कृषकगण समय रहते खरीफ फसल हेतु रासायनिक उर्वरकों का अग्रिम उठाव सहकारी समिति से करके अनावश्यक परेशानी से बचे - उप संचालक कृषि मोरध्वज डड़सेना
खरीफ वर्ष 2026 हेतु रासायनिक उर्वरकों के अग्रिम उठाव की प्रक्रिया प्रारंभ
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 06 फरवरी 2026 - खरीफ वर्ष 2026 की खेती को सुचारु एवं समयबद्ध रूप से संपन्न कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा रासायनिक उर्वरकों के अग्रिम उठाव की कार्यवाही 01 फरवरी 2026 से 31 मई 2026 तक प्रारंभ कर दी गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को खरीफ मौसम के दौरान उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना, संभावित कमी से बचाव करना तथा वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखना है।
खरीफ 2026 के लिए 37800 मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित
कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए विभिन्न रासायनिक उर्वरकों का कुल 37800 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार यूरिया 16600 मीट्रिक टन, डीएपी (DAP) 10000 मीट्रिक टन, एन.पी.के. (NPK) 6000 मीट्रिक टन, एमओपी (MOP) 2200 मीट्रिक टन, एसएसपी (SSP) 3000 मीट्रिक टन।
इस अग्रिम योजना के तहत सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
अग्रिम उठाव पर ब्याज मुक्त सुविधा
किसानों को राहत प्रदान करते हुए यह भी निर्णय लिया गया है कि 01 फरवरी 2026 से 31 मई 2026 तक अग्रिम रूप से उठाए गए रासायनिक उर्वरकों पर सहकारी समितियों द्वारा कृषकों से किसी प्रकार का ब्याज अधिभारित नहीं किया जाएगा। इससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा और वे बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ के आवश्यक उर्वरक समय रहते प्राप्त कर सकेंगे।
कृषकों से समय रहते उर्वरक उठाव की अपील
उप संचालक कृषि मोरध्वज डड़सेना द्वारा जिले के समस्त कृषकों से अपील की गई है कि वे खरीफ वर्ष 2026 हेतु आवश्यक रासायनिक उर्वरकों का अग्रिम उठाव अपने नजदीकी सहकारी समिति से समय रहते कर लें। इससे खरीफ मौसम के दौरान उर्वरकों की संभावित कमी, अनावश्यक भीड़, वितरण संबंधी अव्यवस्था एवं विलंब से बचा जा सकेगा।
बेहतर खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
कृषि विभाग की यह अग्रिम उठाव व्यवस्था किसानों को समय पर खेती की तैयारी करने, फसल उत्पादन में वृद्धि लाने तथा खेती किसानी को अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से किसान अपनी खरीफ फसलों की बुवाई एवं पोषण कार्य सुचारु रूप से कर सकेंगे।