श्रीमद्भागवत कथा में भगवान शंकर और सती की सुनाई कथा
कृष्ण जन्मोत्सव आज 22 व 24 को होगा श्रीकृष्ण-रूखमणी विवाह
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा/बेरला 21 दिसंबर 2025 - बेमेतरा जिलें के बेरला ब्लाक के ग्राम बारगांव में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के तीसरा दिन शनिवार को कथावाचक आचार्य पंडित खिलेंद्र दुबे (खमतराई वाले) ने श्रीमद्भागवत कथा में भगवान शिव और सती की कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य के कई जन्मों के पापों का क्षय हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ साथ उसकी शिक्षाओं पर भी अमल करना चाहिए।
कथावाचक पंडित खिलेंद्र दुबे ने बताया कि सती माता के पिता राजा दक्ष ने घर में यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी सती और दामाद शिव भगवान को नहीं बुलाया। जब चंद्रमा व अन्य देवता दक्ष के घर जाने लगे तो उन्हें रास्ते में सती माता मिली।
उन्होंने सती माता से पूछा कि क्या वह अपने पिता के इस समारोह में नहीं जा रही हैं। उन्होंने जाकर भोले नाथ से कहा कि वह भी अपने पिता के घर में हो रहे यज्ञ में जाना चाहती है। भगवान शिव में माता सती को समझाया कि उन्होंने जब हमें बुलावा नहीं दिया है तो वह कैसे जा सकते हैं। माता सती जिद कर बिना शिव की आज्ञा से यज्ञ में चली गईं। वहां पर जब माता सती गई, तो किसी ने उनका आदर नहीं किया। इसके बाद उन्होंने यज्ञ में कूद कर अपनी जान दे दी। बाद में शिव भगवान माता के मृत शरीर को कंधे पर उठा कर चले तो उनके अंग हिमाचल में गिरा दिए। जिन स्थानों पर माता के अंग गिरे वहां पर वर्तमान में देवी के शक्ति पीठ बने हैं।
कथा में सुनाया भगवान वामन अवतार प्रसंग
श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को कथावाचक पंडित खिलेंद्र दुबे ने भक्तों को भगवान वामन अवतार व समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ और अहंकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह धन संपदा क्षण भंगुर होती है। इसलिए इस जीवन में परोपकार करों। उन्होंने बताया कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईषर्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। ईषालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता। ऐसे व्यक्तियों को भगवान सूर्य, वायु, नदियों, बादलों व वृक्षों इत्यादि से प्रेरणा लेनी चाहिए। भगवान सूर्य बिना किसी भेदभाव के सृष्टि के सभी प्राणियों को अपना प्रकाश देते हैं। वायु सभी जीवों में प्राणों का संचार करती है। बादल परोपकार के लिए गरजते हुए वर्षा करते है, नदियां किसी से नहीं पूछती कि तुम मेरा जल क्यों पीते हो और वृक्ष भी किसी व्यक्ति से यह नहीं पूछते कि तुम मेरे फल क्यों तोड़ते हो, लेकिन स्वार्थी मानव इष्र्यालु होता जा रहा है। यदि अपना उद्धार करना चाहते हो तो परोपकार में अपना जीवन लगाओ, जिससे तुम्हारा कल्याण होगा।
24 को होगा रूखमणी विवाह
22 दिसंबर को गजेंद्र मोक्ष, रामअवतार कृष्ण जन्म, 23 दिसंबर को नंद महोत्सव, बाललीला, गोवर्धन लीला, 24 दिसंबर को श्रीकृष्ण-रूखमणी विवाह होगी। वहीं 25 दिसंबर को सुदामा चरित्र, 26 दिसंबर को गीता सहसधारा, तुलसी वर्षा व हवन पूर्णाहुति होगी।