बेमेतरा 05 नवंबर 2026 - जिलें के शासकीय प्राथमिक शाला एवं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला आंदू में दीपावली उत्सव हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा विभिन्न रचनात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया कार्यक्रम के अंतर्गत बालिकाओं के दो समूहों, गौरी ग्रुप एवं रमा ग्रुप द्वारा आकर्षक सुआ नृत्य की प्रस्तुति दी गई। दोनों समूहों की छात्राओं ने पारंपरिक लोकनृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं परंपरा की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
13 दीप जलाकर शुभारंभ
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने दीपावली विषय पर स्वतंत्र लेखन गतिविधि में भाग लेकर अपने विचारों एवं कल्पनाओं को शब्दों में व्यक्त किया। वहीं विद्यार्थियों ने अपने हाथों से गोबर के सुंदर एवं आकर्षक दीपक तैयार किए। त्रयोदशी से पूर्व इन गोबर के 13 दीपों को प्रज्वलित कर दीपावली पर्व के उत्सव का शुभारंभ किया गया।
आकर्षक व रंग-बिरंगी रंगोलियां निर्माण
इस अवसर पर छात्राओं ने विद्यालय परिसर में विभिन्न आकृतियों की आकर्षक एवं रंग-बिरंगी रंगोलियां बनाकर अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक हुनर का प्रदर्शन किया। विद्यालय में आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति सम्मान, पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन, रचनात्मकता तथा सामूहिक सहभागिता की भावना विकसित करना था।
इस प्रकार विद्यालय में दीपावली का उत्सव केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर शिक्षा, संस्कृति, कला एवं परंपरा के सुंदर संगम के रूप में मनाया गया।
त्रयोदशी को धनतेरस पर्व
शिक्षक आशीष वर्मा ने बच्चों को त्रयोदशी मनाने के पीछे छुपी हुई मान्यता को बताया कि कार्तिक मास पक्ष के त्रयोदशी को धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे। इस दिन मां लक्ष्मी भगवान कुबेर और धन्वंतरि की पूजा के साथ नई वस्तुएं सोना चांदी और बर्तन खरीदने की पुरानी परंपरा है।
नरक चौदस/छोटी दिवाली/रूप चौदस या रूप चतुर्दशी
शिक्षक अनीश दास मानिकपुरी ने बच्चों को नरक चौदस की कथा बताई। शिक्षक ने बताया कि दीपावली के दूसरे दिन नरक चौदस या जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण के द्वारा अत्याचारी राक्षस नरकासुर के वध की खुशी में मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार नरकासुर नाम का एक बेहद शक्तिशाली और अहंकारी राक्षस था, जिसने तीनों लोकों में अपना आतंक मचा रखा था। उसने देवताओं और संतों के साथ-साथ स्त्रियों को भी बंदी गृह में डाल दिया था। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया था और सभी कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था। यह घटना बुराई पर अच्छाई के जीत के रूप में मनाई जाती है और इसी उपलक्ष्य में घरों एवं आंगन में 14 दिए जलाए जाते हैं।
इस दिन का संबंध रूप चौदस या रूप चतुर्दशी से भी है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर तेल मालिश और उबटन लगाकर स्नान कम करने की परंपरा भी है, जिससे शरीर शुद्ध आरोग्य और सुंदर बना रहता है।
अंधकार, बुराई, अज्ञान पर जीत का प्रतीक दीपावली
शिक्षक वीरेंद्र बंछोर के द्वारा बताया गया कि दीपावली मुख्य रूप से अंधकार पर प्रकाश की एवं बुराई पर अच्छाई की तथा अज्ञान पर ज्ञान की जीत या विजय के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। भारत का यह सबसे बड़ा और प्रमुख प्रकाश पर्व का त्यौहार है इसी दिन भगवान श्री राम ने अयोध्या में वापसी की थी। भगवान के आने की खुशी में सभी अयोध्या वासियों ने नगर को दीयों से सजाया था और उनका स्वागत किया था तभी से यह पर दीपों के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।
आयोजन में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को प्रधान पाठक जय नारायण ठाकुर एवं मुकेश भुवार्य तथा लक्ष्मण प्रसाद साहू के द्वारा पुरस्कृत भी किया गया।
By - Bemetara Halachal (बेमेतरा हलचल) प्रमोद गुप्ता - 8959681096, 9424124522
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