गडुआ (साजा) में जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर वरिष्ठ कृषि अधिकारी साजा द्वारा किसानों को पराली के महत्व को समझाया
पराली प्रबंधन के प्रति किसानों में बढ़ी जागरूकता
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा/साजा 28 नवंबर 2025 - बेमेतरा जिला कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण यहां बड़ी संख्या में किसान रबी फसलों की तैयारी के लिए पराली जलाने की पारंपरिक पद्धति अपनाते हैं, जिससे पर्यावरण, स्वास्थ्य तथा मिट्टी की उर्वरता पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसी के मद्देनजर आज ग्राम गडुआ विकासखंड साजा में किसानों को पराली नहीं जलाने एवं उसके वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में वरिष्ठ कृषि अधिकारी साजा दिनेश कुमार ध्रुव द्वारा विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
वरिष्ठ कृषि अधिकारी साजा दिनेश कुमार ध्रुव ने ग्रामीणों व किसानों को शासन से जारी दिशा निर्देशों की जानकारी देते हुए पराली के जलाने के हानि, जुर्माना व उपयोग की जानकारी देते हुए पराली नहीं जलाने के संबंध में कृषकों को जागरूक किया गया एवं पराली जलाने से होने वाले परिणाम जैसे पर्यावरण नुकसान, मिट्टी की उर्वरक शक्ति नष्ट होने, लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट होने के बारे में जानकारी देते हुए कृषकों को पराली के उचित प्रबंधन कर पशुओं के चारा हेतु, खाद बनाने के संबंध में बताया गया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया गया कि जिले की 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। खरीफ के 2.25 लाख हेक्टेयर रकबे में से लगभग 2.05 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है, जिसके बाद खेतों में पराली बड़ी मात्रा में शेष रह जाती है। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे सांस, आंख और त्वचा से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही मिट्टी के पोषक तत्वों का नष्ट हो जाना अगली फसल की उत्पादकता को प्रभावित करता है।
किसानों को पराली प्रबंधन के विभिन्न वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि पराली को मिट्टी पलटने वाले हल की सहायता से खेत में दबाकर खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त डी-कंपोजर के प्रयोग से पराली को आसानी से सड़ाकर जैव-खाद में बदला जा सकता है। हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी आधुनिक मशीनें पराली को हटाते हुए सीधे बुवाई करने में सक्षम हैं, जिससे खेत की उर्वरता भी बनी रहती है। पराली को गोशालाओं को दान करने, बायोगैस संयंत्रों में उपयोग करने या थर्मल पावर प्लांट हेतु एग्रीगेटर्स को बेचने जैसे विकल्पों पर भी किसानों को जानकारी दी गई।
इस दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा सुझाए गए इन-सिटू और एक्स-सिटू प्रबंधन तरीकों की जानकारी भी साझा की गई। किसानों को यह भी बताया गया कि पराली प्रबंधन के लिए सरकार विभिन्न अनुदान योजनाएं चला रही है, जिससे मशीनों की उपलब्धता और उपयोग आसान हो रहा है। जिला प्रशासन ने किसानों से इन योजनाओं का लाभ उठाकर पराली न जलाने और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के निर्देशों और पराली जलाने पर लगने वाले जुर्मानों के बारे में भी किसानों को मौके पर ही अवगत कराया गया।
इस जागरूकता कार्यक्रम में विकासखंड साजा के वरिष्ठ कृषि अधिकारी साजा दिनेश कुमार ध्रुव, क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, समिति बीजा अध्यक्ष वीरेंद्र पटेल, ग्राम कोटवार और कृषकगण राधे साहू, नाथू साहू, मुकुंद ध्रुव, राजेन्द्र सेन, जलेश्वर ध्रुर्वे विशेष रूप से उपस्थित रहे।
“पराली न जलाएँ, पर्यावरण बचाएँ - किसान का मान बढ़ाएँ”
जिला प्रशासन ने स्वच्छ हवा, उपजाऊ भूमि और स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु किसानों के सहयोग को अत्यंत आवश्यक बताया।