विभाग के अधिकारियों की कार्यों में गुणवत्ता व ईमानदारी की बातें लगी हवाहवाई, गुणवत्ता व कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
दो धार्मिक स्थानों सालधा व संडी का मुख्य मार्ग होने के कारण रहता हैं यातायात का ज्यादा दबाव
करोड़ों की स्वीकृति के बाद भी आमजन को नहीं मिल रही सुविधा व लाभ, सरकार की छवि और 'गुड गवर्नेंस' को किया जा रहा धूमिल
बेमेतरा 18 जुलाई 2026 - सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' और लोक निर्माण सेतु विभाग दुर्ग के दावों की जमीनी हकीकत बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के ग्राम सलधा व संडी के मध्य बने उच्च स्तरीय पुल पर साफ नजर आने लगी है। करीब 6.14 करोड़ रुपये की लागत से बने इस उच्च स्तरीय पुल की एप्रोच सड़क (Approach Road) पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं, साथ ही सड़क धंसने भी लगी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पुल अभी गारंटी पीरियड (Guaranty Period) में ही है।
प्रश्नचिह्न - इस घटना ने विभाग के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, मजबूती और विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
दो धार्मिक स्थानों सलधा व संडी का मुख्य मार्ग के कारण रहता हैं यातायात का दबाव
ज्ञात हो कि यह उच्च स्तरीय पुल दो धार्मिक स्थानों सलधा व संडी का मुख्य मार्ग हैं। सलधा में सपाद लक्षेश्वर धाम हैं, जहां विशाल शिव मंदिर हैं, जहां सवा लाख शिवलिंग की स्थापना की जा रही हैं। वहीं संडी में सिद्धी माता का प्रसिद्ध मंदिर हैं। वह दोनों प्रसिद्ध स्थानों के होने के कारण इस मार्ग पर यातायात का ज्यादा दबाव बना रहता हैं, लोग इसी पुल पर आनाजाना कर यहां पर आते जाते हैं।
तय समय से एक साल लेट, फिर भी काम 'अपडेट' नहीं
विभागीय सुस्ती और लापरवाही का आलम यह है कि इस उच्च स्तरीय पुल के निर्माण कार्य को 17 मार्च 2023 तक पूरा होना था। लेकिन यह परियोजना अपनी समय सीमा से एक वर्ष की देरी से पूरी हुई। जनता को उम्मीद थी कि देर से ही सही, लेकिन एक मजबूत और सुरक्षित पुल मिलेगा। मगर, उद्घाटन के कुछ समय बाद ही एप्रोच सड़क का फटना अधिकारियों की ईमानदारी और दावों की पोल खोल रहा है।
सरकार की छवि और 'गुड गवर्नेंस' को बट्टा
एक तरफ सरकार प्रदेश में बेहतर बुनियादी ढांचे, आमजन की सुविधाओं और सुशासन (Good Governance) का दम भर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर बैठे कुछ लापरवाह अधिकारी सरकार की मंशा को पलीता लगाने में जुटे हैं। गारंटी पीरियड में ही सड़क का इस तरह बैठ जाना और दरारें आना यह साबित करता है कि निर्माण कार्य में मानकों की जमकर अनदेखी की गई है।
बड़ा सवाल : जब करोड़ों की लागत से बने पुलों का गारंटी पीरियड में ही यह हाल है, तो आने वाले समय में यह पुल आम जनता के लिए कितना सुरक्षित रहेगा?
मुख्य बिंदु : क्या हैं जनता के सवाल?
ईमानदारी पर सवाल : विभाग के अधिकारी अक्सर निर्माण कार्यों में जिस 'क्वालिटी और ईमानदारी' की बात करते हैं, उसकी सच्चाई अब जनता के सामने है।
अधिकारियों की भूमिका : सरकार की छवि धूमिल करने वाले इन जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
सुरक्षा का खतरा : एप्रोच सड़क में आई दरारें व सड़क के धंसने से किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रही हैं। क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
अब आगे क्या होगी कार्रवाई?
सलधा संडी पुल की यह बदहाली अब सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। जनता अब सीधे तौर पर जवाब मांग रही है। देखना यह होगा कि इस वित्तीय गड़बड़ी और घटिया निर्माण को लेकर शासन स्तर पर क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं और दोषी इंजीनियरों व ठेकेदारों पर गाज गिरती है या नहीं।
अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी, जांच से कतरा रहा विभाग
हैरानी की बात यह है कि सेतु संभाग दुर्ग के जिम्मेदार इंजीनियर, एसडीओ, कार्यपालन अभियंता और अधीक्षण अभियंता में से किसी ने भी इस बदहाल ब्रिज का सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों का इस ओर ध्यान न देना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आम जनता के बीच यह चर्चा आम है कि ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए जानबूझकर गुणवत्ताहीन निर्माण को हरी झंडी दी गई और अब अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे है।
मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती
विभाग ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। धंसे हुए हिस्सों पर डामरीकरण या कंक्रीट की मजबूत लेयर चढ़ाने के बजाय सिर्फ जीरा गिट्टी और मुरुम डाल दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी पक्के ब्रिज के बीचों-बीच इस तरह मुरुम डालकर गड्ढे भरते नहीं देखा। यह मरम्मत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की घटिया कोशिश है।
क्षेत्रवासियों व ग्रामीणों की मांग
दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व इंजीनियरों पर सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदार का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
इस संबंध में लोक निर्माण सेतु विभाग के कवर्धा सब डिविजन के एसडीओ बीडी शेंडे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, मगर नहीं हो पाया, जिससे उनका पक्ष नहीं मिल सका।
सलधा-संडी पुल निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसके बावजूद विभाग कोई ध्यान नहीं देता। यदि सही काम हुआ होता तो जगह-जगह दरारें और सड़क धंसती नही। विभाग को तुरंत जांच कर दोषी ठेकेदार का लाइसेंस रद्द करना चाहिए।
----- रविन्द्र भास्कर चौबे, स्थानीय जनसेवक
इसकी सूचना मिली थी, निरीक्षण किया गया हैं। पुल अभी गारंटी परेड में हैं, ठेकेदार को बोलकर रिपेयरिंग कराया जाएगा।
---- एलके सिंहा, सब इंजीनियर, लोक निर्माण सेतु विभाग
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