डीएपी के स्थान पर विकल्प के रूप एसएसपी एवं एनपीके खाद का करें उपयोग
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 28 मई 2025 - जिले में खरीफ सीजन 2025 की तैयारी जोरों पर है। किसानों की खेती-किसानी गतिविधियाँ प्रारंभ हो गई हैं। जिले में ऋणी कृषकों की संख्या अधिक होने के कारण शासन द्वारा सहकारी एवं निजी दुकानों को खाद आबंटन का अनुपात 60:40 के स्थान पर 70:30 निर्धारित किया गया है। इसका अर्थ है कि 70 प्रतिशत या उससे अधिक खाद की आपूर्ति रैक प्वाइंट से बेमेतरा जिले को मार्कफेड के माध्यम से की जा रही है।
कलेक्टर रणबीर शर्मा द्वारा खरीफ सीजन की तैयारियों की नियमित समीक्षा की जा रही है। उन्होंने खाद-बीज के आबंटन, भण्डारण और किसानों तक वितरण की व्यवस्था की गहन समीक्षा की। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि खाद एवं बीज का वितरण पंजीकृत किसानों को समितियों के माध्यम से समय पर सुनिश्चित किया जाए।
समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई कि जिले में डीएपी खाद की माँग अधिक है, परंतु इसकी उपलब्धता माँग की तुलना में कम है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि किसानों को डीएपी खाद के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) एवं एनपीके (नाइट्रोजन-फास्फोरस-पोटाश) खाद के उपयोग की जानकारी दी जाए। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे अपने क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक एवं समसामयिक सलाह प्रदान करें, जिससे किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।
श्री शर्मा ने कहा कि खाद बीज की उपलब्धता, भण्डारण एवं वितरण की नियमित समीक्षा की जाएगी। शासन द्वारा जिले के लिए कुल खाद भण्डारण का संशोधित लक्ष्य 58415 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 39905 मीट्रिक टन खाद प्राप्त हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के कुल खाद वितरण का 65.4 प्रतिशत है। इसमें से 22811 मीट्रिक टन खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है, अर्थात अब तक 39 प्रतिशत खाद का वितरण हो चुका है।
डीएपी खाद का संशोधित लक्ष्य 5667 मीट्रिक टन है, जिसके विरुद्ध 3752 मीट्रिक टन खाद समितियों में भण्डारित की जा चुकी है। यह लक्ष्य का 66 प्रतिशत है। किसानों से अपील की गई है कि समितियों में उपलब्ध खाद का शीघ्र उठाव करें।
कृषि विभाग द्वारा जिले की सभी सेवा सहकारी समितियों में एसएसपी एवं एनपीके खाद के उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु बैनर एवं पोस्टर लगाए गए हैं। कृषि अधिकारियों द्वारा बताया गया कि जिले में वर्तमान में 3202 मीट्रिक टन सुपर फास्फेट एवं 2255 मीट्रिक टन एनपीके खाद उपलब्ध है। सिंगल सुपर फास्फेट में 16 प्रतिशत फास्फोरस और 11 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है, जो फसल के लिए अत्यंत उपयोगी है।
इसलिए किसानों से अपील है कि वे डीएपी खाद की कमी की स्थिति में सिंगल सुपर फास्फेट एवं एनपीके खाद का उपयोग करें और उन्नत, स्वस्थ्य एवं लाभकारी खेती करें।