छत्तीसगढ़ी सांस्कृति में सुआ नृत्य कर नेग लेने की परंपरा सदियों पुरानी
रंग बिरंगे परिधानों में सजी स्कूली बच्चे कर रहीं सुआ नृत्य
बेमेतरा 07 नवंबर 2026 - दीपावली पर्व 08 नवंबर को मनाया जाएगा। इसके साथ ही स्कूली बच्चों द्वारा मटिया, बारगांव, बलौदी सहित असपास के गांव में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति की छटा बिखरने लगी है। दीपावली के अवसर पर बच्चों द्वारा घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों के सामने सुआ नृत्य प्रस्तुत कर लोगों से नेग लेने की परंपरा सदियों पुरानी है।
विलुप्त होती जा रही परंपरा
हालांकि आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के चलते यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है, लेकिन आज भी कुछ महिलाएं व बच्चों ने इस सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए पूरे उत्साह के साथ सुआ नृत्य कर रही हैं।
गांव की बच्चियां कर रही सुवा नृत्य
सुवा नृत्य में पिपरोलडीह की हिमांशी साहू, नीलम पाल, लता निषाद, कामनी पाटिल, गीतांजलि पाटिल, खुशी यादव, मीनाक्षी यदु ने
अपनी सुआ नृत्य से लोक संस्कृति से गांव की शोभा बढ़ा रही हैं।
सुआ नृत्य बनी आकर्षण का केंद्र
इन दिनों मटिया, बारगांव, बलौदी सहित असपास के गांव की सड़कों और बाजारों में महिलाओं की टोलियां सुआ नृत्य करती नजर आ रही हैं। विभिन्न रंग के पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी बच्चों ने दुकानों और कार्यालयों के सामने पहुंचकर सुआ नृत्य की प्रस्तुति दे रही हैं। पारंपरिक गीतों और तालियों की थाप के बीच स्कूली बच्चों द्वारा नृत्य कर लोगों से नेग स्वरूप पैसे प्राप्त कर रही हैं। उनकी यह प्रस्तुति बाजार में आने-जाने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत का हिस्सा
सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कभी गांवों और कस्बों में दीपावली के दौरान इसकी विशेष रौनक देखने को मिलती थी, लेकिन बदलते दौर में नई पीढ़ी के बीच इन पारंपरिक लोक कलाओं का प्रचलन कम होता जा रहा है।
ऐसे में बारगांव व बलौदी की कुछ बच्चों द्वारा सुआ नृत्य के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास सराहनीय है। लोक संस्कृति से जुड़ी ऐसी परंपराओं को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बनी रहे।
By - Bemetara Halachal (बेमेतरा हलचल) प्रमोद गुप्ता - 8959681096, 9424124522
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