बेमेतरा-मुंगेली सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हजारों हरे-भरे पेड़ों की 'बलि'

पर्यावरण की क्षति की भरपाई का प्रशासन के पास नहीं हैं कोई कार्य योजना 

विकास की अंधी दौड़ : नियमों को ताक पर रखकर पीडब्ल्यूडी भी बना विनाश में भागीदार 

बेमेतरा मुंगेली सड़क मार्ग निर्माण में 3123 पेड़ों की कटाई का रिकॉर्ड, इसमें पीडब्ल्यूडी, राजस्व व वन विभाग की साझेदारी 

पर्यावरण संरक्षण की बातें करने वाले ही इसके प्रति दिखे उदासीन, योजना व उद्देश्य को लगा रहें पलीता 
बेमेतरा 17 जून 2026 - एक तरफ जहां देश और प्रदेश में 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे बड़े अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का ढोल पीटा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शासकीय कार्यों की आड़ में पर्यावरण का गला घोंटने का एक बड़ा मामला सामने आया है। 
   जिलें में बेमेतरा से मुंगेली के बीच चल रहे सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्य की आड़ में हजारों हरे-भरे पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर 'बलि' दे दी गई है। सड़क किनारे बचे पेड़ों के ठूंठ अब चिल्ला-चिल्लाकर इस विनाश की गवाही दे रहे हैं। 

126 करोड़ का प्रोजेक्ट, पर्यावरण को अरबों का नुकसान 
केंद्रीय सड़क निधि (CRF) मद से स्वीकृत 126 करोड़ रुपए की भारी लागत से बेमेतरा-मुंगेली के बीच 43 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य प्रगति पर है। विकास का यह रास्ता लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही और मनमानी के कारण पर्यावरण के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है। 

विनाश कार्य में शामिल हैं विभागें 
बेमेतरा मुंगेली सड़क मार्ग निर्माण कार्य में पेड़ों की कटाई के कार्य में पीडब्ल्यूडी, राजस्व व वन विभागों की भागीदारी हैं। इन विभागों के सयुक्त कार्य में इस पेड़ों की कटाई का कार्य किया गया है। पेड़ों की कटाई कार्य की जानकारी के लिए एक दूसरे पर बातें को टाला जा रहा हैं। जिसके कारण गड़बड़ी की आशंका से मुकरा नहीं जा सकता। 

कटाई में आम व खास सभी एक 
काटे गए पेड़ों में आम से लेकर खास, हर प्रजाति के पेड़ शामिल थे, जो दशकों से राहगीरों को छांव और क्षेत्र को ऑक्सीजन दे रहे थे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इस तरह की अंधाधुंध कटाई ने पूरे इलाके व मार्ग को पर्यावरण विहीन में तब्दील कर दिया है। 
पीडब्ल्यूडी ने ताक पर रखे नियम, बड़ी गड़बड़ी की आशंका 
सूत्रों की मानें तो इस पूरी कटाई प्रक्रिया में पीडब्ल्यूडी ने स्थापित सरकारी नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया है। जानकारों का कहना है कि यदि निम्नलिखित बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच की जाए, तो एक बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है :
पेड़ों की वास्तविक संख्या : कागजों में जितने पेड़ दिखाए गए हैं, जमीन पर उससे कहीं ज्यादा काटे गए हैं। 
कटाई की मात्रा और भंडारण में खेला 
कटे हुए पेड़ों की लकड़ी की मात्रा और उसके भंडारण (Depot) के हिसाब में भारी हेरफेर की आशंका है। पूरे सड़क मार्ग का अवलोकन करने पर पेड़ों की कटाई के पूर्व और बाद की स्थिति देखकर स्वतः ही अनुमान लगाया जा सकता हैं कि कितने पेड़ों की कटाई की गई होंगी। यदि इसका मिलान किया जाए, तो हकीकत की पोल खुल जाएगी। 
शासकीय कार्य के नाम पर मनमानी 
ठेकेदार और अधिकारियों की जुगलबंदी ने शासकीय कार्य का बहाना बनाकर नियमों की धज्जियां उड़ा दी हैं। वहीं पेड़ो की कटाई के संबंध में शामिल विभागो (pwd, राजस्व, वन) द्वारा जानकारी देने में एक दूसरे के ऊपर ठिकरा फोड़ा जा रहा हैं। 

भरपाई की कोई योजना नहीं, खोखले साबित हो रहे सरकारी दावे 
सबसे चौंकाने वाली और चिंताजनक बात यह है कि इस भारी तबाही के बाद हजारों पेड़ों की कटाई की भरपाई (Compensatory Afforestation) के लिए विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं है। एक तरफ आम जनता से पौधा लगाने की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की नाक के नीचे चल रहे इस प्रोजेक्ट ने पर्यावरण को ऐसा जख्म दिया है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं दिखती। क्या सरकार व प्रशासन का यहीं हैं पर्यावरण संरक्षण की बातें। 
बड़ा सवाल : क्या विकास की कीमत सिर्फ पर्यावरण को उजाड़कर ही चुकाई जा सकती है? आखिर नियमों को दरकिनार करने वाले पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी? 

इस मामले में अब देखना यह होगा कि पर्यावरण विभाग और उच्च अधिकारी इस मनमानी का संज्ञान लेते हैं या कागजी विकास के नीचे इस विनाश की कहानी को दबा दिया जाएगा। 

     पेड़ो की कटाई संबंधी समस्त जानकारी वन विभाग के द्वारा दी जाएगी, क्योंकि पेड़ों की कटाई का कार्य उनके द्वारा ही किया गया हैं। इस संबंध में हमारे पास कोई जानकारी नहीं हैं।    
---- डीके चंदेल, ईई, पीडब्ल्यूडी बेमेतरा 

      बेमेतरा मुंगेली सड़क मार्ग निर्माण में आने वाले पेड़ों का पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा मार्किंग कर दिया गया था, जिसके बाद वन विभाग द्वारा कटाई का कार्य किया गया। इस मार्ग पर कुल 3123 पेड़ों की कटाई की गई है। वृक्षारोपण की कार्य योजना अभी तक नहीं बनाई है। 
----- राम पटेल, रेंजर, वन विभाग बेमेतरा