गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

मित्र का विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाना ही मित्रता का हैं सच्चा धर्म - श्रद्धा दीदी

बारगांव (बेरला) में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के आयोजन में सुदामा चरित्र कथा 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 04 फरवरी 2026 - बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक के बारगांव में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आठवें दिन कथावाचक वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने सुदामा चरित्र व सुखदेव विदाई का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मित्रता में गरीबी और अमीरी नहीं देखनी चाहिए। मित्र एक दूसरे का पूरक होता है। 
     भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा की गरीबी को देखकर रोते हुए अपने राज सिंहासन पर बैठाया और उन्हें उलाहना दिया कि जब गरीबी में रह रहे थे तो अपने मित्र के पास तो आ सकते थे, लेकिन सुदामा ने मित्रता को सर्वोपरि मानते हुए श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा। 
     उन्होंने बताया कि सुदामा चरित्र हमें जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। सुदामा ने भगवान के पास होते हुए अपने लिए कुछ नहीं मांगा। अर्थात निस्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है। 
        कथा के दौरान परीक्षित मोक्ष व भगवान सुखदेव की विदाई का वर्णन किया गया। कथा के बीच-बीच में भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रोता मौजूद रहे। कथावाचक श्रद्धा दीदी ने बताया कि भागवत कथा का श्रवण से मन आत्मा को परम सुख की प्राप्ति होती है। भागवत में बताए उपदेशों, उच्च आदर्शों को जीवन में ढालने से मानव जीवन जीने का उद्देश्य सफल हो जाता है। 
सुदामा चरित्र के प्रसंग में कहा कि अपने मित्र का विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाना ही मित्रता का सच्चा धर्म है। मित्र वह है जो अपने मित्र को सही दिशा प्रदान करे,जो कि मित्र की गलती पर उसे रोके और सही राह पर उसका सहयोग दे। 

कथा सुनने से भगवान के प्रति बढ़ जाती है भक्ति 
कथावाचक पूज्या श्रद्धा दीदी ने कहा कि श्रीमद्‌ भागवत में श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र, उपदेश और उनकी महिमा के बारे में बताया। इसके माध्यम से भगवान के प्रति भक्ति और आस्था बढ़ती है। इसके श्रवण मात्र से ही व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है, जीवन में सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का मूल मंत्र सदाचार है, जो इसे अपना लेता है, समाज उसे सम्मानित करता है। ऐसे व्यक्ति से भगवान भी प्रेम करते हैं। भागवत कथा में भक्ति ज्ञान, वैराग्य, ज्ञानयोग, कर्मयोग, समाजधर्म, स्त्रीधर्म, राजनीति का ज्ञान भरा है। 

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