बाबा गुरु अमरदास ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि सच्चा धर्म सेवा और सदाचार में हैं निहित - भाजपा किसान नेता योगेश तिवारी

चेटुवापुरी धाम के आस्था के मेला मे शामिल हुए भाजपा किसान नेता योगेश तिवारी 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 03 जनवरी 2026 - छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बाबा अमरदास के जंयती और छेर-छेरा पुन्नी के पावन पर्व पर चेटुवापुरी धाम स्थित सतधारी गुरु बाल ब्रम्हचारी बाबा गुरु अमरदास के समाधि स्थल में आयोजित त्रिदिवसीय भव्य मेला श्रद्धा, अनुशासन और उल्लास के वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस गरिमामयी आयोजन में भाजपा किसान नेता योगेश तिवारी विशेष रूप से शामिल हुए। मेले की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों एवं परंपरागत विधि-विधान के साथ की गई। पूरे क्षेत्र में सतनाम के संदेश, लोक संस्कृति और सामाजिक समरसता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणजनों की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। इस अवसर पर योगेश तिवारी ने आज बाबा अमरदास के जंयती के अवसर पर कहा कि आज हम सबको चेटवा घाम में बाबा अमरदास की जंयती मनाते हुए पूज्य बाबा के दर्शन करके बाबा जी के बताये मार्ग पर चल कर हम सब अपने जीवन को सफल करना चाहिए। बाबा अमरदास ने हमेशा ही बाबा गुरु घासीदास के बतायें मार्ग पर चलकर संपूर्ण समाज को सत्य और अहिंसा के मार्ग में चलने का संदेश दिये। 
     भाजपा किसान नेता योगेश तिवारी ने कहा कि छेर-छेरा पुन्नी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, सेवा भावना और आपसी सहयोग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सतधारी गुरु बाल ब्रम्हचारी बाबा गुरु अमरदास का जीवन सत्य, तपस्या और निःस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण रहा है। बाबा जी ने अपने तपस्वी जीवन के माध्यम से समाज को सादगी, संयम और आत्मअनुशासन का मार्ग दिखाया। उन्होंने मानव मात्र को समान दृष्टि से देखने, परस्पर प्रेम बनाए रखने और सतनाम के सिद्धांतों पर चलने की प्रेरणा दी।
  योगेश तिवारी ने कहा कि बाबा गुरु अमरदास ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि सच्चा धर्म सेवा और सदाचार में निहित है। उनका जीवन समाज के कमजोर वर्ग, किसानों, श्रमिकों और आमजन के लिए संबल और प्रेरणा का स्रोत रहा है। बाबा जी की शिक्षाएँ आज भी समाज में नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और आत्मिक जागरण को मजबूत करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज को एक सूत्र में बाँधने, आपसी भाईचारे को बढ़ाने और हमारी लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं। गुरु अमरदास के आदर्शों पर चलकर ही एक सशक्त, संस्कारित और समरस समाज का निर्माण संभव है। त्रिदिवसीय मेले के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियाँ, लोकभजन एवं सामाजिक आयोजन सम्पन्न हुए, जिनमें बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। मेले का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय, शांतिपूर्ण और आनंददायक रहा। इस आयोजन का विनीत रूप से आयोजन समस्त सतनामी समाज, ग्राम पंचायत एवं ग्रामवासी चेटुवापुरी धाम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में हेमंत चंदेल, अंजलि सोनवानी, वरुण मारकण्डे ,अनिल टंडन, कमलेश देसलहरे, मनोज गायकवाड़, श्रवण, भुवन दास जांगड़े, टोपेंद्र सोनवानी, कोमल मानदेव, रेवी चंद्र, प्रेमदास दोहरे, संदीप राजेश नौरंगे, खिलेश्वर, सम्मान दास सोनवानी, रमेश, ताराचंद्र सेवक, रोहित बंजारे, अंचल सिंह सहित बड़ी संख्या में सतनामी समाज के सदस्य एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। समापन अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे एवं सतनाम के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।