बारगांव बेरला में श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन
रविवार 1 को श्रीराम कथा, श्रीकृष्ण जन्म, 2 को बाललीला, श्रीकृष्ण रूखमणी विवाह, 3 को सुदामा चरित्र, 4 को परीक्षित मोक्ष, चढोत्री, शोभायात्रा व 5 को गीता सहसधारा, तुलसी वर्षा व हवन पूर्णाहुति
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 31 जनवरी 2026 - जिलें के बेरला ब्लाक के ग्राम बारगांव में श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा के चौथे दिन शनिवार को कथावाचक श्रीधाम वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने कहा कि सदा अपने नेत्र, श्रवण और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। क्योंकि जैसा हम सुनते हैं, देखते हैं, ठीक वैसा ही आचरण करते हैं। ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप क्या देख रहे हैं, क्या सुन रहे हैं। देखना और सुनना अगर सुधरा हुआ हो, अच्छा हो, तो व्यक्ति कभी गलत रास्ते पर नहीं जाएगा। जो उचित हो हमेशा वहीं देखो और सुनो। भगवान के नाम का आश्रय लो, सत्संग करो, वहीं हमारे साथ जाएगा।
कथावाचक पूज्या श्रद्धा दीदी ने कथा का वर्णन करते बताया कि भगवान वामन श्री हरि के पहले ऐसे अवतार थे जो मानव रूप में प्रकट हुए थे। उनके पिता वामन ऋषि और माता अदिति थी। वह बौने ब्राह्मण के रूप में जन्मे थे। मान्यता है कि वह इंद्र के छोटे भाई थे। हमारे वेदों में चार युगों का वर्णन मिलता है। ब्रह्माजी का एक दिन यानी चार वेदों का समय है। यह समय सौर वर्ष में उल्लेखित है। चार युगों में सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग आते हैं।
त्रेतायुग दूसरा युग था जिसमें अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु तीन अवतार लिए थे, जो क्रमशः वामन अवतार, परशुराम अवतार और श्रीराम अवतार के नाम से उल्लेखित हैं। त्रेतायुग में भगवान विष्णु के पांचवें अवतार के रूप में वामन अवतार लिया गया था। पहले चार अवतार क्रमशः मत्स्य, कच्छप, वाराह और नृसिंह थे। वामन अवतार में उन्होंने राजा बलि से तीन पग जमीन मांग कर धरती की रक्षा की थी। छठवां अवतार भगवान ने परशुराम का लिया। इसके बाद भगवान श्रीराम के रूप में भगवान विष्णु इस धरती पर जन्मे थे।
भागवत पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने इंद्र का देवलोक में पुनः अधिकार स्थापित करने के लिए यह अवतार लिया। दरअसल देवलोक पर असुर राजा बली ने विजयश्री हासिल कर इसे अपने अधिकार में ले लिया था। राजा बली विरोचन के पुत्र और प्रह्लाद के पौत्र थे। उन्होने अपने तप और पराक्रम के बल पर देवलोक पर विजयश्री हासिल की थी। राजा बलि महादानी राजा थे, उनके दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। यह बात जब वामन भगवान को पता चली तो वह एक बौने ब्राह्मण के वेष में बली के पास गये और उनसे अपने रहने के लिए तीन पग के बराबर भूमि देने का आग्रह किया। उनके हाथ में एक लकड़ी का छाता था। गुरु शुक्राचार्य के चेताने के बावजूद बली ने वामन को वचन दे डाला। इस तरह भगवान ने दो पग में धरती, आकाश नाम लिया, चौथा पग उन्होंने राजा बलि के सिर पर रखा था। जिसके बाद से राजा बलि को मोक्ष प्राप्त हुआ।
भगवान विष्ण के छठवें अवतार के रूप में राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका और भृगुवंशीय जमदग्नि के पुत्र के रूप में जन्में थे। इस अवतार में वह भगवान शिव के परम भक्त थे। इन्हें शिव से विशेष परशु (फरसा) प्राप्त हुआ था। इनका नाम तो राम था, किन्तु शंकर द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये परशुराम कहलाते थे।
श्रीहरि ने सातवें अवतार के रूप में श्रीराम के नाम से जन्म लिया। वह अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र के रूप में जन्मे थे। इस अवतार में वह मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। उन्होंने लंकापति रावण के अलाव कई दैत्यों का अंत किया।
कल होगी श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह, वृंदावन की झांकी ने मन मोहा
श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार 1 फरवरी को श्रीराम कथा, श्रीकृष्ण जन्म, 2 फरवरी को बाललीला, श्रीकृष्ण रूखमणी विवाह होगी। वहीं 3 फरवरी को द्वारिका लीला, सुदामा चरित्र, 4 फरवरी को परीक्षित मोक्ष, चढोत्री, शोभायात्रा व 5 फरवरी को गीता सहसधारा, तुलसी वर्षा व हवन पूर्णाहुति होगी।
सहयोग - आयोजन को सफल बनाने में मनहरण वर्मा, ओमप्रकाश वर्मा, मंगला यादव, चुम्मन वर्मा, श्याम, नागेश्वर साहू, ईश्वरी साहू, कमलनारायण सहित गांव के पदाधिकारी जुटे हुए हैं।