श्रीमद् भागवत कथा बारगांव में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
आज होगी श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह
लोगों को लुभा रही वृंदावन की झांकी
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 01 फरवरी 2026 - बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक के ग्राम बारगांव में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन रविवार को कथावाचक वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने कहा कि श्रीमद्भागवत अमृत रूपी कलश है, जिसके रसपान से जीवन कृतार्थ हो जाता है। अतः सभी भक्तों को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करना चाहिए।
रविवार को श्रीमद् भागवत कथा में पांचवें दिन धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। भागवत कथा में भगवान के जन्मोत्सव को लेकर मंच को फूलों की माला और गुब्बारों से विशेष रूप से सजावट की गई थी। इस विशेष दिन को लेकर श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रही।
मनुष्य के जीवन में हैं छह शत्रु
कथावाचक वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म कथा सुनाते हुए कहा कि बाल गोपाल का जन्म देवकी और वासुदेव के आठवें संतान के रूप में होता है। देवकी व वासुदेव का अर्थ समझाते हुए कहा कि देवकी यानी जो देवताओं की होकर जीवन जीती है और वासुदेव का अर्थ है जिसमें देव तत्व का वास हो। ऐसे व्यक्ति अगर विपरीत परिस्थितियों की बेड़ियों में भी क्यों न जकड़े हो, भगवान को खोजने के लिए उन्हें कहीं जाना नहीं पड़ता है। बल्कि भगवान स्वयं आकर उसकी सारी बेड़ी-हथकड़ी को काटकर उसे संसार सागर से मुक्त करा दिया करते हैं।
उन्होंने कहा कि हर मनुष्य के जीवन में छह शत्रु हैं, काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ व अहंकार। जब हमारे अंदर के ये छह शत्रु समाप्त हो जाते हैं तो सातवें संतान के रूप में शेष जी जो काल के प्रतीक हैं वो काल फिर मनुष्य के जीवन में आना भी चाहे तो भगवान अपने योग माया से उस काल का रास्ता बदल देते हैं, तब आठवें संतान के रूप में भगवान श्री कृष्ण का अवतार होता है। जिसके जीवन में भगवान श्री कृष्ण की भक्ति आ गई तो ऐसा समझना चाहिए कि जीवन सफल हो गया।
कथा के बीच में भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की आकर्षक झांकी भी निकाली गई। श्री कृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर पेश किए गए भजनों पर श्रद्धालु झूमते रहे। मुख्य यजमान ओमप्रकाश-हेमलता वर्मा ने श्री भागवत भगवान की पूजा व आरती की। भागवत कथा श्रवण करने सहित अन्य पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में पहुचे।
कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन
भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला का वर्णन
श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। इस दौरान श्री कृष्णजी की बाल लीलाओं का वर्णन किया।
कथावाचक वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने कहा कि व्यक्ति को हमेशा धर्म के मार्ग पर चलकर समाज सेवा में लोगों को आगे आना चाहिए। मानव जब इस संसार में पैदा लेता है तो चार व्याधि उत्पन्न होते हैं। रोग, शोक, वृद्धापन और मौत। मानव इन्हीं चार व्याधियों से धीर कर इस मायारूपी संसार से विदा लेता है। सांसारिक बंधन में जितना बंधोगे उतना ही पाप के नजदीक पहुंचेगा।
इसलिए सांसारिक बंधन से मुक्त होकर परमात्मा की शरण में जाओ तभी जीवन रूपी नैय्या पार होगी। आज के दौर में परेशानी और अविश्वास बढ़ता जा रहा है। इससे समाज में खींचतान, स्वार्थ, लोभ, दुख, पतन, विकृतियों का अम्बार लगा हुआ है। ऐसे में समाज को युग के अनुरूप दिशा चिंतन, व्यवहार, परमार्थ के लिए श्रीमद्भागवत जरूरी है।