सड़क को बहें छह माह होने को हैं, ग्रामीण कर रहे परेशानी का सामना
समस्या जस की तस, तो करोड़ो की स्वीकृति का क्या औचित्य
ग्रामीण त्रस्त, अधिकारी ठेकेदार मस्त
मामला हैं साजा ब्लाक के ग्राम बगलेड़ी के सड़क का, जिसके लिए पीएमजीएसवाई में करोड़ो की हुई स्वीकृति
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा - बीते साल के सावन की पहली बारिश में आई बाढ़ के चलते ब्लाक के ग्राम बगलेड़ी के मुख्य मार्ग का सड़क टूट व उखड़ कर बह गया था, जिससे वहां का आवागमन बंद पूरी तरह से हो गया था। सड़क के बह जाने ग्रामीणों को हुई दिक्कत व परेशानी को उनसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। उस बहे सड़क पर मटेरियल डाल कर चलने लायक तो बना दिया गया, जिससे ग्रामीण जैसे तैसे अवागमन कर अपना काम चला रहें हैं। मगर उक्त सड़क को आज छह माह होने जा रहा हैं, मगर उसके संधारण/मरम्मत पर ना तो अधिकारी, विभाग, प्रसाशन, ठेकेदार कोई भी ना तो रुचि दिखा रहा, ना ही अपनी जिम्मेदारी समझा जा रहा हैं। जिसका खामियाजा लाचार, मजबूर, बेसहारा ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा हैं।
क्या औचित्य ऐसी करोड़ों की स्वीकृति की - सरकार व शासन द्वारा क्षेत्रवासियों, लोगों की सुविधा, समस्या, परेशानीयों को हल करने के उद्देश्य को लेकर प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर राशि आबंटित की जाती हैं, मगर उनके ही अधिकारियों के द्वारा सरकार को चूना लगाने का कार्य किया जाता हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण व उदाहरण देखना हैं तो साजा विधानसभा आकर देखा जा सकता हैं। उक्त मामला जिलें के साजा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बगलेड़ी का हैं। जहां पर सड़क निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क विभाग से ग्राम केशतरा से ग्राम बगलेड़ी मार्ग के सड़क निर्माण की स्वीकृति प्रदान करते हुए करोड़ो रुपये की स्वीकृति की गई। मगर विभाग की घटिया व गुणवत्ताहीन कार्य होने के बाद भी उस गांव की आज की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। गांव में नाले पर जो नए पुल व नए सड़क निर्माण के बाद अभी भी यथावत समस्या बरकरार हैं।
मरम्मत व कार्यवाही दोनों दरकिनार - उक्त सड़क के मरम्मत व उस पर कार्यवाही को प्रसाशन व अधिकारियों दोनों के द्वारा दरकिनार कर दिया गया हैं। ग्राम बगलेड़ी के करोड़ो रुपये की स्वीकृति वाले सड़क के बहने पर आज छह माह होने को हैं, फिर भी ना तो उसका उसके मरम्मत की ओर ध्यान दिया जा रहा हैं, ना ही उसके ठेकेदार, अधिकारी पर अब तक कोई कार्यवाही की जा रही हैं। इसका मतलब उक्त ग्राम की सड़क की जो हालत हैं वह सही हैं? करोड़ो की सड़क के बहने में किसी की गलती नहीं हैं? अगर उनकी गलती नहीं हैं तो फिर उन ग्रामीणों की गलती हैं, जो इस ग्राम में निवास करते हैं। तो क्या वर्तमान सरकार इसी बात का सुशासन पर्व मना रही हैं? तब तो फिर कहा जा सकता हैं जय हो सुशासन की।
स्थल जांच की देखी गई कमी - उक्त ग्राम बगलेड़ी सड़क निर्माण कार्य पश्चात सामने आई वर्तमान स्थिति को देखकर स्वतः प्रमाणित होता हैं कि सड़क निर्माण कार्य के लिए स्टीमेट बनाते समय अधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण/जांच नहीं किया गया हैं। इससे साफ हो जाता हैं कि ऑफिस की एसी में बैठक स्टीमेट बनाकर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति कराई गई हैं। अगर निर्माण कार्य के स्टीमेट बनाने के पूर्व स्थल (सड़क) का जांच/मुआयना किया गया होता तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती। ग्राम में जाकर वस्तु स्थिति देखा जाता, ग्रामीणों से चर्चा किया जाता तो स्वतः ही कमोबेस की जानकारी हो जाती, उसके बाद जब स्टीमेट बनता व कार्य होता तो यह स्थिति नहीं निर्मित होती।
समाचार प्रकाशित कर ध्यनाकार्षित - पिछले साल माह अगस्त में हुई बारिश से ग्राम बगलेड़ी के सड़क के बह जाने का समाचार 10.8.2024 को नवप्रदेश में प्रकाशित कर शासन, जिला प्रसाशन, अधिकारीयों, जनप्रतिनिधियों सहित संबंधित ठेकेदार तक उक्त मुद्दे व समस्या पर सभी का ध्यनाकार्षित किए जाने का प्रयास किया गया था। जिस पर तत्काल कार्य करते हुए उक्त बहने वाली सड़क पर मटेरियल डाल कर आवागमन हेतु कामचलाऊ टेम्पेयरी सुधार कार्य किया गया था। उसके बाद कोई भी ध्यान नहीं दिया गया। अब इस समस्या को लगभग छह माह होने जा रहा हैं, मगर समस्या जस की तस हैं। किसी को भी ग्रामीणों की सुध लेने की कोई चिंता नहीं।
"बाढ़ आपदा के तहत इस्टीमेट बनाकर उच्च कार्यालय को भेजा गया हैैं, स्वीकृति मिलने पर कार्य कराया जायेगा।
----------- अनुराग सिंह, इंजीनियर"