सुहागिन अपने पति की लंबी उम्र व स्वस्थ जीवन के लिए आज रखेंगी निर्जला व्रत

सुहागिन अपने पति की लंबी उम्र व स्वस्थ जीवन के लिए आज रखेंगी निर्जला व्रत

करवा चौथ पर बारगांव (बेरला) के बाजारों में बढ़ी चहल-पहल, लाल साड़ियों की बढ़ी डिमांड 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा/बेरला - करवा चौथ इस बार 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसे लेकर बाजार पूरी तरह तैयार है। खासकर सराफा, लाइफ स्टाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा पूजन सामग्री और फूलों की दुकानों में विशेष तैयारियां की गई हैं।
    करवा चौथ को लेकर एक दिन पहले गुरुवार को बारगांव (बेरला) के बाजारों में सामानों की खरीदारी के लिए चहल पहल बढ़ गई है। इसके लिए फल, चलनी तथा अन्य पूजन सामग्री खरीदने के लिए दुकानों पर भीड़ जुटी थी। करवा चौथ पर व्रत रहने वाली मटिया निवासी ज्योति यादव ने बताया कि सुहागिन अपने पति की लंबी उम्र व स्वस्थ जीवन के लिए निर्जला उपवास रहकर चंद्रमा की पूजा-अर्चना फल, पकवान आदि से करती हैं। चलनी से चंद्रमा का दर्शन करती हैं। इसके उपरांत अपने पति से भी आशीर्वाद लेती हैं। उनका मानना है कि इससे चंद्र दोष दूर होता है।
  करवा चौथ को लेकर मिट्टी से लेकर चांदी के करवे से बाजार सज चुका है। सराफा व कपड़ा व्यापारियों ने बताया कि इस बार डिजायनर साड़ी व गहने की मांग बढ़ी है। कपड़ा व्यापारी पूर्णिमा साहू ने बताया कि करवा चौथ को लेकर साड़ियों की मांग बढ़ गई है। इस पर्व पर सबसे अधिक लाल साड़ी की डिमांड रहती है। इसके लिए सूरत, कोलकाता, जयपुर समेत अन्य जगहों से खास साड़ियां मंगवाई गई है। वहीं सराफा कारोबारी कृष्णा सोनी ने बताया कि महिलाएं लाइट वेटेड व डिजाइनर ज्यादा पसंद करती हैं, इसलिए मुंबई व सूरत से गहने मंगाए गए हैं। इसके अलावा फूल बाजार में भी विशेष तैयारी की गई है।

करवा चौथ पर ऐसे करें पूजा - शाम को पूजन के समय महिलाएं लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और श्री गणेश की प्रतिमाएं या चित्र स्थापित करती हैं। इसके साथ ही मिट्टी या तांबे का करवा, जल से भरा लोटा और उसके ऊपर श्रीफल रखा जाता है। करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाकर उस पर कलावा बांधा जाता है। धूप, दीप, अक्षत, पुष्प, चंदन और मिठाई अर्पित कर देवताओं का आवाहन किया जाता है। इसके बाद महिलाएं चौथ माता की कथा सुनती या पढ़ती हैं और रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करती हैं। इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर उपवास तोड़ती हैं।

करवा चौथ पूजन सामग्री - लकड़ी की चौकी या आसान, लाल या पीला वस्त्र, कलश या लोटा, श्रीफल, चावल, रोली, मौली, देसी घी, दीपक, धूप, फल, फूल, मिठाई, मिट्टी या तांबे का करवा और उसका ढक्कन, गेहूं के दाने, पान, सींक, अक्षत, चंदन, करवा चौथ व्रत कथा की पुस्तक।

चांद को दिया जाता है अर्घ्य - ज्योतिष आचार्य बोसेन्द्र पांडेय ने बताया कि इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और पूरे दिन पूजा-अर्चना कर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करती हैं। इस पावन पर्व पर चांद के दर्शन का विशेष महत्व होता है, इसलिए व्रती महिलाएं पूरे दिन चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार करती हैं।