छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने अध्यक्ष विधानसभा डॉ रमन सिंह से भेंटकर सौंपा मांग पत्र
माध्यमिक शिक्षा मंडल के पाठ्यक्रम से कक्षा छठवीं से लेकर दसवीं में संस्कृत विषय को सचिवालय स्तर पर षडयंत्र पूर्वक हटाया जाने का आरोप
हरियाणा की तर्ज पर सांस्कृत विषय को अनिवार्य और नवीन व्यावसायिक शिक्षा में सातवें विषय के रूप में स्थान देने के लिए सौंपा जा रहा मांग पत्र
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 13 फरवरी 2026 - संस्कृत विषय बचाओ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू, डॉक्टर नारायण साहू और मनोज कुमार वर्मा ने छत्तीसगढ़ में संस्कृत विषय की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल के पाठ्यक्रम से कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं तक सचिवालय स्तर पर षडयंत्र पूर्वक हटाया जा रहा है, इससे अवगत कराकर संस्कृत को पूर्व की भांति हरियाणा राज्य के तर्ज पर अनिवार्य विषय करने और संस्कृत के विकल्प के रूप में नवीन व्यावसायिक शिक्षा लागू किया गया है, उसे सातवें विषय के रूप में स्थान देने के लिए मांग पत्र विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह को सौपा गया। इस अवसर पर डॉ रमन सिंह के द्वारा कहा गया कि संस्कृत विकल्प का नही संकल्प का विषय है, भाषा के साथ अन्याय नही होगा।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि अपने मांग को लेकर अब तक संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मंडलम्, स्कूल शिक्षा मंत्री, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा दुर्ग रायपुर के जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी तथा बेमेतरा राजिम और डोंगरगांव के विधायकों व संचालक जिला बलौदा बाजार एवं महंत रामसुंदर दास पूर्व विधायक को भी मांग पत्र सौपा जा चुका है कि सचिवालय स्तर पर बिना किसी लिखित आदेश के संस्कृत विषय के स्थान पर नवीन व्यावसायिक शिक्षा मौखिक निर्देशों से ही लागू किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी संस्कृत भाषा को अध्ययन एवं व्यवहार में अपनाने हेतु निरंतर अपील की जा रही है। केंद्र सरकार के द्वारा विद्यालयों में केवल ट्रेंड चालू करने कहां गया है, ना कि किसी विषय को नुकसान पहुंचा कर उनके जगह पर छत्तीसगढ़ में संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला भाषा को जिसमें छात्र अध्यनरत थे को छोड़कर प्राचार्य और अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रम में जा रहे हैं। संस्कृत, बांग्ला, हिंदी भारतीय संविधान मे सर्वोच्च स्थान प्राप्त आठवीं अनुसूची की भाषा है। इस भाषा का अपमान और उल्लंघन असंवैधानिक हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है। यह भारतीय ज्ञान परंपरा संस्कृति सभ्यता और संस्कार परक राष्ट्रभाषा है।
संघ के पदाधिकारियों ने 8 फरवरी 2026 रविवार को विधायक अजय चंद्राकर, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह से मुलाकात कर मांग पत्र सौपा गया।
एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रही है, अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं और अपने ही देश में प्रदेश में संस्कृत विषय को पाठ्यक्रम से हटाने के लिए इस प्रकार महाषड्यंत्र चल रहा है, जो गंभीर चिंतन का विषय है।
07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपूरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत् सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा जा चुका है।
25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं तक संस्कृत विषय को अनिवार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है, परंतु उस निर्देश का कार्य पालन धरातल पर आज पर्यंत नहीं किया गया है। इस प्रकार की प्रशासकीय और शासकीय व्यवहार से स्पष्ट होता है कि छत्तीसगढ़ सरकार के खजाना में और केंद्र सरकार के खजाना में भारी मात्रा में आर्थिक अनियमितता और आर्थिक भ्रष्टाचार की संभावना प्रतीत होती है।
हाई स्कूलों में जहां छात्र अध्ययनरत है, दस बारह वर्षों से पदस्थ एकल शिक्षकों को अतिशेष अथवा पद रिक्त नहीं है, करके एकतरफा अन्यत्र स्थानांतरित कर अधिकारी के द्वारा छात्रों के अध्ययन अध्यापन को भी बाधित किया जाता रहा है।