सर्पदंश - झाड़-फूंक नहीं, अस्पताल पहुंचें, समय पर इलाज से बचती है जान

वर्षा ऋतु में सर्पदंश से सतर्क रहें : स्वास्थ्य विभाग बेमेतरा 

स्वास्थ्य विभाग बेमेतरा ने सर्पदंश पर एडवाइजरी जारी कर नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने के साथ कारण, लक्षण, बचाव, ईलाज, सावधानी बताया 
बेमेतरा 03 जुलाई 2026 - स्वास्थ्य विभाग जिला बेमेतरा वर्षा ऋतु के आगमन के साथ सर्पदंश की घटनाओं की आशंका बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग जिला बेमेतरा ने नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने एवं सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है। 
     स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि सर्पदंश एक चिकित्सा आपातकाल है। समय पर वैज्ञानिक उपचार मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। जिले के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी स्नेक वेनम (ASV), प्रशिक्षित चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। गंभीर मरीजों को उच्च संस्थान रेफर करने की व्यवस्था भी है। 

वर्षा में सर्पदंश का खतरा क्यों बढ़ता है :
1. बिलों में पानी भरने से सांप खेत, घर, गोठान, भूसे-लकड़ी के ढेर व बस्तियों की ओर आते हैं। 
2. धान रोपाई व कृषि कार्य के दौरान संपर्क बढ़ता है। 
3. रात्रि में बिना टॉर्च चलना व चूहों की संख्या बढ़ना भी कारण है। 

बचाव के लिए सावधानियां -
घर एवं आसपास : घर के आसपास सफाई रखें। झाड़ियां-घास हटाएं। लकड़ी, ईंट, भूसे का ढेर घर से दूर रखें। चूहे नियंत्रित करें। दरवाजे-खिड़कियों की दरारें बंद करें। 
खेत में : गमबूट, मोटे कपड़े व दस्ताने पहनें। घास, लकड़ी उठाने से पहले डंडे से जांचें। झाड़ियों में बिना देखे हाथ न डालें। 
रात में : टॉर्च लेकर चलें। नंगे पैर न निकलें। बच्चों को अंधेरे में अकेला न भेजें। फर्श पर सोने से बचें, मच्छरदानी लगाएं। 
सर्पदंश पर तुरंत करें :  
1. घबराएं नहीं, मरीज को शांत रखें और चलने-फिरने से रोकें। 
2. काटे गए अंग को हृदय से नीचे व स्थिर रखें। 
3. तुरंत 108 एम्बुलेंस या वाहन से निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचाएं। 
4. यदि संभव हो तो सांप का रंग-आकार याद रखें, पकड़ने/मारने का प्रयास न करें। 

यह बिल्कुल न करें : 
झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें। काटे स्थान को ब्लेड से न काटें, जहर चूसने का प्रयास न करें। बहुत कसकर रस्सी न बांधें। मिट्टी, हल्दी, गोबर, तेल या रसायन न लगाएं। शराब/नशा न दें। 

सर्पदंश के सामान्य लक्षण : काटे स्थान पर दर्द-सूजन, दो दांतों के निशान, पलकों का झुकना, बोलने-निगलने में कठिनाई, सांस लेने में परेशानी, उल्टी, चक्कर, कमजोरी, रक्तस्राव या बेहोशी। 

स्वास्थ्य विभाग अपील : 
"अंधविश्वास छोड़ें, वैज्ञानिक उपचार अपनाएं। सर्पदंश का प्रभावी इलाज केवल अस्पताल में उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम से ही संभव है। झाड़-फूंक में बर्बाद समय मरीज की जान ले सकता है।" 

      जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायतों, जन प्रतिनिधियों, मितानिन, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्कूलों व सामाजिक संगठनों से जन-जागरूकता फैलाने का आग्रह किया है।  

जिला प्रशासन का संदेश :  सतर्क रहें - सुरक्षित रहें 
सर्पदंश की स्थिति में घबराएं नहीं, झाड़-फूंक में समय न गंवाएं, तत्काल निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचें। समय पर उपचार ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। 

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