प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 21 सितम्बर 2025 - जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने बेमेतरा जिला प्रशासन को आगाह करते हुए कहा है कि इस वर्ष ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ से लेकर अब तक बेमेतरा जिले और विशेष कर बेमेतरा शहर में जिस प्रकार से पानी की हाहाकार हुई है, उसे ध्यान में रखते हुए पूर्व में जिस तरह से जिला खनिज विभाग द्वारा रेत माफिया को जिस तरह की खुली छूट जिले में दी गई थी, उस पर लगाम लगाने की आवश्यकता है। अन्यथा वर्तमान में वर्षा ऋतु अपने अंतिम सप्ताह में है किंतु आज भी बेमेतरा जिले में वर्षा से प्राप्त जल का स्तर औसत से नीचे है। वही भूमिगत जल स्तर पूर्व से ही काफी नीचे जा चुका है, हजारों बोर पंप सूखे पड़े हैं। जो अब तक वर्षा ऋतु के उपरांत भी बोर प्रारंभ नहीं हो सके हैं। ऐसे में जिले की स्थिति महाराष्ट्र के लातुर की तरह न बन जाए। जिले में इस बार अगर पानी की किल्लत हुई तो स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। वैसे भी बेमेतरा जिले के किसान वर्षा ऋतु में पर्याप्त पानी नहीं गिरने से परेशान है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है, खेत में दरारें पड़ गए हैं। किसानी कार्य और पेयजल के लिए पानी के संरक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए आवश्यक है कि जिला प्रशासन शिवनाथ नदी में बने सभी ऐनीकट पर विशेष रूप से ध्यान रखें, जहां पर फिल्टर प्लांट की मदद से ग्रामीण अंचल एवं बेमेतरा शहर को मीठे पानी की सप्लाई की जाती है। इंटकवेल के पास पर्याप्त रूप से पानी का संचय किया जाए, ना कि पूर्व में भाजपा कार्यकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए जिस तरह से अवैध रेत खनन पर प्रशासन ने अपनी आंखें मूंद ली थी, वैसा इस बार ना हो। विशेष रूप से बेमेतरा शहर जहां एक ओर भाजपा के कार्यकर्ता रेत चोरी में शासन प्रशासन को करोड़ों रुपए की चपत लग रहे हैं वहीं दूसरी ओर नगर पालिका वार्डों में पानी की सप्लाई के नाम पर लाखों रुपए के टैंकर का बिल के नाम पर चपत लगाने का काम किया जा रहा है। पूर्व में जिस तरह शिवनाथ नदी में बने इंटकवेल के पास के एनीकट को खोल दिया गया था, जिससे एनीकट से नदी का पानी बह गया और रेत माफियाओं द्वारा शिवनाथ नदी में बने पुल के पास तालाब खोदने जितना रेत चोरी किया गया, किंतु प्रशासन मूकदर्शक बनकर तालियां ही पिटता रह गया है, वैसी स्थिति इस बार ना हो। जनता एक बार पानी के लिए हाहाकार देख चुकी है शायद दूसरी बार पानी की इस समस्या को बर्दाश्त ना कर सके और जिले में पानी के नाम पर स्थिति अनियंत्रित ना हो, इसके लिए समय रहते आवश्यक कदम प्रशासन उठाएं। नदियों पर बने एनीकट की नियमित रूप से निगरानी की जाए, कहीं उनमें पानी तो नहीं छोड़ा जा रहा है। रेत माफिया द्वारा अवैध रेत खनन तो नहीं किया जा रहा है।
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