बेमेतरा के 5804 किसानों तक पहुंची वैज्ञानिक खेती की जानकारी

15 दिवसीय “विकसित कृषि संकल्प अभियान” सफलतापूर्वक सम्पन्न 

कृषि वैज्ञानिकों ने गांव-गांव पहुंचकर किसानों को दी आधुनिक तकनीक, जैविक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह 
बेमेतरा 21 मई 2026 - जिले में कृषि के सतत विकास एवं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित 15 दिवसीय “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का सफलतापूर्वक समापन 20 मई 2026 को हुआ। यह अभियान 5 मई से प्रारंभ होकर जिले के चारों विकासखंडों की चयनित 96 ग्राम पंचायतों में संचालित किया गया। अभियान के अंतिम दिवस पर कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की टीम ग्राम मरका, बाराडेरा, किरितपुर, चेतुआ, बुचीपुर, बोरदेही, नवागांवकला एवं सोमईकला पहुंची, जहां किसानों से प्रत्यक्ष संवाद कर उन्हें खरीफ फसलों की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी गई। 
   अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को खरीफ मौसम हेतु वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से अवगत कराना, संतुलित रासायनिक उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित खेती को बढ़ावा देना तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना रहा। इसके साथ ही आधुनिक कृषि यंत्रों, उपकरणों एवं ड्रोन तकनीक के उपयोग और प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराया गया। 
      अभियान के दौरान फसल बीमा, जल संरक्षण, बीज उपचार एवं बीज उत्पादन, फसल चक्र परिवर्तन, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती तथा प्राकृतिक कृषि तकनीकों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। 
इस व्यापक अभियान के सफल संचालन में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा, कृषि महाविद्यालय ढोलिया, उद्यानिकी विभाग, मछलीपालन विभाग, पशुपालन विभाग, फसल बीजा, बीज उत्पादक संस्थाओं एवं पंचायत विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 
    अभियान के दौरान कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा, तकनीकी मार्गदर्शन एवं संगोष्ठियों के माध्यम से 5804 से अधिक किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया। किसानों की रासायनिक खाद से जुड़ी वर्तमान समस्याओं, हरी खाद एवं नील हरित काई के उपयोग से समाधान, कृषि नवाचारों एवं तकनीकी आवश्यकताओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। 
    कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा के वैज्ञानिक डॉ. जीतेन्द्र कुमार जोशी ने बेरला विकासखंड के किसानों को हरी खाद एवं नील हरित काई के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने धान रोपा यंत्र, पैडी ड्रम सीडर एवं धान प्लांटर मशीन द्वारा सीधी बुआई की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही किसानों को उन्नत धान किस्मों के चयन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने तथा फसल अवशेषों को जलाने के बजाय बेलर मशीन से संग्रहित कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की सलाह दी। 
     इसी प्रकार कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा के वैज्ञानिक डॉ. लव कुमार साहू ने साजा विकासखंड के किसानों को उद्यानिकी फसलों की आधुनिक खेती, टपक एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति के उपयोग तथा जलवायु आधारित उन्नत किस्मों के चयन की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के माध्यम से टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया। 
  कृषि वैज्ञानिक श्रीमती रजनी धर्मेंद्र अगाशे एवं डोमन सिंह टेकाम ने बेमेतरा विकासखंड में आयोजित प्रशिक्षण एवं कृषक संगोष्ठियों के दौरान किसानों को मिट्टी की सेहत एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने जानकारी दी कि मिट्टी परीक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार जिले की कृषि भूमि में फॉस्फोरस एवं पोटाश की मात्रा मध्यम से उच्च स्तर पर है, जबकि नत्रजन एवं जैविक कार्बन की मात्रा कम पाई गई है। लगातार यूरिया एवं डीएपी के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। किसानों को जैविक एवं जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, ब्रम्हास्त्र, वाफसा एवं आच्छादन जैसी प्राकृतिक खेती तकनीकों की उपयोगिता समझाई। साथ ही एजोस्पिरिलम, एजेटोबैक्टर, माइकोराइजा, पीएसबी, केएसबी एवं एनपीके कंसोर्टियम जैसे जैव उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी गई। 
   कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक तोषण कुमार ठाकुर ने किसानों को डीएपी एवं यूरिया के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, टीएसपी, एसएसपी एवं एनपीके कंसोर्टियम के समन्वित उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संतुलित एवं वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान उत्पादन लागत कम करने के साथ बेहतर उत्पादन एवं आय प्राप्त कर सकते हैं।