करोड़ों की नई चमचमाती सड़क पर 52 साल पुराना 'खतरा'
PWD के इंजीनियरों का 'अनोखा कमाल', ऐसे अधूरे प्रोजेक्ट का क्या औचित्य
मामला - pwd द्वारा निर्माणरत 'बेमेतरा से मुंगेली' नई सड़क निर्माण कार्य का, जहां विभाग ने नए सड़क के स्टीमेट में भुला दिया हाफ नदी पुल का निर्माण
कैबिनेट मंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र में pwd विभाग की ऐसी लापरवाही, उदासीनता हैं आश्चर्य व अजूबा
बेमेतरा 07 जुलाई 2026 - जिलें के सबसे बड़े सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में लोक निर्माण विभाग (PWD) की एक बड़ी लापरवाही और उदासीनता सामने आई है। विभाग के इंजीनियरों और अधिकारियों की 'दूरदर्शिता' का ऐसा नमूना देखने को मिला है, जहाँ जिला मुख्यालय से शुरू होने वाले 116 करोड़ रुपए की लागत से एक शानदार नई सड़क तो बनाई जा रही है, लेकिन उस पर सफर करने वाले राहगीरों को 52 साल पुराने जर्जर पुल के भरोसे छोड़ दिया गया है। ऐसे में नई सड़क निर्माण कार्य के करोड़ों के प्रोजेक्ट का क्या औचित्य जब उसमें समस्या ही ज्यों की त्यों बनी रहेंगी।
इसमें सबसे खास बात यह हैं कि यह सड़क मार्ग एक जिलें से दूसरे जिलें को जोड़ रहीं हैं और सबसे खास बात यह भी हैं कि यह सड़क छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री दयाल दास बघेल का गृह विधानसभा क्षेत्र का हैं। जहां पर इंजीनियरों व अधिकारियों की ऐसी अनदेखी काबिलेतारिफ व उनके हिम्मत को दाद देने वाली बात हैं जो या तो मंत्री को एकदम हल्के में ले रहें हैं या फिर मंत्री को अपने आगे कुछ समझते ही नहीं। उन्होंने मंत्री एवं पुल दोनों को दरकिनार कर इस सड़क मार्ग निर्माण का प्रोजेक्ट बनाया।
केंद्रीय निधि से 116 करोड़ रु मंजूर, पर पुल 'राम भरोसे'
लोक निर्माण विभाग (PWD) बेमेतरा के अंतर्गत जिला मुख्यालय बेमेतरा से मुंगेली के बीच 43 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का कार्य चल रहा है। इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय सड़क निधि (CRF) मद से 116 करोड़ रुपए की भारी राशि स्वीकृत की गई है। सड़क तो आधुनिक तकनीकों से चकाचक हो रही है, लेकिन इस पूरे मार्ग का सबसे मुख्य हिस्सा यानी 'हाफ नदी का पुल' आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इसका मुख्य कारण pwd विभाग के उन महान इंजीनियरों का कमाल हैं जिन्होंने नई सड़क निर्माण कार्य के प्रोजेक्ट में इस मुख्य पुल को शामिल करने की कोई औचित्य नहीं समझा।
मध्य प्रदेश शासन काल का है यह 5.4 लाख का पुल
जिला मुख्यालय बेमेतरा से नवागढ़ सड़क मार्ग पर ग्राम अंधियारखोर और पड़कीडीह के बीच स्थित हाफ नदी पर बना यह 300 फीट लंबा पुल इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। जो कि लगभग 52 साल का लंबा सफर तय कर लोगों को अपनी क्षमता से ज्यादा की सुविधा दे चुका हैं और दे रहा हैं।
निर्माण काल : बेमेतरा से मुंगेली सड़क मार्ग पर हाफ नदी पर स्थित पुल का निर्माण अविभाजित मध्य प्रदेश शासन काल में वर्ष 1971 से 1974 के बीच हुआ हैं।
मूल लागत : तत्कालीन समय में लोनिवि (सेतु निर्माण) द्वारा मात्र 5.40 लाख रुपए की लागत से इसका निर्माण कराया गया था। इतनी कम लागत राशि में निर्माण के बाद भी इसकी मजबूती की जितनी सराहना की जाए कम होंगी। क्योंकि निर्माण के बाद इस पुल ने लगभग 50-52 साल का लंबा सफर तय कर लिया हैं।
वर्तमान स्थिति : लगभग 52 वर्ष पुराना यह पुल अपनी समय सीमा (Life Span) पूरी कर चुका है और पूरी तरह जर्जर हो चुका है। जानकारों के मुताबिक, आज की तारीख में यदि इस पुल का नया निर्माण कराया जाए, तो इसमें कई करोड़ रुपए का खर्च आएगा।
जनता में आक्रोश : "करोड़ों की सड़क का क्या फायदा, जब पुल ही सुरक्षित नहीं?"
इस बड़े प्रोजेक्ट में सेतु निर्माण विभाग और लोक निर्माण विभाग के बीच तालमेल की कमी साफ उजागर हो रही है। ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि जब 116 करोड़ रुपए जैसी भारी-भरकम राशि सड़क चौड़ीकरण के लिए आ सकती है, तो इस जर्जर और संकरे पुल को इस योजना से बाहर क्यों रखा गया?
बड़ा सवाल : भारी वाहनों के दबाव और नई सड़क की रफ्तार के बीच क्या यह 52 साल पुराना और कमजोर हो चुका पुल हादसों को आमंत्रण नहीं दे रहा है? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
विभागीय उदासीनता का यह आलम तब है जब यह जिला मुख्यालय को जोड़ने वाला सबसे मुख्य मार्ग है।
अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद क्या शासन-प्रशासन की नींद टूटती है या राहगीर यूँ ही इस 55 साल पुराने 'टाइम बम' पर सफर करने को मजबूर रहेंगे।
पुल निर्माण के संबंध में सेतु निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता सीके पांडेय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, मगर उनसे संपर्क नहीं हो पाया, जिससे उनका पक्ष नहीं मिल पाया।
हमारा कार्य सड़क निर्माण का हैं। पुल निर्माण कार्य के लिए हमारी ही अलग शाखा हैं, जिनके द्वारा पुल निर्माण कार्य देखा जाता हैं। सड़क निर्माण के स्टीमेट में पुल निर्माण नहीं हैं, उसकी जानकारी सेतु निर्माण शाखा दे सकते हैं।
------ डीके चंदेल, ईई, पीडब्ल्यूडी बेमेतरा
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