बेमेतरा जिला में 15 जून से सघन कुष्ठ खोज अभियान

कलेक्टर के निर्देशन में घर-घर सर्वे करेगी स्वास्थ्य टीम, अभियान एक माह का 

कुष्ठ उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम : कुष्ठ के छिपे हुए रोगियों की पहचान कर विकलांगता रोकना लक्ष्य 
बेमेतरा 12 जून 2026 - राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के तहत जिला बेमेतरा में 15 जून से 15 जुलाई 2026 तक सघन कुष्ठ खोज अभियान (Leprosy Case Detection Campaign - LCDC) चलाया जाएगा। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देशन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल रोहलेडर के मार्गदर्शन तथा जिला नोडल अधिकारी (NLEP) डॉ. बीएल राज के सतत पर्यवेक्षण में यह अभियान संचालित होगा। 

अभियान का उद्देश्य 
जिले को कुष्ठ मुक्त बनाने के लिए समुदाय स्तर पर छिपे हुए कुष्ठ रोगियों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान करना इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। समय पर पहचान एवं MDT से पूर्ण उपचार शुरू कर रोग के प्रसार को रोका जा सकता है तथा Grade-2 विकलांगता की दर को शून्य तक लाया जा सकता है। वर्तमान में जिले का प्रीवेलेन्स रेट 1 लाख आबादी पर <1 लाने का लक्ष्य है। 

अभियान की रणनीति एवं कार्ययोजना 
* जिले के सभी 4 विकासखण्डों - बेमेतरा, बेरला, नवागढ़, साजा के 100% ग्रामीण क्षेत्रों एवं सभी नगरीय निकायों के वार्डों में घर-घर सर्वे किया जाएगा। 
इस अभियान के लिए दल गठित किए गए हैं। जिसमें ANM, MPW, CHO, मितानिन व आशा कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है। 
* टीम घर-घर जाकर परिवार के प्रत्येक सदस्य की स्क्रीनिंग करेगी। संदिग्ध व्यक्ति मिलने पर मौके पर ही मेडिकल ऑफिसर से जांच कराई जाएगी। पुष्टि होने पर उसी दिन से निःशुल्क MDT उपचार शुरू कर दिया जाएगा। 
* इस अभियान मे दल का सुपरवाइजर तथा ब्लॉक स्तर पर BMO व जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट लेप्रोसी ऑफिसर द्वारा दैनिक मॉनिटरिंग की जाएगी। 

कुष्ठ रोग : प्रकार एवं पहचान 
कुष्ठ माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से होने वाला धीमी गति का संक्रामक रोग है। यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है :
1. पॉसी-बैसिलरी (PB) : 1 से 5 चकत्ते, असंक्रामक। 
2. मल्टी-बैसिलरी (MB) : 5 से अधिक चकत्ते, बिना इलाज के संक्रामक। 

इन्हें न करें नजरअंदाज, ये हैं कुष्ठ के शुरुआती लक्षण 
- शरीर पर हल्के तांबई या फीके रंग के चकत्ते जिनमें सुन्नपन हो, पसीना न आता हो, बाल उड़ गए हों। 
- चेहरे, कान की लौ में गठानें, मोटापन या तैलीय चमक। 
- कोहनी, घुटने के पास या गर्दन में नसों का मोटा होना व छूने पर दर्द। 
- हथेली-तलवे में सुन्नपन, चीजें पकड़ने या चप्पल निकलने का पता न चलना। 
- आंख बंद करने में कठिनाई या भेंगापन। 

मिथक बनाम तथ्य - समाज में जागरूकता जरूरी 
मिथक तथ्य
कुष्ठ पिछले जन्म के पाप का फल है 
-यह बैक्टीरिया से होने वाला रोग है, 100% इलाज संभव है 

कुष्ठ छूने से फैलता है 
 -इलाज शुरू होने के 72 घंटे बाद रोगी से संक्रमण नहीं फैलता। साथ खाने-रहने से नहीं फैलता 
कुष्ठ लाइलाज है 
-MDT से 6 से 12 माह में कुष्ठ पूरी तरह ठीक हो जाता है 
सिर्फ गरीबों को होता है 
- कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है, इम्यूनिटी पर निर्भर करता है 

CMHO डॉ. अमृत लाल रोहलेडर का संदेश : "कुष्ठ अब कलंक नहीं, एक आम बीमारी है। जितना जल्दी पता चलेगा, उतना जल्दी ठीक होगा। MDT की पूरी डोज सभी शासकीय अस्पताल, PHC, HWC में निःशुल्क उपलब्ध है। उपचार के दौरान रोगी सामान्य जीवन जी सकता है।" 

कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं की अपील : "मैं जिले के सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सरपंचों, पार्षदों से अनुरोध करती हूं कि स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें। अपने घर के साथ-साथ पड़ोस में भी किसी को लक्षण दिखें तो टीम को जरूर बताएं। आपकी सहभागिता से ही हम बेमेतरा को कुष्ठ मुक्त बना पाएंगे। लक्षण दिखने पर 104 हेल्पलाइन या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।" 

   रिपोर्टिंग एवं फॉलोअप अभियान समाप्ति के बाद सभी नए चिन्हित रोगियों को उपचार कार्ड जारी कर नियमित फॉलोअप किया जाएगा। उनका रजिस्ट्रेशन Nikusth Portal पर कर 6-12 माह तक दवा की निरंतरता सुनिश्चित की जाएगी।