों का मानना है कि कार्य की नियमित मॉनिटरिंग, गुणवत्ता जांच और समय पर भुगतान जैसी प्रक्रियाओं में खामी के कारण ऐसी स्थिति बनती है। ठेकेदार को बिना डर के काम लटकाने की छूट मिल जाती है। 

     कार्य की समय अवधि खत्म हो गई हैं, जिसके लिए ठेकेदार को पेनाल्टी लगेंगी। बरसात के बाद जल्द पूर्ण कराने की कोशिश की जाएगी। 
---- सागर साहू, एसडीओ पीडब्ल्यूडी साजा 

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